म्याँमार: रोहिंग्या समुदाय के जबरन पलायन के आठ वर्ष, नए सिरे से एकजुटता की अपील
वर्ष 2017 में, म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में सैन्य बलों की भीषण कार्रवाई से बचने के लिए सामूहिक विस्थापन का शिकार हुए रोहिंग्या समुदाय ने सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश का रुख़ किया था. संयुक्त राष्ट्र ने इस त्रासदी के आठ वर्ष होने के अवसर पर ध्यान दिलाया है कि मुख्यत: मुस्लिम समुदाय की म्याँमार में गरिमामय, स्वैच्छिक वापसी सुनिश्चित करने के लिए अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता दर्शाई जानी होगी.
म्याँमार में हथियारबन्द गुटों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले किए जाने के बाद, सैन्य बलों ने 25 अगस्त 2017 को अपनी बर्बर दमनात्मक कार्रवाई शुरू की थी, जिससे जान बचाने के लिए रोहिंग्या समुदाय के सात लाख से अधिक लोगों ने पड़ोसी देश, बांग्लादेश में शरण ली थी.
उनसे पहले भी हज़ारों रोहिंग्या लोग हिंसा व भेदभाव से बचने के लिए कॉक्सेस बाज़ार में स्थित शरणार्थी शिविरों में रहने के लिए मजबूर हुए थे.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने इस पलायन के आठ वर्ष पूरे होने पर कहा कि म्याँमार के भीतर व बाहर, पहले से ही चुनौतियों से जूझ रहे रोहिंग्या समुदाय के लिए हालात और कठिन हुए हैं.
“राख़ीन प्रान्त में, रोहिंग्या व अन्य आम नागरिक म्याँमार की सेना व अराकान आर्मी के बीच लड़ाई में फँसे हुए हैं और सैनिक के रूप में जबरन भर्ती, मानवाधिकार हनन व अन्य दुर्व्यवहार से पीड़ित हैं.”
वर्ष 2021 में, एक सैन्य तख़्तापलट में म्याँमार में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया गया था, जिसके बाद से देश में विद्रोही लड़ाकों को हवा मिली है. सैन्य बलों ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए क्रूर दमन भी किया है.
स्तेफ़ान दुजैरिक ने पूरे क्षेत्र में रोहिंग्या लोगों को वापिस भेजे जाने, देश निकाला दिए जाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके लिए आश्रय स्थल सिकुड़ते जा रहे हैं.
यूएन प्रवक्ता के अनुसार, यह एक ऐसे समय में हो रहा है जब शिक्षा, भोजन सहायता, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका अवसरों व संरक्षण सेवाओं के लिए धन कटौती हो रही है.
आम जन की रक्षा
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अतीत में आग्रह किया है कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों के अनुरूप आम नागरिकों की रक्षा की जानी होगी.
उन्होंने कुछ समय पहले बांग्लादेश में कॉक्सेस बाज़ार में शरणार्थी शिविरों की यात्रा के दौरान रोहिंज्या समुदाय की सहनसक्षमता का प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया था.
महासचिव गुटेरेश ने रोहिंग्या समुदाय के लिए अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता को मज़बूती देने, उनके लिए समर्थन बढ़ाने की अपील की थी और एक व्यापक राजनैतिक समाधान की पुकार लगाई थी, ताकि इस संकट की बुनियादी वजहों से निपटा जा सके.
आगामी सम्मेलन से आशा
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि 30 सितम्बर को न्यूयॉर्क में रोहिंग्या व अन्य अल्पसंख्यकों पर एक उच्चस्तरीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जिसमें इस संकट का स्थाई समाधान ढूंढने के लिए एक बार फिर से अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जाएंगे.
उन्होंने बताया कि म्याँमार पर यूएन महासचिव के विशेष दूत बर्बर हिंसक टकराव का अन्त करने के लिए सभी पक्षों को एक साथ लेकर चलने और म्याँमार के नेतृत्व में राजनैतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं.
इससे, म्याँमार में रोहिंग्या समुदाय की स्वैच्छिक, गरिमामय व सुरक्षित ढंग से वापसी के लिए भी मार्ग प्रशस्त हो सकेगा.