यमन: 'क्षेत्रीय उथल-पुथल से शान्ति की सम्भावनाओं को झटका'
यमन के लिए विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने, देश में सरकारी बलों और हूथी लड़ाकों के बीच हाल के समय में हुई झड़पों पर चिन्ता व्यक्त की है. अलबत्ता दोनों पक्षों के बीच, स्थाई शान्ति की उम्मीद भी बरक़रार हैं.
संयुक्त राष्ट्र के सहायता समन्वय कार्यालय - OCHA का कहना है कि यमन, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी समर्थित गठबन्धन और अंसार अल्लाह (हूथी लड़ाकों) के बीच, 12 वर्षों से अधिक समय से चल रहे युद्ध के कारण, दुनिया के सबसे अधिक खाद्य-असुरक्षित देशों में से एक बना हुआ है.
यमन में 1 करोड़ 70 लाख लोगों को जीवित रहने के लिए भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है.
क्षेत्रीय उथल-पुथल, एक नाज़ुक मगर लम्बे समय तक चलने वाले युद्धविराम के बावजूद, शान्ति और स्थिरता की सम्भावनाओं को लगातार कम कर रही है.
OCHA के समन्वय प्रभाग के निदेशक रमेश राजसिंघम ने सुरक्षा परिषद में कहा, "राजनैतिक समाधान के बिना, हिंसा का वर्तमान चक्र, आर्थिक क़िल्लत और लगातार अपना दायरा बढ़ा रहीं मानवीय आवश्यकताओं के साथ-साथ जारी रहेगा."
शान्ति की उम्मीदें बरक़रार
विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि हालाँकि, एक स्थाई शान्ति समझौते की उम्मीदें अब भी बनी हुई हैं: "यमन की स्थिति का एक स्थाई समाधान न केवल सम्भव है, बल्कि आवश्यक भी है."
उन्होंने सुरक्षा परिषद को बताया कि हालाँकि अग्रिम मोर्चे पर स्थिति ज़्यादा नहीं बदली है, जुलाई में हूथी लड़ाकों ने हुदायदाह शहर के आसपास अपनी स्थिति मज़बूत कर ली और सादाह प्रान्त में सरकारी बलों पर एक बड़ा हमला किया. ये घटनाक्रम "चिन्ताजनक" थे.
हूथी लड़ाके, अक्टूबर 2023 से, ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी आन्दोलन के समर्थन में, इसराइल के साथ-साथ, लाल सागर में वाणिज्यिक जहाज़ों को भी निशाना बना रहे हैं.
हूथी लड़ाकों ने जुलाई में, इसराइल और हूथियों के दरम्यान मिसाइल दागने का सिलसिला जारी रहा, जिससे यमन और क्षेत्र में व्यापार और भी अस्थिर हो गया है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने लाल सागर में नागरिक जहाज़ों पर हूथी लड़ाकों के हमलों को रोकने का आहवान करते हुए कहा, "यमन में शान्ति की सच्ची सम्भावना के लिए ज़रूरी है कि उसे, ग़ाज़ा में युद्ध से उत्पन्न क्षेत्रीय उथल-पुथल में और अधिक घसीटे जाने से बचाना होगा."
भुखमरी का क़हर
यमन के कुछ हिस्सों में, भुखमरी और कुपोषण चरम पर है - ख़ासकर विस्थापित क्षेत्रों में. जुलाई में किए गए एक आवश्यकता-मूल्यांकन पाया गया कि हज्जाह प्रान्त के अब्स ज़िले में, एक ऐसे ही अस्थाई शिविर में परिवारों के बच्चों की मौत, भूख से होते दर्ज की गई.
रमेश राजसिंघम ने कहा, "ये बच्चे युद्ध के घावों से नहीं, बल्कि भुखमरी से मौत के मुँह में धकेल दिए गए हैं - धीरे-धीरे, चुपचाप, जबकि इन मौतों को रोका जा सकता था."
यमन के पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की आधी संख्या गम्भीर कुपोषण से पीड़ित है, और लगभग आधे बच्चे, बौनेपन से पीड़ित हैं. यह कमज़ोर स्वास्थ्य की एक ऐसी स्थिति होती है जिसके कारण बच्चे, सामान्य बीमारियों से भी मौत के निकट पहुँच जाते हैं.
रमेश राजसिंघम ने देश भर में आपातकालीन खाद्य और पोषण सहायता बढ़ाने के लिए धन सहायता बढ़ाने का आहवान किया. इस बीच, मानवीय सहायता कर्मी, सीमित संसाधनों और संचालन सम्बन्धी चुनौतियों के बावजूद, धरातल पर मौजूद हैं.
भविष्य का रास्ता
इस बीच, यमन के लिए विशेष दूत का कार्यालय, अग्रिम मोर्चे पर तनाव कम करने की दिशा में काम करना जारी रखे हुए है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा, "बातचीत का रास्ता बनाने के लिए, यह ज़रूरी है कि यमनी लोगों में विश्वास बहाल करने और उनके दैनिक जीवन को बेहतर बनाने वाले उपाय जारी रहें."
उन्होंने कहा, "मैं पक्षों के बीच बातचीत का आग्रह करता हूँ, जो सभी मामलों पर दीर्घकालिक स्थाई समाधान लाने का एकमात्र तरीक़ा है."