अफ़ग़ानिस्तान भूकम्प: गहरे संकटों, सीमित संसाधनों से जूझ रहे देश के लिए समर्थन की अपील
अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी हिस्से में स्थित दूरदराज़ के इलाक़ों में आए भीषण भूकम्प के बाद, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ बचाव एवं राहत प्रयासों में जुटी हैं और ज़रूरतमन्दों के लिए सहायता की व्यवस्था की जा रही है. काबुल में यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) की प्रमुख ऐमी मार्टिन ने यूएन न्यूज़ हिन्दी को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान को सूखे की समस्या, ईरान व पाकिस्तान से लौटने वाली शरणार्थी आबादी के साथ-साथ अन्य कई चुनौतियाँ से जूझना पड़ रहा है, जबकि उसके पास सीमित संसाधन हैं. पिछले कुछ समय में दानदाताओं ने सहायता धनराशि में कटौती भी की है, और इसलिए भूकम्प पीड़ितों तक आपात राहत के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन की आवश्यकता होगी.
रिक्टर पैमाने पर 6.0 की तीव्रता वाले भूकम्प से नांगरहार, नूरिस्तान, लघमान, कुनार प्रान्तों में जान-माल की भारी हानि हुई है. 800 से अधिक लोगों की जान गई है, 2,000 से अधिक घायल हुए हैं, बड़ी संख्या में घरों को नुक़सान पहुँचा है.
अफ़ग़ानिस्तान में यूएन मानवतावादी कार्यालय की प्रमुख ऐमी मार्टिन के अनुसार, भूकम्प के बाद पहले 24 घंटे बेहद अहम हैं. लेकिन दुर्गम इलाक़ों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने से पहुँच पाना एक बड़ी चुनौती है.
20 आपात समीक्षा टीमों को उन सभी इलाक़ों में तैनात किया गया है, जहाँ पहुँचा जा सकता है. आश्रय के लिए सामान, टैंट, तिरपाल, ऊँचाई वाले इलाक़ों में कम्बल, गर्म भोजन व खाद्य सामग्री की आवश्यकता है, जिन्हें मुहैया कराया जा रहा है. सचल स्वास्थ्य दलों को भी कुछ इलाक़ों के लिए रवाना किया गया है.
यूएन एजेंसियाँ, स्थानीय प्रशासन व अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर प्रभावित इलाक़ों में राहत कार्य में जुटी हैं. नांगरहार प्रान्त की राजधानी जलालाबाद और काबुल के बीच अतिरिक्त उड़ानों की भी व्यवस्था की गई है. साथ ही, मोबाइल नैटवर्क में आए व्यवधान को भी बहाल करने की कोशिश की जा रही है.
यूएन कार्यालय प्रमुख ऐमी मार्टिन ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की है, ताकि गम्भीर रूप से घायल लोगों को जलालाबाद व काबुल के प्रान्तीय अस्पतालों तक पहुँचाया जा सके
लेकिन दानदाताओं द्वारा सहायता धनराशि में कटौती की वजह से यूएन कार्यक्रमों का दायरा सीमित हुआ है, संसाधन कम हो गए हैं, और स्टाफ़ की मौजूदगी में भी कटौती करनी पड़ी है. सूखे की विकराल स्थिति, ईरान व पाकिस्तान से शरणार्थी आबादी की वापसी से, पहले से ही संकटों से जूझ रहे अफग़ानिस्तान में मानवीय आवश्यकताएँ विशाल स्तर पर हैं, जिससे मानवीय राहत प्रयासों को और अधिक जटिल होंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में OCHA कार्यालय प्रमुख ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को न भूलाने की अपील की. उन्होंने उदारता से उन संगठनों का समर्थन करने का आग्रह किया, जोकि सक्रियता से राहत प्रयासों में जुटे हैं.
इस इंटरव्यू को संक्षिप्तता व स्पष्टता के लिए सम्पादित किया गया है.
यूएन न्यूज़: अफ़ग़ानिस्तान में आए भूकम्प से कौन से इलाक़े सर्वाधिक प्रभावित हैं और फ़िलहाल वहाँ क्या स्थिति है?
ऐमी मार्टिन: अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी हिस्से में पाकिस्तान से लगी सीमा पर स्थित नांगरहार प्रान्त में उथले स्तर पर यह भूकम्प आया, जिससे मुख्यत: चार प्रान्त प्रभावित हुए हैं: कुनार, नांगरहार, लघमान और नूरिस्तान.
