सूडान: अल फ़शर में RSF का भीषण हमला, 57 नागरिकों की मौत
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, सूडान के उत्तरी दारफू़र प्रान्त की राजधानी अल फश़र पर, त्वरित समर्थन बल (RSF) के घातक हमले की निन्दा की है. इस हमले में लगभग 57 लोगों की मौत हो गई. यह शहर अप्रैल 2024 से RSF की घेराबन्दी में फँसा हुआ है, और गम्भीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है.
गत सोमवार को किए गए इस हमले में, शहर के बाहरी इलाके़ में स्थित अबू शूक विस्थापन शिविर को भी निशाना बनाया गया.
यहाँ पर कथित रूप से आनन-फानन में लोगों की हत्या (summary executions) किए जाने की घटनाओं की जाँच चल रही थी.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा है कि अल फ़शर के नागरिक पिछले एक साल से घेराबन्दी, लगातार हमलों और गम्भीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं.
आम लोगों पर बार-बार होने वाले इस तरह के हमले, अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत गम्भीर चिन्ता का विषय हैं और तुरन्त बन्द होने चाहिए.
अप्रैल 2023 में शुरू हुए सूडान युद्ध ने, दुनिया का सबसे बड़ा भुखमरी संकट उत्पन्न कर दिया है.
लगभग ढाई करोड़ लोग यानि देश की आधी आबादी गम्भीर भूख स्थिति से जूझ रही है, जबकि 35 लाख महिलाएँ और बच्चे कुपोषण का सामना कर रहे हैं.
जातीय हिंसा का ख़तरा
RSF ने जनवरी से जून 2025 के बीच अबू शूक शिविर पर क़रीब 16 बार हमले किए, जिनमें 212 लोगों की मौत हो गई और 111 लोग घायल हुए.
वोल्कर टर्क ने आगाह किया है कि अल फ़शर और अबू शूक शिविर पर क़ब्जे़ के प्रयास में, जातीय आधारित उत्पीड़न का गम्भीर ख़तरा है.
इसके अलावा, नागरिकों की सुरक्षा के लिए सहायता कार्यों के लिए मानवीय विराम की तत्काल ज़रूरत है.
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने हाल ही में, ज़मज़म शिविर में हिंसा से बचे हुए लोगों से बातचीत की. इस शिविर में अगस्त 2024 में अकाल की पुष्टि हुई थी.
अप्रैल 2025 में, यहाँ RSF के हमलों के दौरान आम लोगों की हत्या, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, जबरन गुमशुदगी और यातना के मामलों की पुष्टि हुई है.
भूख और मानवीय संकट
एक साल बाद भी अल फ़शर में, लाखों लोग विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की सहायता नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं.
रास्तों पर रुकावटों की वजह से खाद्य आपूर्ति रुक गई है, क़ीमतें आसमान छू रही हैं और सामुदायिक रसोइयाँ बन्द हो गई हैं.
ख़बरों के मुताबिक़, कुछ लोग पशुओं का चारा और खाद्य अपशिष्ट खाने को मजबूर हैं.
WFP के पूर्वी और दक्षिणी अफ़्रीका के क्षेत्रीय निदेशक एरिक पेरडिसन ने कहा, “अल फ़शर में सभी लोग रोज़ाना ज़िन्दगी बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. मानवीय सहायता को तुरन्त और लगातार पहुँचने की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में बहुत से लोगों की मौत हो जाएँगी.”
सुरक्षित मार्ग की मांग
बहुत से लोग भूख और बमबारी से बचने के लिए, 75 किमी दूर तविला शिविर पहुँचे हैं, जहाँ क़रीब 4 लाख लोग पहले से रह रहे हैं.
इस दौरान, बहुत से लोगों की रास्ते में ही प्यास से मौत हो गई.
वहीं, तविला पहुँचे लोगों के लिए अस्थाई शिविरों में बारिश से बचाव करना भी बहुत मुश्किल हो रहा है. बारिश का मौसम शुरू होने से तिरपालों में रहना और मुश्किल हो गया है.
यहाँ WFP की ओर से दी जाने वाली सीमित खाद्य सामग्री (पोषक बिस्कुट, ज्वार, तेल और नमक) ही, लोगों का मुख्य सहारा है.
मध्य और पश्चिमी दारफू़र में गम्भीर भूख की स्थिति, WFP की मदद से कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन स्थिति नाजु़क बनी हुई है.