ग़ाज़ा व क़ाबिज़ पश्चिमी तट में टकराव पर विराम के लिए, निर्णायक क़दम उठाने पर बल
ग़ाज़ा पट्टी में पिछले क़रीब दो वर्ष से जारी युद्ध, क़ाबिज़ पश्चिमी तट पर हिंसा और वहाँ इसराइली बस्तियों का विस्तार, मध्य पूर्व क्षेत्र में व्याप्त मौजूदा संकट दर्शाता है कि इसराइल व फ़लस्तीन के बीच टकराव का अन्त किए जाने की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने येरुशलम से जानकारी देते हुए बताया कि क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में हालात से दुनिया सकते में है, जहाँ हाल के इतिहास में ऐसी बदतरीन परिस्थितियाँ नहीं देखी गईं.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा आपदा के गर्त में गहराई तक धँसता जा रहा है. हताहत होने वाले आम फ़लस्तीनियों का आँकड़ा बढ़ता जा रहा है, सामूहिक विस्थापन हो रहा है और अकाल ने भी पाँव पसारे हैं. मौजूदा टकराव का कोई अन्त फ़िलहाल नज़र नहीं आ रहा है.
उप समन्वयक ने कहा कि ग़ाज़ा की आबादी को इस टकराव में एक और तेज़ी से जूझना पड़ रहा है, चूँकि इसराइल ने ग़ाज़ा सिटी को अपने नियंत्रण में लेने की घोषणा की है.
“एक आबादी, जोकि पहले से ही गुज़र-बसर के लिए जूझ रही है, ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी अपनी बदतरीन आशंकाओं को अपनी आँखों के सामने वास्तविकता में तब्दील होते देख रहे हैं.
रमीज़ अलकबरोव ने आगाह किया कि ग़ाज़ा सिटी में सैन्य अभियान का दायरा बढ़ने के विनाशकारी नतीजे होंगे, और लाखों लोग विस्थापित हो सकते हैं.
हवाई हमलों में तेज़ी
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए उप समन्वयक के अनुसार, ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सैन्य हमलों में तेज़ी आई है, विस्थापितों के आश्रय के लिए बनाए गए टैंट, स्कूलों, अस्पतालों और रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया जा रहा है.
स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने बताया है कि 23 जुलाई से अब तक, कम से कम 2,553 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें से 271 की मौत मानवीय सहायता प्राप्त करने की कोशिश के दौरान हुई है.
हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों ने 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमले किए थे, जिसके बाद शुरू हुई इसराइली कार्रवाई में अब तक 240 से अधिक पत्रकार मारे जा चुके हैं.
रमीज़ अलकबरोव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ग़ाज़ा में ज़रूरतमन्द आबादी तक मदद पहुँचाने में जुटा है, मगर सुरक्षा जोखिम बहुत अधिक है और उन्हें कम करने के प्रयास अपर्याप्त हैं.
ग़ाज़ा में अकाल, मानव-निर्मित आपदा
यूएन मानवतावादी कार्यालय की सहायक महासचिव जॉयस म्सूया ने अपने सम्बोधन में हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसके अनुसार, ग़ाज़ा गवर्नरेट में अकाल पाँव पसार चुका है और अन्य इलाक़ों के इसकी चपेट में आने की भी आशंका है.
उन्होंने कहा कि पाँच लाख से अधिक भुखमरी व मौत का सामना कर रहे हैं और सितम्बर के अन्त तक पीड़ितों की संख्या 6.40 लाख तक पहुँच सकती है.
अगले वर्ष के मध्य तक कुपोषण का शिकार, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 1.32 लाख को छू सकती है और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के भी कुपोषण की चपेट में आने की आशंका है.
जॉयस म्सूया ने कहा कि यह अकाल किसी सूखे या फिर प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं है. इस आपदा को बनाया गया है, जोकि एक टकराव का परिणाम है, जिसकी वजह से आम नागरिक मारे गए हैं, घायल हुए हैं, विध्वंस हुआ है और जबरन विस्थापन हुआ है.
सहायक महासचिव ने सुरक्षा परिषद से इस आपदा का अन्त करने के लिए तुरन्त क़दम उठाने, टकराव ख़त्म करने, अकाल फैलने से रोकने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि बन्धकों की बिना शर्त रिहाई की जानी होगी और सभी आम नागरिकों व बुनियादी ढाँचे की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी.
जीवित बचे व्यक्तियों, बन्धकों से मुलाक़ात
यूएन अधिकारी रमीज़ अलकबरोव ने इसराइल में प्रभावित समुदायों का भी दौरा किया और 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमलों में जीवित बचे व्यक्तियों, और बन्धक बनाए गए लोगों के परिजन से मुलाक़ात की.
“मैंने निर ओज़ में बर्बाद घरों को देखा, जहाँ हर चार में से एक निवासी की 7 अक्टूबर को या तो हत्या कर दी गई या फिर अगवा कर लिया गया. मैं उन जीवितों से मिला जिन्हें असहनीय सदमा व पीड़ा है.”
एक महिला समेत क़रीब 50 व्यक्ति अब भी ग़ाज़ा में हमास और अन्य फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुटों की पकड़ में हैं, जबकि 28 की मौत हो जाने की आशंका है.
रमीज़ अलकबरोव ने कहा कि हमास और फ़लस्तीनी जिहाद ने बेहद कमज़ोर हो चुके इसराइली बन्धकों के वीडियो जारी किए हैं, जोकि व्यथित कर देने वाले हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बन्धकों के साथ दुर्व्यवहार और उनको प्रताड़ित किया जाना अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है.
क़ाबिज़ पश्चिमी तट में हिंसा
इस बीच, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में भी हालात निरन्तर बिगड़ते जा रहे हैं और भावी फ़लस्तीनी राष्ट्र के लिए ज़मीन सिकुड़ती जा रहा है. उप समन्वयक ने कहा कि ग़ैरक़ानूनी क़ब्ज़े और निरन्तर हिंसा की एक-राष्ट्र वास्तविकता आकार ले रही है.
इसराइली सुरक्षा बलों ने शरणार्थी शिविरों पर अपना सैन्य अभियान जारी रखा है, जिसकी वजह से 32 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं. पिछले तीन महीनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 9 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें चार बच्चे हैं.
इसराइसी बस्तियों के निवासियों द्वारा भी हमले किए जा रहे हैं, जिनमें तीन फ़लस्तीनी मारे गए हैं, फ़लस्तीनी सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचा है और आम लोग विस्थापित हुए हैं.
इसराइलियों के विरुद्ध फ़लस्तीनी भी हमले कर रहे हैं, मगर पिछले एक महीने के दौरान किसी की जान जाने की ख़बर नहीं है.
ग़ाज़ा में युद्ध शुरू होने के बाद से, इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों के हमलों में तेज़ी आई है और अब पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा हिंसा हो रही है.
उन्होंने कहा अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से स्पष्ट सन्देश है: दो-राष्ट्र समाधान, इसराइल-फ़लस्तीन टकराव के न्यायसंगत व स्थाई निपटारे के लिए एकमात्र व्यवहारिक रास्ता है, जिसके लिए उन्होंने ठोस क़दम उठाए जाने का आग्रह किया है.