आरम्भिक जानकारी के अनुसार, क़रीब 800 लोगों की जान गई है और 2,000 से अधिक घायल हुए हैं. यह एक दुर्गम क्षेत्र है. यहाँ घर पारम्परिक तरीक़े से मिट्टी से बने हुए हैं. चूँकि भूकम्प उथला था, इसलिए इन्हें भारी नुक़सान हुआ है और हमें हताहतों का आँकड़ा बढ़ने की आशंका है.
20 आपात समीक्षा टीमों को उन सभी इलाक़ों में तैनात किया गया है, जहाँ वे पहुँच सकती हैं. यह एक पर्वतीय क्षेत्र है. कुछ ही दिन पहले यहाँ भारी बारिश हुई थी, जिसकी वजह से भूस्खलन और चट्टानों के गिरने से सड़क मार्ग बाधित हुए हैं.
स्थानीय प्रशासन ने एक सड़क मार्ग को साफ़ किया है, लेकिन अभी दूसरी सड़क पर काम नहीं हो पाया है. इसलिए इन इलाक़ों में पहुँचने के लिए कोशिशें की जा रही हैं. अभी चूँकि 24 घंटे ही हुए हैं इसलिए तलाश एवं बचाव कार्य प्राथमिकता है और यह बेहद अहम है.
रैड क्रेसेन्ट टीम, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, ग़ैर-सरकारी संगठन, राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन एजेंसी की स्थानीय एजेंसियाँ, सभी आपस में मिलकर प्रभावित इलाक़ों में तलाश एवं बचाव कार्य में जुटी हैं.
लेकिन हम समझ सकते हैं कि आने वाले दिनों में आश्रय, टैंट, तिरपाल, ऊँचाई वाले इलाक़ों में कम्बल, गर्म भोजन व खाद्य सामग्री की आवश्यकता होगी, जिन्हें मुहैया कराया जा रहा है. सचल स्वास्थ्य दलों को भी कुछ इलाक़ों के लिए रवाना किया गया है.
स्थानीय प्रशासन ने हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की है, ताकि गम्भीर रूप से घायल लोगों को जलालाबाद व काबुल के प्रान्तीय अस्पतालों तक पहुँचाया जा सके. सभी मोर्चों पर प्रयास किए जा रहे हैं. मोबाइल टीम के पास चिकित्सा आपूर्ति की कमी हो सकती है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि चोट के इलाज और प्राथमिक चिकित्सा के लिए सामग्री हो.
यूएन न्यूज़: कुछ रिपोर्ट के अनुसार, बहुत से पीड़ित हाल के समय में ईरान और अफ़ग़ानिस्तान से लौटे हैं. क्या आप बता सकती हैं कि ये प्रभावित आबादी कितनी बड़ी है और उन पर किस तरह से असर हुआ है.
ऐमी मार्टिन: इस वर्ष पाकिस्तान और ईरान से क़रीब 17 लाख लोगों के वापिस लौटने की सम्भावना है. इससे पहले, पिछले वर्ष 15 लाख लोगों ने अफ़ग़ानिस्तान वापसी की थी. इसलिए पिछले कुछ समय में लगभग 25 लाख से अधिक लोग देश वापिस लौट चुके हैं, जोकि अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक विशाल संख्या है.
ऐसी रिपोर्ट हैं कि देश वापिस लौटने वाले कुछ लोग भी भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में थे, लेकिन हमारे पास कोई पुष्ट संख्या नहीं है. अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी और हम अपनी समीक्षा टीमों से और अधिक जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच किस तरह का समन्वय है? आपके विचार में आगामी दिनों में ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने में यूएन को किस तरह की समस्याएँ पेश आ सकती हैं?
ऐमी मार्टिन: यह समन्वय बहुत विकेन्द्रीकृत है, प्रान्तों में स्थानीय तौर पर हो रहा है, जहाँ हम पारस्परिक समन्वय के साथ प्रयासों को होते हुआ देख रहे हैं. राजधानी [काबुल] में भी बैठकें हुई हैं और विभिन्न मंत्रालयों, जैसेकि स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन एजेंसी व साझेदार संगठनों के साथ आगे भी जारी रहेंगी.
राहत पहुँचाने में एक बड़ी बाधा यह है कि हमें अभी तक यह नहीं पता कि इस आपदा से निपटने के लिए कितने बड़े पैमाने पर सहायता अभियान की आवश्यकता होगी. हम तेज़ी से एक योजना तैयार कर रहे हैं, लेकिन तब तक हम यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उथले भूकम्प और पहाड़ी क्षेत्रों में घरों की बनावट को देखते हुए विशाल संख्या में आश्रयों और घरों को नुक़सान पहुँचा होगा.
