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अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिए न्याय और ‘वास्तविक बदलाव’ का समय, महासचिव

काले रंग का बंदना और हल्के भूरे रंग की जैकेट पहने एक व्यक्ति विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ में खड़ा है, उसके पास ही एक व्यक्ति मेगाफोन पकड़े हुए है।
Unsplash/Thomas de Luze फ़्राँस की राजधानी पैरिस में ब्लैक लाइव्स मैटर का एक विरोध प्रदर्शन.

अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिए न्याय और ‘वास्तविक बदलाव’ का समय, महासचिव

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 'अफ़्रीकी मूल के व्यक्तियों के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस' के अवसर पर, उनके लिए न्याय, गरिमा और समानता सुनिश्चित किए जाने की अपील की है. यह दिवस हर साल 31 अगस्त को मनाया जाता है.

महासचिव गुटेरेश ने इस दिवस पर जारी अपने एक सन्देश में, अफ़्रीकी मूल के व्यक्तियों के “असाधारण” योगदान का सम्मान किया, जिन्होंने मानव जीवन के हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है.

साथ ही, उन्होंने दास प्रथा और औपनिवेशिक शासन की “लम्बी परछाई” के प्रति सचेत किया, जो आज भी व्यवस्थागत नस्लवाद, असमान अर्थव्यवस्थाओं, और समाजों व डिजिटल दरारों (डिजिटल तकनीक का लाभ उठाने में सक्षम और इससे वंचित समुदायों के बीच की खाई) के रूप में मौजूद है.

इस क्रम में, यूएन प्रमुख ने 'वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट' पहल का उल्लेख किया, जिसे 2024 में 'भविष्य के लिए सहमति-पत्र' (Pact for the Future) के तहत पारित किया गया था.

यह समझौता, वर्तमान वास्तविकताओं को परिलक्षित करने वाली बहुपक्षीय व्यवस्था को आगे बढ़ाता है,और हर जगह, हर एक व्यक्ति के लिए, न्यायसंगत लाभ सुनिश्चित करने पर लक्षित है. वहीं, डिजिटल कॉम्पैक्ट में टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में पनप रहे भेदभाव और नफ़रत भरी बोली व सन्देशों से निपटने के लिए संकल्प व्यक्त किया गया है.

महासचिव के अनुसार, “श्वेत वर्चस्ववाद और अमानवीयकरण करने वाले आख्यानों (narratives) को सोशल मीडिया बढ़ावा देता है, और अक्सर एल्गोरिदम में भी नस्लीय पूर्वाग्रह रचे-बसे हैं.”

“संयुक्त राष्ट्र चार्टर में प्रत्येक व्यक्ति के समान अधिकार और अन्तर्निहित गरिमा को स्थापित हुए 80 वर्ष, और नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अन्तरराष्ट्रीय कन्वेन्शन को अपनाए हुए 60 वर्ष बीत चुके हैं. ऐतिहासिक अन्यायों को सुधारने का समय बहुत पहले ही आ चुका है."

पारंपरिक अफ्रीकी पोशाक पहने हुए अफ्रीकी मूल के चार युवक घर के अंदर एक साथ हंसते और पोज देते हुए नजर आ रहे हैं।
PAHO पहली बार, 31 अगस्त 2021 को, अफ़्रीकी मूल के लोगों का अन्तरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया है.

दूसरा अन्तरराष्ट्रीय दशक

अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिए दूसरे अन्तरराष्ट्रीय दशक (1 जनवरी 2025 – 31 दिसम्बर 2034) के दौरान मनाया जाने वाला यह पहला अन्तरराष्ट्रीय दिवस है. 

इस दशक के लिए थीम है: अफ़्रीकी मूल के व्यक्ति: मान्यता, न्याय और विकास, जिसका उद्देश्य उनके योगदानों व अधिकारों की अहमियत पर बल देना है. 

महासचिव ने अगले दस वर्षों को “वास्तविक परिवर्तन” को आगे बढ़ाने का समय बताया है और अपील की है कि अफ़्रीकी मूल के लोगों के मानवाधिकारों पर केन्द्रित एक संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र की दिशा में आगे बढ़ना होगा.

पहले अन्तरराष्ट्रीय दशक (2015–2024) में, 30 से अधिक देशों ने नस्लीय भेदभाव से निपटने और अफ़्रीकी मूल के लोगों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए अपने क़ानूनों और नीतियों में बदलाव किए थे.

इस दौरान अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिए स्थाई फ़ोरम (Permanent Forum on People of African Descent) की स्थापना हुई और नए अन्तरराष्ट्रीय दिवसों की शुरुआत की गई, जिनमें विशेष रूप से अफ़्रीकी मूल की महिलाओं और लड़कियों के योगदान का सम्मान शामिल है.

2015-2024 के दशक में हासिल की गई प्रगति पर आगे बढ़ते हुए, इस दूसरे दशक से न्याय और विकास के वैश्विक प्रयासों को और मज़बूती मिलने की आशा है, ताकि अफ़्रीकी मूल के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों को पूरी तरह मान्यता व सम्मान हासिल हो सके.