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SDG-3: सभी के स्वास्थ्य सपनों को पूरा करने का लक्ष्य, कितनी दूर है मंज़िल

अफ़ग़ानिस्तान में तोर्खम बॉर्डर पर एक बालक को यूनीसेफ़ समर्थित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा पोलियो की बूंदें दी जा रही हैं.
© UNICEF/Azizullah Karimi
अफ़ग़ानिस्तान में तोर्खम बॉर्डर पर एक बालक को यूनीसेफ़ समर्थित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा पोलियो की बूंदें दी जा रही हैं.

SDG-3: सभी के स्वास्थ्य सपनों को पूरा करने का लक्ष्य, कितनी दूर है मंज़िल

एसडीजी

कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया कीजहाँ हर बच्चा सुरक्षित जन्म लेहर महिला को समय पर, बिना किसी परेशानी के प्रसव सुविधा मिलेहर व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक बोझ के दवाइयाँ और टीके उपलब्ध होंऔर कोई भी इनसान केवल बीमारी की वजह से ग़रीबी में न धकेला जाए. यही सपना है सतत विकास लक्ष्य 3 (SDG Goal 3) का: सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण.

दुनिया में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में हाल के वर्षों में कुछ प्रगति हुई है. यूएन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 तक, 133 देशों ने पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है.

साथ ही, HIV के प्रभावी इलाज ने, 2010 से AIDS‑सम्बन्धित मौतों की संख्या को आधा कर दिया है, और 2024 तक 54 देशों में कम से कम एक उपेक्षित उष्णकटिबन्धीय बीमारी (tropical disease) समाप्त हो चुकी है.

2024 के अन्त तक दुनिया भर में, अनुमानतः 4 करोड़ 8 लाख लोग, HIV के साथ जीवन यापन कर रहे थे, जिनमें से लगभग 65 प्रतिशत लोग अफ़्रीका में हैं.

विश्व भर में लगभग 6 लाख 30 हज़ार लोग HIV से जुड़ी बीमारियों के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं, हालाँकि सकारात्मक बात यह है कि HIV दवाओं की पहुँच लगातार बढ़ रही है.

वहीं, पिछले दो दशकों में, टीबी से निपटने के वैश्विक कार्यक्रमों के ज़रिए, 7 करोड़ 90 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई गई है. केवल वर्ष 2024 में ही, लगभग साढ़े 36 लाख लोग, टीबी के कारण मौत के मुँह में जाने से बचे हैं.

चीन की राजधानी बीजिंग के एक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक छह महीने के बच्चे को टीका लगाया जा रहा है.
© UNICEF/Zhang Yuwei

लम्बी है डगर…

फिर भी, वैश्विक स्तर पर कई स्वास्थ्य संकट जारी हैं. मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं, और टीबी रोग, वर्ष 2023 में दुनिया में संक्रमण (single infectious agent) से मौतों का सबसे बड़ा कारण बन गया.

जबकि, 2021 में 70 वर्ष से कम उम्र के 1 करोड़ 80 लाख लोगों की मौत, असंक्रामक रोगों (NCDs) के कारण हुई, जो समय से पहले होने वाली सभी मौतों की आधी से अधिक संख्या है.

इस रफ़्तार को देखते हुए, 2030 तक, असंक्रामक रोगों के कारण, समय से पहले होने वाली मृत्यु दर को, एक-तिहाई तक कम करने का सतत विकास लक्ष्य (SDG) अब पटरी पर नहीं है, और इस मंज़िल को हासिल करना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है.

विश्व स्तर पर मातृ मृत्यु दर को कम करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) बढ़ाने में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है. 2023 में अनुमानतः 2.6 लाख महिलाएँ गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मृत्यु की शिकार हुईं.

ये आँकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य सुधार की दिशा में अभी लम्बा रास्ता तय किया जाना है.

मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में यूएनएफ़पीए समर्थित स्वास्थ्य केन्द्र में एक महिला को गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगाया जा रहा है.
© UNFPA/Karel Prinsloo

स्वास्थ्य असमानताएँ

कोविड‑19 महामारी और अन्य वैश्विक संकटों ने स्वास्थ्य प्रगति को प्रभावित किया है. बच्चों के टीकाकरण दर में गिरावट आई है, जबकि टीबी और मलेरिया के मामले महामारी‑पूर्व स्तर की तुलना में बढ़े हैं.

स्वास्थ्य सेवाओं की असमान पहुँच आज भी गम्भीर चुनौती बनी हुई है. एक तरफ़, धनी, शिक्षित और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सेवाएँ अधिक पहुँच रही हैं, वहीं, निर्बल और ग्रामीण आबादी अब भी पीछे छूट रही है.

वर्ष 2019 में स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी जेब से धन ख़र्च करने की वजह से, 34 करोड़ 40 लाख लोग या तो ग़रीबी में धकेले गए या पहले से भी अधिक ग़रीबी में धँस गए.

सभी के लिए स्वास्थ्य

सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति को, किसी वित्तीय बोझ के बिना, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच मिले.

इसके तहत सभी को सुरक्षित और सस्ती दवाइयाँ, टीके और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना शामिल है.

टीकाकरण विश्व में सबसे सफल और लागत‑प्रभावी स्वास्थ्य समाधानों में से एक है, लेकिन कोविड-19 महामारी के बाद इसमें गिरावट ने, लाखों बच्चों को गम्भीर बीमारियों के जोखिम में डाल दिया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO, दुनिया के दुर्गम इलाक़ों में भी, लोगों की स्वास्थ्य मदद करने के लिए पहुँचता और मौजूद रहता है.
© UNICEF/Ahmed Mohamdeen Elfati

मज़बूत अर्थव्यवस्था की नींव

स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने पर जो लागत आती है या आने की सम्भावना होती है, उसकी तुलना में इसके फ़ायदे कहीं अधिक हैं. स्वस्थ लोग ही किसी भी देश की मज़बूत अर्थव्यवस्था की नींव हैं.

इसलिए, विश्व के सभी देशों को तत्काल और निर्णायक क़दम उठाने की आवश्यकता है, ताकि स्वास्थ्य सम्बन्धी चुनौतियों के बारे में पहले से अनुमान लगाकर, उनका सामना किया जा सके.

यह विशेष रूप से उन कमज़ोर जनसंख्या समूहों और उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ अधिक रोग फैले हुए हैं.

हम, इस बारे में सटीक रणनीतियाँ अपनाकर स्वास्थ्य तंत्र को मज़बूत कर सकते हैं और स्वास्थ्य संकटों के समय प्रतिरोधक क्षमता (resilience) विकसित कर सकते हैं.

विश्व की सबसे सफल और लागत-कुशल स्वास्थ्य पहलों में से, टीकाकरण एक है.

इसके बावजूद, कोविड महामारी के बाद बच्चों के टीकाकरण में चिन्ताजनक गिरावट आई है, जो लाखों बच्चों को रोकथाम योग्य मगर गम्भीर बीमारियों के जोखिम में छोड़ रही है.

साथ ही, संसाधनों का निवेश बढ़ाना, स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करना और भविष्य के संकटों के लिए तैयार रहना अब अनिवार्य है.

SDG-3 प्राप्ति की दिशा में क़दम….

संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देश के अनुसार, हम अपने और अपने आस-पास के लोगों की सेहत का ख़याल रखकर, शुरुआत कर सकते हैं. इसके लिए सूचित निर्णय लें, सुरक्षित यौन सम्बन्ध अपनाएँ और अपने बच्चों का समय पर टीकाकरण कराएँ.

हम अपने समुदाय में यह सन्देश फैला सकते हैं कि अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली का महत्व क्या है, और साथ ही यह कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का अधिकार है, ख़ासतौर पर महिलाओं व बच्चों जैसे सबसे कमज़ोर समूहों को.

साथ ही, आप अपनी सरकार, स्थानीय नेताओं और अन्य निर्णय-निर्माताओं को उनके वादों के प्रति जवाबदेह ठहरा सकते हैं, ताकि वे लोगों के लिए स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार लाएँ.