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थाईलैंड में शरणार्थियों को मिला रोज़गार हासिल करने का अधिकार

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में रहने वाली 19 वर्षीय रोहिंग्या शरणार्थी मीनारा बेगम, WFP) के सहयोग से अपने बच्चे के लिए दोपहर का भोजन तैयार कर रही हैं।
© WFP/Sayed Asif Mahmud म्याँमार से जान बचाकर भागे लाखों रोहिंज्या शरणार्थी, बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे हैं, जिन्हें यूएन एजेंसियाँ मदद मुहैया करा रही हैं.

थाईलैंड में शरणार्थियों को मिला रोज़गार हासिल करने का अधिकार

प्रवासी और शरणार्थी

म्याँमार से थाईलैंड पहुँचे और लम्बे समय से वहाँ रह रहे शरणार्थियों को, अब वहाँ रोज़गार व आमदनी वाला काम करने का क़ानूनी अधिकार मिल गया है. थाईलैंड की राजशाही सरकार के ऐतिहासिक फै़सले के तहत ये अधिकार दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

UNHCR के अनुसार, इस नीति बदलाव से, थाई-म्याँमार सीमा पर मौजूद अस्थाई शिविरों में रह रहे लगभग 81 हज़ार विस्थापित लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आने की आशा है.

इनमें से क़रीब 47 प्रतिशत लोगों का जन्म इन्हीं शिविरों में हुआ है, और ये लोग दशकों से पूरी तरह से मानवीय सहायता पर निर्भर रहे हैं.

एक रणनैतिक निवेश

UNHCR की थाईलैंड प्रतिनिधि टैमी शॉर्प का कहना है, “लम्बे समय से चला आ रहा निर्वासन अब अन्तहीन इन्तज़ार जैसा लगता था. लेकिन आज का दिन एक नई दिशा की शुरुआत है. यह नीति बदलाव, न केवल शरणार्थियों बल्कि मेज़बान समुदायों और पूरे देश के लिए विकास का इंजन साबित होगा.”

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से शरणार्थी न सिर्फ़ अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान देंगे.

“थाईलैंड ने मानवीय सिद्धान्तों को मज़बूती दी है और साथ ही यह अपने भविष्य में एक रणनैतिक निवेश भी कर रहा है.”

जाबेर उद्दीन बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के बलुखाली शरणार्थी शिविर में यूनिसेफ द्वारा समर्थित एक केंद्र में युवाओं के एक समूह को विद्युत अभियांत्रिकी पढ़ाते हैं।
© UNICEF/Siegfried Modola

रोज़गार के नए अवसर 

विशेषज्ञों का मानना है कि क़ानूनी रूप से काम करने का अधिकार मिलने से, दैनिक जीवन में शरणार्थी अधिक वस्तुओं का उपभोग कर सकेंगे, रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भी योगदान सम्भव होगा.

यह निर्णय ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता के लिए भारी धन-कटौती हुई है और लाखों विस्थापित लोगों के लिए जीवन रक्षक मदद तक पहुँच ख़तरे में है.

UNHCR ने कहा कि यह नीति थाईलैंड की पाँच दशकों से चली आ रही शरणार्थी संरक्षण की परम्परा को और मज़बूत करेगी तथा पूरे क्षेत्र के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है.

एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस नीति को लागू करने में थाईलैंड सरकार की साझीदार के रूप में मदद करने को तैयार है.

हालाँकि, यह पहल सीमित सँख्या में शरणार्थियों पर लागू होगी, लेकिन UNHCR ने सभी शरणार्थियों को इसमें शामिल करने की वकालत जारी रखने की बात कही है.