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ग़ाज़ा: भूख संकट और गर्मी ने बढ़ाया क़हर, मानवीय सहायता में बाधाएँ बरक़रार

गाजा में एक वाहन के पास एक छोटा लड़का दूसरे लड़के के साथ चलते हुए अपने कंधे पर एक बड़ा सफेद बोरा ले जा रहा है।
© UNICEF/Eyad El Baba ग़ाज़ा में भूखे लोगों को भोजन सहायता लेने के दौरान गोली मारे जाने का ख़तरा रहता है.

ग़ाज़ा: भूख संकट और गर्मी ने बढ़ाया क़हर, मानवीय सहायता में बाधाएँ बरक़रार

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा पट्टी में, भूख संकट और कुपोषण अपने चरम पर है, जबकि मानवीय सहायता मिशन लगातार देरी और रुकावटों का सामना कर रहे हैं. भीषण गर्मी ने पहले से ही परेशान लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया है कि हाल ही में इसराइल ने कम ही मानवीय मिशनों को अस्वीकार किया है, लेकिन स्वीकृत मिशनों को भी पूरा होने में कई घंटे लग जाते हैं.

इसके अलावा,सहायता दलों को ख़तरनाक, भीड़भाड़ वाले और कई बार अवरुद्ध रास्तों पर इन्तज़ार करने को मजबूर होना पड़ता है.

मानवीय सहायता संगठनों ने, 6 से 12 अगस्त के बीच, इसराइली अधिकारियों के साथ, ईंधन और सहायता कर्मियों के स्थानांतरण सहित 81 मिशनों के लिए समन्वय की कोशिश की. इस दौरान, कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है.

भुखमरी का भयावह स्तर

पश्चिमी गाजा शहर में एक सामुदायिक रसोईघर में भोजन की प्रतीक्षा करते हुए पुरुष और लड़के धातु की बाड़ के ऊपर बर्तन पकड़े हुए हैं।
UN News

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के मुताबिक़, ग़ाज़ा में युद्ध शुरू होने के बाद से, भूख स्थिति अब तक के सबसे गम्भीर स्तर पर है. 

ग़ाज़ा स्वास्थ्य अधिकारियों ने, 13 अगस्त तक, कुपोषण से 235 लोगों की मौतें दर्ज की हैं, जिनमें 106 बच्चे हैं.

इसके अलावा, सहायता क़ाफ़िलों की संख्या सीमित है, और युद्धग्रस्त क्षेत्रों से गुज़रते समय लूटपाट व हिंसा का ख़तरा बना रहता है.

भूखे लोग कई बार ट्रकों से खाने का सामान बीच रास्ते ही उतार लेते हैं, जिससे मदद सामग्री अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाती.

जुलाई में, WFP ने कैरेम शैलॉम और ज़िकिम सीमा चौकी से, 1 हज़ार 12 ट्रकों के ज़रिए क़रीब 13 हज़ार टन खाद्य सामग्री पहुँचाई. लेकिन केवल 10 ट्रक ही गोदाम तक पहुँचे, बाक़ी का सामान रास्ते में उतार लिया गया.

भोजन ख़राब होने का ख़तरा

WFP और उनके साझीदारों के पास, ग़ाज़ा के 21 लाख लोगों के लिए तीन महीने तक पर्याप्त भोजन है, लेकिन सीमित वितरण के कारण भंडारित खाद्य सामग्री के ख़राब होने और कीड़े लगने का ख़तरा बढ़ गया है.

10 अगस्त तक, 81 सामुदायिक रसोईघर रोज़, 3 लाख 24 हज़ार लोगों के लिए भोजन तैयार कर रहे थे, जो दो सप्ताह पहले के 2 लाख 59 हज़ार के आँकड़े से अधिक है. 

मगर, ये संख्या अप्रैल में वितरित 10 लाख के आँकड़े से काफ़ी कम है.

भीषण गर्मी और पानी की कमी

इस बीच, तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच गया है जिससे तापलहर शुरू हो गई है. 

संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी UNRWA के अनुसार, पानी की अत्यधिक कमी के कारण प्यास और शरीर में पानी की कमी के मामले बढ़ रहे हैं.

UNRWA ने युद्ध शुरू होने के बाद से  लगभग 17 लाख लोगों को आपातकालीन पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएंँ मुहैया की हैं.

मानवीय संगठनों ने एक बार फिर ग़ाज़ा में अधिक सहायता और वाणिज्यिक सामान की अनुमति देने की अपील की है, ताकि लाखों लोगों की जान बचाई जा सके.