सूडान: अल फ़शर शहर की 500 दिन से घेराबन्दी, विस्थापन, कुपोषण व हिंसा का प्रकोप
सूडान में नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त का अल फ़शर शहर, हिंसक टकराव के बीच कुपोषण, बीमारी और बाल पीड़ा का केन्द्र बन गया है, जहाँ बच्चे अपनी जान गँवा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने चेतावनी दी है कि पिछले 500 दिनों से घेराबन्दी का सामना कर रहे इस शहर की आबादी सहायता आपूर्ति से वंचित है और हताश परिस्थितियों में फँसी हुई है.
एक अनुमान के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अल फ़शर और उसके नज़दीक स्थित शिविरों से कम से कम छह लाख लोग विस्थापित हुए हैं. शहर के भीतर 2.60 लाख लोग विकट हालात में जीवन गुज़ार रहे हैं, जिनमें 1.30 लाख बच्चे हैं.
सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में हिंसक टकराव भड़का था. RSF ने अल फ़शहर की घेराबन्दी की हुई है, जिसकी वजह से ज़रूरी सामान की आपूर्ति ठप हो चुकी है.
स्वास्थ्य केन्द्र व सचल पोषण दलों को अपनी सेवा स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिसकी वजह से छह हज़ार से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित हैं और उनका उपचार नहीं हो पा रहा है.
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि हम अल फ़शर में एक विनाशकारी त्रासदी को देख रहे हैं. बच्चे भुखमरी का शिकार हैं, जबकि पोषण सेवाओं को अवरुद्ध किया जा रहा है.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानवीय सहायता आपूर्ति को रोकना बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, और इसलिए लड़ाई पर विराम लगाया जाना होगा ताकि सभी ज़रूरतमन्द बच्चों तक जीवनरक्षक मदद पहुँचाई जा सके.
अल फ़शर में जारी लड़ाई का बच्चों पर भीषण असर हुआ है. 16 महीने पहले अप्रैल 2024 में शहर की घेराबन्दी शुरू हुई थी, और अब तक वहाँ अधिकार हनन के 1,100 गंभीर मामले दर्ज किए जा चुके हैं.
एक हज़ार से अधिक बच्चों की जान गई है या फिर वे अपंग हुए हैं. बड़ी संख्या में बच्चे अपने घरों, विस्थापन शिविरों और बाज़ारों में हिंसा का निशाना बने हैं.
यूनीसेफ़ के अनुसार, कम से कम 23 बच्चों को बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया है, जबकि अन्य को अगवा या फिर लड़ाके के रूप में भर्ती किया गया है.
हिंसा प्रभावित इलाक़े तक सीमित पहुँच होने और जानकारी सत्यापन में चुनौतियों के कारण आशंका जताई गई है कि प्रभावित बच्चों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है.
सहायता सामग्री की क़िल्लत
स्वास्थ्य व शिक्षा केन्द्रों पर निरन्तर हमले हुए हैं. कुपोषण की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और अल फ़शर में 10 हज़ार से अधिक बच्चों का इस वर्ष जनवरी से अब तक उपचार किया जा चुका है. लेकिन सहायता सामग्री ख़त्म होने की वजह से इन सेवाओं को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
हाल के दिनों में कुपोषण की वजह से कम से कम 63 लोगों की जान जाने की रिपोर्ट है, जिनमें अधिकाँश महिलाएँ व बच्चे हैं.
अल फ़शर की घेराबन्दी से बदतरीन परिस्थितियाँ एक ऐसे समय में हो रही हैं, जबकि सूडान में हैज़ा का प्रकोप है. जुलाई 2024 से अब तक 96 हज़ार संदिग्ध मामले सामने आए हैं और देश भर में 2,400 लोगों की जान गई है. केवल दारफ़ूर क्षेत्र में पाँच हज़ार से अधिक संक्रमण मामले हैं और 98 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं.
इन कठिन हालात में, यूनीसेफ़ ने सूडान सरकार और सभी सम्बद्ध पक्षों से ज़रूरतमन्द बच्चों तक निरन्तर मदद पहुँचाने के लिए रास्ता मुहैया कराने की पुकार लगाई है. साथ ही, सूडान में तुरन्त हिंसक टकराव प्रभावित इलाक़ों में मानवीय आधार पर लड़ाई में ठहराव देना होगा और यूएन सहायता प्रयासों को फिर से शुरू करने में समर्थन दिया जाना होगा.