ग़ाज़ा: उपजाऊ ज़मीन पर अकाल, मध्य पूर्व में पहली बार
इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा पट्टी में लगभग साढ़े 23 महीनों के युद्ध ने जानमाल का भारी नुक़सान किया है और कुपोषण व भुखमरी के जानलेवा स्तर को देखते हुए, वहाँ पहली बार अकाल की पुष्टि की गई है. यूएन एजेंसियों ने, मध्य पूर्व में पहली बार पुष्ट किए गए अकाल पर दुखद आश्चर्य व्यक्त किया है.
यूएन राहत समन्वय एजेंसी – OCHA के प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने ग़ाज़ा में अकाल की पुष्टि होने पर दुख प्रकट करते हुए कहा है कि “इसराइल द्वारा खड़ी का जा रही बाधाओं के कारण सीमाओं पर खाद्य सामग्री के विशाल भंडार अटके पड़े हैं, जबकि कुछ सौ मीटर दूर ही एक उपजाऊ ज़मीन पर अकाल पड़ा हुआ है.”
यह एक ऐसा अकाल है जिसके बारे में हमने बार-बार चेतावनी दी थी - लेकिन अन्तरराष्ट्रीय मीडिया को इसे कवर करने, इसके गवाह बनने की अनुमति नहीं दी गई है.”
टॉम फ़्लैचर ने कहा, “यह 2025 का अकाल है. 21वीं सदी का अकाल, जिस पर ड्रोन और इतिहास की सबसे उन्नत सैन्य तकनीक की निगरानी है. यह एक ऐसा अकाल है जिसे कुछ इसराइली नेता खुलेआम युद्ध के हथियार के रूप में प्रोत्साहित कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि व्यापक स्तर पर यह, “दुनिया का अकाल” है. यह एक ऐसा अकाल है जो सवाल उठाता है, ‘मगर आपने क्या किया?’ एक ऐसा अकाल जो हम सभी को परेशान करेगा और करना ही चाहिए.”
यूएन एजेंसियों ने कहा है कि ग़ाज़ा में बच्चों में कुपोषण "विनाशकारी गति से" बढ़ रहा है. केवल जुलाई में ही 12 हज़ार से अधिक बच्चों की पहचान गम्भीर रूप से कुपोषित के रूप में की गई, जो अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक संख्या है.
इस साल की शुरुआत के बाद, इसमें छह गुना वृद्धि हुई है.
सम्भावित युद्ध अपराध
यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि यह अकाल इसराइली सरकार की नीतियों का "प्रत्यक्ष परिणाम" है.
उन्होंने कहा, "भुखमरी को युद्ध के एक तरीक़े के रूप में इस्तेमाल करना, एक युद्ध अपराध है, और इससे होने वाली मौतें जानबूझकर हत्या के युद्ध अपराध के बराबर भी मानी जा सकती हैं."
"इसराइली अधिकारियों को ग़ाज़ा गवर्नरेट में अकाल को समाप्त करने और ग़ाज़ा पट्टी में और जान-माल के और अधिक नुक़सान को रोकने के लिए, तत्काल क़दम उठाने होंगे."
"उन्हें पर्याप्त मात्रा में मानवीय सहायता की तत्काल पहुँच और संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य मानवीय संगठनों तक लोगों की पूर्ण पहुँच सुनिश्चित करनी होगी."
मध्य पूर्व में पहला अकाल
मई में हुए पिछले आईपीसी विश्लेषण के बाद से, जून के अन्त तक कुपोषण से मृत्यु के गम्भीर जोखिम में रहने वाले बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़कर 14,100 से 43,400 हो गई है.
आईपीसी ने नए आकलन में, ग़ाज़ा पट्टी में अत्यन्त गम्भीर खाद्य असुरक्षा और अत्यन्त गम्भीर कुपोषण का विश्लेषण शुरू करने के बाद से, सबसे गम्भीर गिरावट दर्ज की है. और यह पहली बार है जब मध्य पूर्व क्षेत्र में आधिकारिक तौर पर अकाल की पुष्टि हुई है.
जुलाई के बाद से, ग़ाज़ा में खाद्य और सहायता आपूर्ति में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन आवश्यकता की तुलना में यह बहुत अपर्याप्त, असंगत और दुर्गम बनी हुई है.
इस बीच, इस क्षेत्र की लगभग 98 प्रतिशत कृषि भूमि, क्षतिग्रस्त या दुर्गम यानि पहुँच से दूर है, जिससे कृषि क्षेत्र और स्थानीय खाद्य उत्पादन प्रभावित हो रहा है, और दस में से नौ लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं.