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अन्तरराष्ट्रीय दास व्यापार स्मरण दिवस: मानव शोषण का उन्मूलन किए जाने की पुकार

"ट्रोन्को" से व्यक्तियों को ग़ुलामों के रूप में नियंत्रित किया जाता था.
UN News/Eileen Travers
"ट्रोन्को" से व्यक्तियों को ग़ुलामों के रूप में नियंत्रित किया जाता था.

अन्तरराष्ट्रीय दास व्यापार स्मरण दिवस: मानव शोषण का उन्मूलन किए जाने की पुकार

मानवाधिकार

इतिहास में अत्याचारों का दंश झेलने वाले समुदाय और स्वाधीनता के लिए प्रयत्नशील रहे कार्यकर्ता, भावी पीढ़ियों को न्यायसंगत समाज के निर्माण के लिए प्रेरित कर सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की प्रमुख ने शनिवार, 23 अगस्त, को ‘दास व्यापार व उसके उन्मूलन के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्मरण दिवस’ के अवसर पर यह बात कही है. 

यूनेस्को महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने अपने सन्देश में कहा कि यह समय मानव शोषण का पूर्ण रूप से अन्त करने और हर एक व्यक्ति के लिए समान व बिना किसी शर्त के गरिमा को मान्यता देने का है.

हर वर्ष 23 अगस्त को मनाए जाने वाले इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस के ज़रिए दास व्यापार की त्रासदी, उसकी पीड़ा को ध्यान दिलाने का प्रयास किया जाता है.

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‘दासता का शिकार व्यक्तियों के मार्ग’, यूएन एजेंसी की एक अन्तर-सांस्कृतिक परियोजना है, जिसके ज़रिए उन कारणों, तौर-तरीक़ों व नतीजों का अध्ययन किया जाता है, जिनकी वजह से अफ़्रीका, योरोप, अमेरिका व कैरीबियाई क्षेत्र में दास व्यापार की शुरुआत हुई.

यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने अपने सन्देश में कहा कि यह दिवस, पार-अटलांटिक दास व्यापार के पीड़ितों को सम्मान देने का एक अवसर है, मगर यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है.

“आधुनिक दासता अब भी बरक़रार है. आइए, हम अन्याय, अतीत व वर्तमान का सामना करें और हर एक व्यक्ति की गरिमा व अधिकारों को बनाए रखें.”

संयुक्त राष्ट्र निरन्तर इन लक्ष्यों की ओर अग्रसर है, जिनके तहत वर्ष 2007 में पार-अटलांटिक दास व्यापार व दासता पर एक कार्यक्रम को स्थापित किया गया था.

वर्ष 1791 में ‘साँ दोमिन्ग’ (वर्तमान में हेती) में 22-23 अगस्त की रात्रि को एक विद्रोह की शुरुआत हुई है, जिसने पार-अटलांटिक दास व्यापार पर अन्तत: विराम लगाने में अहम भूमिका निभाई.

इस पृष्ठभूमि में, विश्व भर में 23 अगस्त को यह अन्तरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी, और उन देशों व लाखों व्यक्तियों को श्रृद्धांजलि दी गई थी, जिन्हें जहाज़ों पर सवार होकर समुद्री यात्राएँ करने के लिए मजबूर किया गया.

यूनेस्को महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने कहा कि आइए, हम अतीत के उन भुक्तभोगियों और स्वाधीनता की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को याद करें, ताकि वे भावी पीढ़ियों को न्यायोचित समाज को आकार देने के लिए प्रेरित कर सकें.