हम यह भी अनुमान लगा सकते हैं कि शुरुआत में बड़ी संख्या में चिकित्सा सहायता, सचल मेडिकल टीमों और चिकित्सा सामग्री की आवश्यकता होगी, साथ ही उन लोगों के लिए गर्म भोजन और खाद्य सहायता की ज़रूरत होगी जिनके ठहरने के लिए अस्थाई रूप से व्यवस्था की गई है.
लेकिन सबसे बड़ी बाधा सड़क मार्ग हैं, जो भूस्खलन और पत्थर गिरने से अवरुद्ध हो गए हैं. स्थानीय प्रशासन द्वारा रास्ता साफ़ करने की कोशिशें की जा रही हैं.
हमें हवाई सहायता की ज़रूरत है. संयुक्त राष्ट्र और UNHAS (यूएन मानवतावादी वायु सेवा) के पास अफ़ग़ानिस्तान में कोई हेलीकॉप्टर नहीं है. यह इलाक़ा दूरदराज़ के क्षेत्र में है, जहाँ सामान्य विमान के उतरने के लिए कोई रनवे नहीं है, इसलिए हमें वहाँ हेलीकॉप्टर भेजने की ज़रूरत है.
ये वे संसाधन हैं जिनकी हमें वास्तव में आवश्यकता है. लेकिन इस साल हमारे बहुत से दानदाताओं की तरफ़ से सहायता धनराशि में कटौती हुई है, जिससे हमारे कार्यक्रम का दायरा सीमित हुआ है, संसाधन कम हो गए हैं, और हमारे स्टाफ़ और मौजूदगी में भी कटौती करनी पड़ी है. इस स्थिति में तुरन्त, बड़े स्तर पर प्रयास करना एक बड़ी चुनौती है. हम सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं और करेंगे भी, लेकिन इसकी बड़ी क़ीमत होगी.
यूएन न्यूज़: आपने सहायता धनराशि को एक बड़ी चुनौती बताया, और हम जानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में यह आपदा पहले से जारी मानवतावादी प्रयासों को किस तरह से प्रभावित करेगी, विशेष रूप से जब ज़रूरतें पहले से ही बहुत हैं और आपके पास सीमित रक़म है?
ऐमी मार्टिन: तो यह एक संकट के भीतर एक और संकट है. हमें सूखा झेलना पड़ रहा है, जिससे उत्तरी प्रान्त पीड़ित थे मगर अब अब यह मध्य अफ़ग़ानिस्तान के क्षेत्रों को भी प्रभावित करना शुरू कर रहा है. इस सिलसिले में प्रयास पहले से चल रहे हैं.
हमने सूखे के विरुद्ध पूर्वानुमान पर आधारित कार्रवाई के लिए सहायता धनराशि जुटाई है, और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक अन्य अनुदान भी है. लेकिन फिर सूखे का पैटर्न भी बदल रहा है.
और दूसरी बड़ी चुनौती है, वापिस लौटने वाली आबादी. पाकिस्तान और ईरान से जो लोग लौट रहे हैं, उन्हें फिर से अफ़ग़ानिस्तान में समाहित करना, उनकी मदद करना और उनके लिए आजीविका के अवसर सृजित करना एक बड़ी चुनौती होगी. तो यह कई चुनौतियों का मिश्रण है, जोकि मानवीय राहत प्रयासों को और अधिक जटिल बना रहा है.
यूएन न्यूज़: इस संकट के सन्दर्भ में आपका वैश्विक समुदाय और अन्तरराष्ट्रीय दानदाताओं के लिए क्या सन्देश है?
ऐमी मार्टिन: यही कि समय बीता जा रहा है. भूकम्प के बाद हम शुरुआत के घंटों में जितने अधिक लोगों को बचा सकें, उतना बेहतर होता है. फिर हमें पुनर्निर्माण की ओर बढ़ना होता है, तुरन्त. और मध्य अवधि में फिर अपने घर व रोज़गार खो चुके लोगों की मदद करनी होती है.
हम चाहते हैं कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को न भूले. हम चाहते हैं कि वे उदारता से उन संगठनों का समर्थन करें जो इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं. चाहे वे स्थानीय या अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठन हों, या संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ.
यहाँ सभी पूरी तरह से जुटे हुए हैं, ज़रूरतों का मूल्यांकन कर रहे हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.
तो मेरा संदेश है: कृपया अफ़ग़ान जनता की सहायता कीजिए, उन प्रयासों और पहल को समर्थन दीजिए, जिन पर फ़िलहाल कार्य हो रहा है.