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ग़ाज़ा सिटी में इसराइली हमलों में भीषण तबाही, युद्धविराम की अपील

ग़ाज़ा में इसराइल की लगातार बमबारी और मानवीय सहायता के प्रवेश पर पाबन्दी के कारण, भुखमरी के हालात उत्पन्न हो गए हैं.
UN News ग़ाज़ा में इसराइल की लगातार बमबारी और मानवीय सहायता के प्रवेश पर पाबन्दी के कारण, भुखमरी के हालात उत्पन्न हो गए हैं.

ग़ाज़ा सिटी में इसराइली हमलों में भीषण तबाही, युद्धविराम की अपील

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, ग़ाज़ा सिटी और उसके आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते इसराइली सैन्य हमलों के बीच, तुरन्त युद्धविराम की अपील दोहराई है. गहराते इसराइली हमलों से बचने के लिए, बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी लोग विस्थापन के लिए मजबूर हो रहे हैं.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, गुरूवार को अफ़्रीका महाद्वीप के लिए, जापान में आयोजित नौवें टोक्यो अन्तरराष्ट्रीय विकास सम्मेलन (TICAD) में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ग़ाज़ा में तुरन्त युद्धविराम होना बेहद ज़रूरी है. सभी बन्धकों की बिना शर्त रिहाई हो और ग़ाज़ा सिटी पर (इसराइली) सैन्य हमलों से होने वाली भारी तबाही और मौतों को रोका जाए." 

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ग़ाज़ा में लगातार हो रहे इसराइली हवाई हमलों और गोलाबारी से बचने के लिए, फ़लस्तीनी लोग बड़ी संख्या पर पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं.

ग़ाज़ा सिटी में अब भी क़रीब दस लाख लोग रह रहे हैं. इसराइली सेना का कहना है कि यह इलाक़ा हमास का प्रमुख गढ़ है. 

पश्चिम तट पर बस्तियों का विस्तार

महासचिव ने इसराइली सरकार के उस फ़ैसले की भी निन्दा की, जिसमें क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट में, यहूदी बस्तियों के विस्तार की रुकी हुई योजना को मंज़ूरी दी गई है.

उन्होंने कहा, “अवैध बस्तियों का विस्तार अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है और इसे तुरन्त रद्द किया जाना चाहिए.” 

बताया जा रहा है कि इस योजना में 3 हज़ार से अधिक मक़ान, स्कूल और एक क्लीनिक बनाने की अनुमति दी गई है, जिसके पूरा हो जाने पर पूर्वी येरूशेलम का सम्पर्क क़ब्ज़े वाले पश्चिम तट से कट जाएगा.

ग़ाज़ा में व्यापक तबाही

यूएन मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के अनुसार, इसराइली सेना ने 20 अगस्त को घोषणा की थी कि ग़ाज़ा सिटी के ख़िलाफ़ उसके सैन्य अभियान का प्राम्भिक चरण शुरू हो गया है, जिसमें ग़ाज़ा के जबालिया और ग़ाज़ा सिटी के अज़ ज़ायतून क्षेत्र को निशाना बनाया गया.

OHCHR ने बताया कि लगातार हवाई हमले, ड्रोन बमबारी और गोलाबारी हो रही है, जिनमें आवासीय स्थलों को भी निशाना बनाया गया. जबालिया में मक़ानों को विस्फोटक लगाकर ध्वस्त किए जाने की भी जानकारी मिली है.

इसराइली सेना ड्रोन और फ़ोन के ज़रिए स्थानीय लोगों को, इन स्थानों से पलायन के आदेश दे रही है. 

वहीं, ग़ाज़़ा सिटी में पूरे मोहल्ले तबाह हो रहे हैं. अज़ ज़ायतून और अस सबरा इलाक़ों में हमले बेहद विनाशकारी रहे, जबकि अश शुजाइया, अश शाती और अश शेख़ रदवान क्षेत्रों में विस्थापितों के तम्बुओं और इमारतों पर हुए हमलों में अनेक लोगों की मौत हुई है.

उत्तरी ग़ाज़ा की सीमा चौकी से आने वाली राहत सामग्री लेने पहुँचे हज़ारों फ़लस्तीनी.
United Nations

OHCHR ने कहा कि 8 अगस्त से अब तक ग़ाज़ा सिटी में 50 से अधिक आवासीय इमारतों और पूरे आवासीय प्रखंडों पर हमले हुए हैं और शहर की “व्यवस्थित तबाही” जारी है.

पलायन और भुखमरी

लगातार बमबारी के बीच बहुत से परिवार फँस गए हैं. ग़ाज़ा के पूर्वोत्तर हिस्से से, बड़ी संख्या में लोग पश्चिमी हिस्सों की ओर पलायन कर रहे हैं. 

ख़ान यूनिस के अल-मवासी इलाके़ में विस्थापितों के तम्बुओं पर भी हमले की ख़बरें मिली हैं.

संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (UNRWA) ने चेतावनी दी है कि ग़ाज़ा सिटी में बच्चों में गम्भीर कुपोषण 28.5 प्रतिशत तक पहुँच गया है, यानि हर चार में से एक बच्चा भूख से जूझ रहा है.

मार्च 2025 में जब युद्धविराम था, तब यह दर सिर्फ़ 4.5 प्रतिशत थी. अगस्त के मध्य तक पूरे ग़ाज़ा में कुपोषण दर 16 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है.

मानवीय सेवाओं पर संकट

फ़लस्तीनी शरणआर्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसी UNRWA ने बताया कि उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी सेवाएँ अब गम्भीर ख़तरे में हैं.

UNRWA ने कहा,“बच्चे मानव-निर्मित भुखमरी से मौत के मुँह में धकेले जा रहे हैं.” 

एजेंसी ने, मार्च 2025 में युद्धविराम टूटने के बाद से ग़ाज़ा पट्टी में छह महीने से पाँच साल तक की उम्र के 95 हज़ार से अधिक बच्चों का कुपोषण परीक्षण किया है.

UNRWA ने सिर्फ़ पिछले महीने ही ग़ाज़ा सिटी में 1 लाख से अधिक चिकित्सा परामर्श, 3 हज़ार 500 बच्चों की कुपोषण जाँच, 2.2 लाख लोगों को पीने का पानी और 2.5 लाख लोगों को घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी उपलब्ध कराया.

एजेंसी ने कहा, “हमारे सहयोगी, कठिन हालात के बावजूद राहत पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसराइल की लगातार सैन्य कार्रवाई से ये सभी सेवाएँ अब ख़तरे में हैं.”