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अफ़ग़ानिस्तान: तालेबानी पाबन्दियों की बावजूद, लड़कियों की शिक्षा के लिए पुरज़ोर समर्थन

एक छोटी लड़की और उसके पिता एक घर में एक पैटर्न वाले कालीन पर एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं, उनके सामने किताबें खुली रखी हैं।
© UNICEF/Munir Tanwee/Daf recor स्कूली पढ़ाई रुक जाने के बाद एक अफ़ग़ान लड़की अपने पिता की मदद से घर पर पढ़ाई कर रही है.

अफ़ग़ानिस्तान: तालेबानी पाबन्दियों की बावजूद, लड़कियों की शिक्षा के लिए पुरज़ोर समर्थन

महिलाएँ

विश्व भर में लड़के-लड़कियाँ जहाँ हर साल की तरह सितम्बर के महीने में स्कूल वापिस लौटने की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियाँ, अपनी पढ़ाई-लिखाई पर तालेबान द्वारा थोपी गई पाबन्दी के चार वर्ष पूरे होने की ओर ताक रही हैं. मगर, एक सर्वेक्षण के नतीजे दर्शाते हैं कि इस अंकुश के बावजूद 92 प्रतिशत अफ़ग़ान लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा के समर्थन में है.

तालेबान ने अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर दूसरी बार अपना वर्चस्व स्थापित किया और उसके बाद ही महिलाओं व लड़कियों पर प्रतिबन्धों की लहर शुरू हो गई थी.

लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा, महिलाओं की युनिवर्सिटी में पढ़ाई-लिखाई, उनके कामकाज, घर से बाहर आने-जाने, सार्वजनिक निर्णय में भागेदारी समेत अन्य अधिकारों जैसेकि पार्क, जिम व खेलकूद में हिस्सा लेने पर अंकुश लगा दिए गए.  

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महिला सशक्तिकरण के लिए यूएन संस्था (UN Women) ने शुक्रवार को अपने एक नए सर्वेक्षण के नतीजे साझा किए हैं, जिसके लिए देश भर में घर-घर जाकर दो हज़ार से अधिक अफ़ग़ानों से बात की गई. 

हर 10 में से 9 प्रतिभागी का मानना है कि अफ़ग़ान लड़कियों के लिए अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखना बहुत आवश्यक है.

ग्रामीण आबादी में, इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 87 प्रतिशत पुरुषों और 95 प्रतिशत महिलाओं ने लड़कियों की स्कूली पढ़ाई का समर्थन किया, जबकि शहरी इलाक़ों में दोनों के लिए यह आँकड़ा 95 फ़ीसदी है.

यूएन एजेंसी में मानवतावादी कार्रवाई प्रमुख सोफ़िया कॉलटोर्प ने जिनीवा में पत्रकारों को इस नए ‘Gender Alert’ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शहरी व ग्रामीण समुदायों, महिलाओं व पुरुषों, सभी ने लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई के लिए पुरज़ोर समर्थन व्यक्त किया है.

“यह स्पष्ट है: मौजूदा पाबन्दियों के बावजूद, अफ़ग़ान लोग अपनी लड़कियों को शिक्षा का अधिकार हासिल करते हुए देखना चाहते हैं.”

इस ऐलर्ट में, अफ़ग़ानिस्तान में जीवन के कई पहलुओं में महिलाओं व लड़कियों की वर्तमान स्थिति को भी परखा गया है, जैसेकि शिक्षा व रोज़गार, सुरक्षा व आवाजाही.

‘जैंडर ऐलर्ट’ के अन्य अहम निष्कर्ष:

  • 14 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से केवल सप्ताह में एक बार ही बाहर जाती हैं, जबकि केवल दो फ़ीसदी पुरुषों के लिए ही यह स्थिति है.
     
  • 41 प्रतिशत महिलाएँ दिन में कम से कम एक बार घर से बाहर जा रही हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह आँकड़ा 88 प्रतिशत है.
     
  • अपने जीवन पर व्यवस्थागत पाबन्दियों के बावजूद, 40 प्रतिशत अफ़ग़ान महिलाएँ अब भी अपने लिए बदलाव व समानता से परिपूर्ण भविष्य की कल्पना करती हैं. हालांकि सार्वजनिक भागेदारी के सभी विकल्प उनके लिए मोटे तौर पर समाप्त हो चुके हैं.
     
  • हर चार में से तीन महिलाओं ने अपने मानसिक स्वास्थ्य को ख़राब या बहुत ख़राब बताया है.
     
  • हर चार में से तीन महिलाओं का मानना है कि अपने समुदायों में निर्णय प्रक्रिया में उनका कोई प्रभाव नहीं है. 50 प्रतिशत के अनुसार, उनकी अपने वृहद परिवार में कोई आवाज़ नहीं है और एक-चौथाई ने अपने घर-परिवार में कोई प्रभाव न होने की बात कही है.