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ट्रम्प-पुतिन बैठक के मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र का शान्तिपूर्ण समाधान पर ज़ोर

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर इंटरैक्टिव फोटोग्राफिक प्रदर्शनी 'शांति उससे शुरू होती है' का एक दृश्य, जिसमें महिला शांति रक्षक और शांति निर्माताओं के बड़े पोर्ट्रेट हैं।
UN Photo/Loey Felipe न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की इमारत.

ट्रम्प-पुतिन बैठक के मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र का शान्तिपूर्ण समाधान पर ज़ोर

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में बैठक के मद्देनज़र, संवाद की अहमियत पर फिर से ज़ोर दिया है. इस बैठक का मुख्य मुद्दा यूक्रेन था.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, किसी भी शान्ति प्रयास या समझौते को, यूएन चार्टर के सिद्धान्तों के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें यूक्रेन की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान शामिल है.

यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने गुरूवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि यह बैठक “सुरक्षा परिषद के दो स्थाई सदस्यों के बीच उच्चतम स्तरीय संवाद” है. 

प्रवक्ता दुजैरिक ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन युद्ध के बारे में संयुक्त राष्ट्र रुख़, पहले जैसे ही स्पष्ट है.

“हम चाहते हैं कि तुरन्त, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम हो, ताकि न्यायसंगत, स्थाई और समग्र शान्ति की दिशा में पहला क़दम उठाया जा सके."

"ऐसी शान्ति, जो यूक्रेन की सम्प्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का सम्मान करे और अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं, यूएन चार्टर, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और सभी सम्बन्धित यूएन प्रस्तावों के अनुरूप हो.”

प्रवक्ता दुजैरिक ने यूक्रेन की अनुपस्थिति में, अमेरिका और रूस के बीच बैठक होने की ख़बरों पर कहा कि स्थाई समाधान तक पहुँचने के लिए यह मददगार होता है कि सभी पक्ष एक साथ मौजूद हों.

उन्होंने कहा, “हम निश्चित रूप से, घटनाओं पर नज़र रखेंगे, और इनके परिणामों को देखेंगे.

मानवीय स्थिति में कोई सुधार नहीं

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब यूक्रेन में मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है. 

यूएन राहत समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, युद्ध से आम लोगों को भारी नुक़सान हो रहा है, घर व बुनियादी ढाँचे नष्ट हो रहे हैं और हज़ारों लोग विस्थापित हो रहे हैं.

यूक्रेन में यूएन मानवाधिकार निगरानी मिशन ने इस सप्ताह रिपोर्ट दी कि जुलाई महीने में मई 2022 के बाद, सबसे अधिक आम लोग हताहत हुए, जिसमें 286 लोग मारे गए और 1 हज़ार 388 घायल हुए.

रूसी आक्रमण के बाद से, अब तक क़रीब 13 हज़ार 883 लोग मारे गए हैं, जिनमें 726 बच्चे हैं. 

35 हज़ार 548 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 2 हज़ार 234 बच्चे हैं.