वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां
UNIC इंडिया के एक कार्यक्रम में छात्रों द्वारा निर्मित परियोजनाएं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स से सुसज्जित एक लकड़ी की गाड़ी और एक लघु भूदृश्य मॉडल शामिल हैं, एक मेज पर प्रदर्शित की गई हैं।

युवाओं के सपनों से बदलती तस्वीर: एआई से टिकाऊ भविष्य की ओर

© UNIC India/Rohit Karan इन नवाचारों ने दिखाया कि ज़मीनी स्तर के समाधान स्थानीय समस्याएँ सुलझाकर, किस तरह पूरे समाज में बदलाव ला सकते हैं.

युवाओं के सपनों से बदलती तस्वीर: एआई से टिकाऊ भविष्य की ओर

एसडीजी

भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (UNIC) ने, 1M1B (वन मिलियन फ़ॉर वन बिलियन) संस्थान के साथ मिलकर एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित कियाजहाँ देशभर के युवा परिवर्तनकर्ता अपने विचारों और नवाचारों के साथ सामने आए. इस मंच ने दिखाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकरगाँव-गाँव और शहर-शहर तक समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत कर सकती है.

दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ कॉलेज की छात्रा ध्रुविका तब पशोपेश में पड़ गईं, जब उनके भाई ने टीवी की बैटरियाँ बदलते हुए उनसे पूछा, “इन्हें कहाँ फेंकूँ?”. इसका जवाब उनके पास नहीं था. यहीं से उनके दिमाग़ में एक वेबसाइट बनाने का विचार आया, जो लोगों को बताए कि अपने कचरे की किस तरह सही तरीक़े से री-सायकलिंग की जाए.

त्रिपुरा की पोरोमिता ने देखा कि उसके कॉलेज में मीडिया और टैक्नॉलॉजी के क्लब तो हैं, लेकिन पर्यावरण पर केन्द्रित कोई मंच नहीं है. 

उन्होंने इस कमी को दूर करने के लिए “Greenit Chat” नामक चैटबॉट बनाया, जिससे लोग दोस्त की तरह बातचीत कर सकें और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में काम आने वाले छोटे-छोटे टिकाऊ क़दमों के बारे में सीख सकें.

गुरू गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के छात्र अमित कुमार ने अपने रोज़ाना के ट्रेन सफ़र से प्रेरणा लेकर “स्वच्छ स्कोर ऐप” बनाया. यह ऐप यात्रियों को किसी भी रेलवे प्लेटफ़ॉर्म की सफ़ाई की स्थिति की वास्तविक समय में रेटिंग व रिपोर्ट करने की सुविधा देता है. इस स्कोर से सीधे अधिकारियों पर स्वच्छता पर ध्यान देने का दबाव बनता है.

तीनों कहानियों से स्पष्ट है कि रोज़मर्रा की छोटी घटनाएँ भी, युवाओं को बड़े बदलाव की राह पर ले जा सकती हैं.

प्रेरक कार्यक्रम

युवा नवाचार को एक मंच देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (UNIC) और 1M1B (वन मिलियन फ़ॉर वन बिलियन) संस्थान ने एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया. इसका उद्देश्य यही था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के ज़रिए तैयार हो रहे इन नवाचारों को सामने लाया जाए और यह दिखाया जाए कि ये समाधान, किस तरह गाँव से लेकर शहर तक समाज को बदलने की क्षमता रखते हैं.

कार्यक्रम में UNIC इंडिया के निदेशक डैरेन फ़ेरेंट ने कहा, “यदि हमें सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पाना है, तो युवाओं को अपने प्रयासों के केन्द्र में रखना होगा. भारत के युवा पहले से ही जलवायु कार्रवाई और सामाजिक बदलाव के लिए अद्भुत समाधान खोज रहे हैं."

"मुझे उम्मीद है कि ऐसी पहलें अधिक लोगों को प्रेरित करेंगी कि वे अपने समुदायों के लिए समाधान तैयार करें और एक अधिक टिकाऊ व न्यायपूर्ण दुनिया बनाएँ.”

1M1B के संस्थापक और मुख्य मार्गदर्शक मानव सुबोध ने ज़ोर देते हुए कहा, "सन् 1919 में जब कम्प्यूटर आए, तो उनके बारे में शिक्षा और प्रशिक्षण की एक अलग ही श्रेणी बन गई थी — कम्प्यूटर साइंस टीचर्स, अलग लैब्स, और सीमित पहुँच. हम एआई के साथ वही ग़लती नहीं दोहराना चाहते.”

