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संक्षिप्त: इटली के तट पर 27 प्रवासियों की मृत्यु, तालेबान शासन के चार वर्ष

अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के दौरान, लड़कियों और महिलाओं को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है.
© UNICEF/Amin Meerzad
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के दौरान, लड़कियों और महिलाओं को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है.

संक्षिप्त: इटली के तट पर 27 प्रवासियों की मृत्यु, तालेबान शासन के चार वर्ष

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR ने बताया है कि बुधवार को इटली के दक्षिणी द्वीप लैम्पेडूसा के पास एक जहाज़ दुर्घटना में कम से कम 27 शरणार्थियों और प्रवासियों की डूबकर मृत्यु हो गई. उधर अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के मौजूदा क़ब्ज़े वाले शासन को चार साल हो गए हैं, जिस दौरान लड़कियों व महिलाओं की स्थिति और लगातार बदतर हुई है.

यूएन शरणार्थी एजेंसी, कम से कम 60 जीवित बचे लोगों की सहायता कर रही है, जिन्हें तट पर लाया गया है, लेकिन इटली के तटरक्षक बल ने आगाह किया है कि अभी और शव बरामद हो सकते हैं.

स्थानीय मीडिया ख़बरों के अनुसार, इस जहाज़ में सवार यात्री इटली पहुँचने की उम्मीद में लीबिया से चले थे.

अफ़्रीकी तट से इटली जाने वाले प्रवासी और शरणार्थी अक्सर मानव तस्करों द्वारा चलाई जाने वाली कमज़ोर या भीड़भाड़ वाली नावों का उपयोग करते हैं और लैम्पेडूसा पहुँचने के उद्देश्य से, भूमध्य सागरीय मार्ग से अक्सर जानलेवा यात्रा करते हैं.

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने, गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि 2025 तक मध्य भूमध्य सागर में 700 से ज़्यादा शरणार्थी और प्रवासी मारे जा चुके हैं.

उन्होंने कहा, "मदद करने की गतिविधियों को मज़बूत किया जाना होगा जिनमें समुद्र में बचाव, सुरक्षित मार्ग, पारगमन देशों की मदद और मूल कारणों का समाधान तलाश किया जाना शामिल हैं."

तालिबान के क़ब्ज़े के चार साल, महिलाओं की स्थिति दयनीय

अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में स्थित महिला नशा मुक्ति उपचार केन्द्र.
© WHO Afghanistan

15 अगस्त को, अफ़ग़ानिस्तान में शासन पर तालेबान का मौजूदा क़ब्ज़ा होने के चार साल हो रहे हैं. इस अवसर पर यूएन महिला संगठन ने कहा है कि देश में विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति बहुत ख़राब हुई है.

संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था की अफ़ग़ानिस्तान में विशेष प्रतिनिधि सूज़न फ़र्ग्यूसन ने, तालिबान के क़ब्ज़े के चार वर्ष पूरे होने के मौक़े पर, गुरूवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, देश में महिलाओं के मानवाधिकारों के व्यापक हनन पर बात की है.

उन्होंने कहा कि तालेबान के क़ब्ज़े के बाद से उन्होंने, ऐसे दर्जनों स्थाई आदेश जारी किए हैं, जिन्होंने महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों और सम्मान को कम किया है.

विशेष प्रतिनिधि सूज़न फ़र्ग्यूसन ने न्यूयॉर्क में नियमित प्रैस वार्ता में, काबुल से शिरकत करते हुए संवाददाताओं से कहा, "दुनिया में महिलाओं के अधिकारों का सबसे गम्भीर संकट सामान्य बात बनती जा रही है."

उदाहरण के लिए, साल 2024 के "नैतिकता क़ानून" ने, सार्वजनिक जीवन से महिलाओं के व्यवस्थित निष्कासन को और उजागर कर दिया, और लम्बे समय से चले आ रहे सामाजिक मानदंडों को संहिता बना दिया है.

शिक्षा और अधिकांश रोज़गार व कामकाज से प्रतिबन्धित, महिलाएँ "सार्वजनिक स्थानों, अपने समुदायों या परिवारों में असुरक्षित महसूस करती रहती हैं - और अक्सर असुरक्षित होती भी हैं.

और तालेबान के क़ब्ज़े के बाद से, महिलाएँ, देश में सुरक्षा स्थिति में हुई बेहतरी वृद्धि का लाभ उठाने से वंचित हैं.

नागरिकों की वापसी और महिला संचालित संगठन

इस वर्ष, 17 लाख अफ़गान विदेशों से वापिस लौटे हैं, लेकिन उनमें से महिलाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा या आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए, पुरुष सहायता कार्यकर्ताओं से सम्पर्क नहीं कर सकतीं.

इसलिए, महिलाओं द्वारा संचालित संगठनों की मौजूदगी आवश्यक हैं, जो स्वास्थ्य सेवा, मनोवैज्ञानिक सेवाएँ और हिंसा से सुरक्षा प्रदान कर सकें.

हालाँकि, मार्च 2025 में, विभिन्न नागरिक समाज संगठनों ने बताया कि धन की उपलब्धता में कटौती के कारण, 50 प्रतिशत महिला कर्मचारियों की छँटनी हुई है, और इनमें से एक-तिहाई से अधिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि धन की कमी के कारण उन्हें अपना काम कम करना पड़ सकता है या बन्द करना पड़ सकता है.

ये संगठन बने रहने की कोशिश कर रहे हैं - लेकिन उन्हें तत्काल और अधिक वित्तीय सहायता की आवश्यकता है.

प्रतिनिधि सूज़न फ़र्ग्यूसन ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में ग़ैर-सरकारी संगठनों, उनके व्यवसायों और अन्तरराष्ट्रीय संवादों में उनकी आवाज़ को बुलन्द करने में संसाधन निवेश करते रहने होंगे.