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ग़ाज़ा: '5 अन्य पत्रकारों की हत्या पर, दुनिया को कार्रवाई करने की ज़रूरत'

एक महिला ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस में नासेर अस्पताल पर हमले में मारे गए नवजात शिशु का शव ले जाती हुई.
© UN Women/Samar Abu Elouf एक महिला ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस में नासेर अस्पताल पर हमले में मारे गए नवजात शिशु का शव ले जाती हुई.

ग़ाज़ा: '5 अन्य पत्रकारों की हत्या पर, दुनिया को कार्रवाई करने की ज़रूरत'

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा में सोमवार को अस्पताल पर किए गए इसराइली हमलों में पाँच अन्य फ़लस्तीनी पत्रकारों की मौत के बाद, यूएन मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि अब विश्व समुदाय को इस भयावह स्थिति पर कार्रवाई करनी चाहिए. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कुल 247 फ़लस्तीनी पत्रकारों की मौत हो चुकी है.

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OHCHR के प्रवक्ता थमीन अल-ख़ीतान ने जिनीवा में कहा कि ख़ान यूनिस स्थित नासेर अस्पताल पर इसराइली हमलों की निन्दा, अब जवाबदेही और मारे गए सभी लोगों के लिए न्याय की माँग में बदलनी चाहिए. 

इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई, जिनमें चार स्वास्थ्यकर्मी और पाँच पत्रकार थे.

इन हमलों में मारे गए पत्रकारों के नाम अहद अबू अज़ीज़, हुस्साम अल-मसरी, मरियम दग्गा, मोहम्मद सलामा और मोआज़ अबू ताहा बताए गए हैं. 

वे मिडल ईस्ट आई, एसोसिएटेड प्रेस, अल जज़ीरा और रॉयटर्स जैसे  मीडिया संस्थानों से जुड़े थे.

बचावकर्मियों पर हमले

घटना स्थल की एक वीडियो में नज़र आता है कि दूसरा हमला उन बचावकर्मियों पर किया गया, जो सोमवार को पहले हमले के बाद ग़ाज़ा के दक्षिणी हिस्से के इस सबसे बड़े अस्पताल में पहुँचे थे.

OHCHR प्रवक्ता ने कहा कि “हमें मालूम है कि पाँच पत्रकारों में से एक की मौत पहले हवाई हमले में हुई, जबकि तीन अन्य की मौत दूसरे हवाई हमले में हुई, जिनमें एक महिला पत्रकार भी हैं."

"यह चौंकाने वाला है और बिल्कुल अस्वीकार्य है.”

उन्होंने बताया कि “7 अक्तूबर 2023 से अब तक ग़ाज़ा में कम से कम 247 फ़लस्तीनी पत्रकार मारे जा चुके हैं.”

“ये पत्रकार पूरी दुनिया की आँखें और कान हैं और इनकी सुरक्षा की जानी होगी…यह बात कई गम्भीर सवाल खड़े करती है कि पत्रकारों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है. इन सभी घटनाओं की पूरी तरह जाँच होनी चाहिए और ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.”

प्रवक्ता ने कहा कि OHCHR, सोमवार के हमलों के तथ्यात्मक विवरणों की पुष्टि करने का काम जारी रखे हुए है.

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उन्होंने कहा कि पत्रकारों और अस्पतालों को निशाना बनाना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत प्रतिबन्धित है.

लोगों की सुरक्षा पर ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को (UNESCO) की प्रमुख ऑड्री अज़ूले ने भी ग़ाज़ा में पत्रकारों की हत्याओं की निन्दा की है.

उन्होंने दोहराया कि 2015 में सर्वसम्मति से पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2222, युद्ध की स्थिति में पत्रकारों, मीडिया पेशेवरों और सहयोगी कर्मचारियों की नागरिक के रूप में सुरक्षा पर ज़ोर देता है, और उसका पालन किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि यूनेस्को, ग़ाज़ा पट्टी में पत्रकारों को आपातकालीन सहायता प्रदान कर रहा है, जिसमें मानसिक-सामाजिक सहयोग, कार्य के लिए उपकरण उपलब्ध कराना और क्षमता-विकास कार्यक्रम शामिल हैं.

जाँच के नतीजे आने चाहिए

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने इन हत्याओं पर प्रतिक्रिया देते हुए खेद व्यक्त किया और इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण हादसा” बताया.

उन्होंने कहा कि इसराइली सेना “व्यापक जाँच” करेगी.

OHCHR के प्रवक्ता थमीन अल-ख़ीतान ने जिनीवा में पत्रकारों से कहा कि इसराइली अधिकारी, बतौर क़ब्ज़ा करने वाली शक्ति, पहले भी जाँच कर चुके हैं.

लेकिन, उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “इन जाँचों से नतीजे निकलने चाहिए. न्याय होना चाहिए. अभी तक तो हमने कोई ठोस नतीजे या जवाबदेही की कार्रवाइयाँ नहीं देखी हैं.”

भूख से मौतों में वृद्धि

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ग़ाज़ा में भूख से तीन और लोगों की मौत हो गई, जिससे भूख के कारण मौत के मुँह में जाने वाले लोगों की संख्या 303 तक पहुँच गई है. 

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन मृतकों में 117 बच्चे हैं.

इसराइली सेनाओं ने, ग़ाज़ा सिटी के आद दाराज और अश शेख़ रदवान ज़िलों में, नए बेदख़ली आदेश जारी किए हैं, जिससे परिवारों को फिर से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

14 अगस्त से शुरू हुए इस हमले के बाद से, 36 हज़ार 200 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा कि “लोग अपने जीवन की ख़ातिर, लगातार पलायन कर रहे हैं.” 

अस्पतालों में रक्त की कमी

अस्पतालों द्वारा अब रक्त की गम्भीर कमी की चेतावनी दी जा रही है. घायलों का इलाज करने के लिए उन्हें प्रतिदिन रक्त की 350 से अधिक यूनिट की आवश्यकता है, लेकिन भुखमरी बढ़ने के कारण रक्तदान बन्द हो गया है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने तात्कालिक अपील जारी की है. मानवीय एजेंसियों को भी सहायता पहुँचाने में भारी प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ रहा है. 

संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्यालय (OCHA) ने ग़ाज़ा गवर्नरेट में भुखमरी की पुष्टि के सन्दर्भ में आगाह किया कि “जारी युद्ध, विस्थापन और सहायता कार्यों में रुकावट के परिणाम और भी विनाशकारी हैं.” 

संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम और “पूर्ण, बेरोकटोक मानवीय पहुँच” की मांग को दोहराया है.