प्रतिभागियों के नवाचार

आरव गुप्ता – आरोग्या मोबिलिटी

दिल्ली के कक्षा 11 के छात्र आरव ने अपने एक बीमार दोस्त की कठिनाई देखकर यह परियोजना शुरू की, जिसे एक सस्ती लेकिन स्मार्ट व्हीलचेयर की ज़रूरत थी. महँगी मोटर से चलने वाली व्हीलचेयर की तुलना में उनकी व्हीलचेयर को मोबाइल फ़ोन, बटन और वॉइस कमांड से चलाया जा सकता है. भविष्य में वे इसे और किफ़ायती बनाने और क्षेत्रीय भाषाओं के वॉइस कमांड जोड़ने पर काम कर रहे हैं.

साँची बंसल – YOU App

दिल्ली की साँची बंसल ने LGBTQ+ समुदाय के लिए “YOU App” बनाया. यह सिर्फ़ मानसिक स्वास्थ्य और करियर अवसरों का मंच नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल स्थान है जहाँ हाशिए पर धकेले गए इस समुदाय को सम्मान और सहयोग मिले.

भारतीय ध्वज के रंगों से सजी एक मेज पर सर्किट बोर्ड और सेंसर सहित इलेक्ट्रॉनिक घटकों से युक्त एक स्मार्ट होम का मॉडल रखा गया है।
© UNIC India/Rohit Karan

नक्ष मान – Power Supply Device

दिल्ली के नक्ष मान ने बिजली की असमान उपलब्धता से प्रेरणा लेकर एक एआई आधारित उपकरण बनाया, जो आपातस्थिति में एक केन्द्र से दूसरे केन्द्र को बिजली भेज सकता है. 

यह डिवाइस, मशीन लर्निंग से डेटा लेकर तय करता है कि कहाँ अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है और कहाँ भेजी जानी चाहिए. नक्ष चाहते हैं कि अस्पतालों जैसी ज़रूरी जगहों पर यह समाधान जीवन बचाने में मदद करे.

फ़ाल्गुन बडानी – Sign Sync Device

दिल्ली के छात्र फ़ाल्गुन ने अपने स्कूल के एक साथी की कठिनाइयों को देखकर “Sign Sync” बनाया. यह उपकरण बातचीत को साकेंतिक भाषा और सांकेतिक भाषा को आवाज़ में बदलता है. इससे सुनने में असमर्थ लोग और वे लोग जो साकेंतिक भाषा नहीं जानते, दोनों के बीच समवाद आसान हो जाता है.

UNIC इंडिया ग्रीन स्किल्स कार्यक्रम में भारतीय युवाओं और अधिकारियों का एक समूह प्रमाण पत्र पकड़े हुए मंच पर पोज दे रहा है।
© UNIC India/Rohit Karan

गौरी गुप्ता – Tribal Vikas

जयपुर की गौरी गुप्ता ने “Tribal Vikas” मंच बनाया, जो आदिवासी समुदाय को डिजिटल साक्षरता और क़ानूनी अधिकारों की जानकारी देता है. 

गौरी ने, शुरुआती झिझक और भाषा की बाधाओं के बावजूद, समुदाय का भरोसा जीता और उन्हें तकनीक के ज़रिए आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया.

कचरे को अलग करने के लिए डिज़ाइन किए गए पहियों वाले रोबोट का एक प्रोटोटाइप, जिसके अग्रभाग में कालीन वाले फर्श पर एक प्लास्टिक की बोतल पड़ी है।
© UNIC India/Rohit Karan

दिव्यम – Eco-Rover

दिल्ली के छात्र दिव्यम ने बचपन में, हर जगह फैला कचरा देखकर सोचा कि क्यों न इसे मशीन से सुलझाया जाए. 

उन्होंने एक रोबोटिक प्रणाली विकसित की, जो कूड़े का अलग-अलग श्रेणियों - प्लास्टिक, इलैक्ट्रॉनिक, काँच, कपड़ा आदि में पृथकीकरण कर सकती है. 

दिव्यम मानते हैं कि अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर लागू हो, तो कूड़ा घरों का बोझ काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.

इन कहानियों में सामने आए सभी समाधानों के पीछे एक ही सन्देश है — युवा अपनी कल्पनाशक्ति व तकनीक से समाज को बदल सकते हैं.

1M1B के संस्थापक मानव सुबोध मानो इसका सार प्रस्तुत करते हुए कहते हैं, “हम नहीं चाहते कि एआई केवल बड़े शहरों या चुनिन्दा संस्थानों तक सीमित हो. जब तक गाँव के बच्चे और लड़कियाँ इसमें शामिल नहीं होंगे, तब तक बदलाव अधूरा रहेगा." 

"ओपन सोर्स एआई का उपयोग करके हमें यह तकनीक हर बच्चे तक पहुँचानी है, ताकि वे अपनी समुदायों के लिए स्थानीय समाधान बना सकें.”