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ग़ाज़ा: पत्रकारों की हत्या की जाँच का आग्रह, कुपोषण से बच्चों की मौतों में वृद्धि

ग़ाज़ा में इसराइली नाकाबन्दी और युद्ध के कारण, लाखों लोगों को जीवित रहने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है.
UN News
ग़ाज़ा में इसराइली नाकाबन्दी और युद्ध के कारण, लाखों लोगों को जीवित रहने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है.

ग़ाज़ा: पत्रकारों की हत्या की जाँच का आग्रह, कुपोषण से बच्चों की मौतों में वृद्धि

शान्ति और सुरक्षा

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने ग़ाज़ा में रविवार को छह फ़लस्तीनी पत्रकारों की हत्या की निन्दा की है. इस बीच ग़ाज़ा में भुखमरी और कुपोषण के हालात और भी गम्भीर होते जा रहे हैं, जिनमें बच्चों की मौतों में वृद्धि भी शामिल है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने सोमवार को बताया कि ये पत्रकार, रविवार को ग़ाज़ा शहर में इसराइल के एक लक्षित हमले में मारे गए. इनमें से पाँच पत्रकार, अल जज़ीरा मीडिया नैटवर्क के लिए काम करते थे.

प्रवक्ता ने न्यूयॉर्क में अपनी नियमित प्रैस वार्ता में कहा, "हाल में हुई ये हत्याएँ इस बात को उजागर करती हैं कि पत्रकारों को, जारी युद्ध की रिपोर्टिंग करते समय, कितने गम्भीर जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है."

"महासचिव इन हालिया हत्याओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच का आहवान करते हैं."

प्रैस का सम्मान करें

स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि ग़ाज़ा में लगभग तीन साल पहले युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 242 पत्रकार मारे गए हैं.

उन्होंने कहा, "महासचिव ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पत्रकारों और मीडियाकर्मियों का सम्मान किया जाना चाहिए, उनकी सुरक्षा की जानी चाहिए और उन्हें भय व उत्पीड़न से मुक्त होकर, स्वतंत्र रूप से अपना काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए."

भूख से बच्चों की मौतें

संयुक्त राष्ट्र सहायता समन्वय कार्यालय - OCHA ने बताया है कि गाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर 2023 से, कुपोषण से मौत के मुँह में जा रहे बच्चं की संख्या 100 को पार कर गई है.

उधर विश्व खाद्य कार्यक्रमWFP के अनुसार, एक तिहाई से ज़्यादा आबादी, कई दिनों तक भोजन नहीं मिलने के कारण भूखे पेट रह रही है. इसके अलावा, तीव्र कुपोषण बढ़ रहा है, जिसने लगभग 3 लाख बच्चों के लिए गम्भीर जोखिम उत्पन्न कर दिया है.

यह सब जानकारी खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की हाल ही में दी गई चेतावनी के बीच आई है जिसमें बताया गया कि ग़ाज़ा पट्टी में केवल 1.5 प्रतिशत कृषि भूमि ही, सुलभ और सुरक्षित बची हुई है, जो "स्थानीय खाद्य उत्पादन के लगभग पूरी तरह से ध्वस्त होने का संकेत है."

ग़ाज़ा में पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण बहुत से बच्चे भूखे हैं और बहुत से बच्चे कुपोषण के गम्भीर ख़तरे में हैं, कुछ बच्चों की मौतें भी हुई हैं.
© UNICEF/Mohammed Nateel

खाद्य सामग्री और ईंधन

संयुक्त राष्ट्र और उसकी साझीदार एजेंसियों ने बुधवार को कैरेम शेलॉम /करेम अबू सलेम सीमा चौकियों से खाद्य सामग्री और स्वच्छता किटें प्राप्त की हैं.

OCHA ने ज़ोर देकर कहा है कि ग़ाज़ा में लोगों को "एक निश्चित जीवन रेखा की ज़रूरत है - सहायता की एक बूँद जैसी स्थिति नहीं, ताकि यह भरोसा रहे कि उन्हें जीवित रहने के लिए कोई हताशा भरे या घातक उपाय करने की ज़रूरत नहीं है."

WFP ने कहा है कि ग़ाज़ा में केवल बुनियादी मानवीय खाद्य सहायता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, हर महीने 62 हज़ार मीट्रिक टन से अधिक सामग्री की आवश्यकता होती है, और अब तक, मानवतावादियों को आबादी को सहारा देने के लिए, पर्याप्त सहायता सामग्री की आपूर्ति की अनुमति नहीं दी गई है.

यूएन एजेंसियों के अनुसार, इसराइल औसतन प्रतिदिन लगभग 1 लाख 50 हज़ार लीटर ईंधन के प्रवेश की अनुमति दे रहा है, जो अब भी आवश्यक न्यूनतम मात्रा से बहुत कम है. इसके परिणाम स्वरूप, जीवन रक्षक सहायता अभियानों पर जोखिम मंडरा रहा है.

फ़लस्तीन नागरिक सुरक्षा संगठन ने चेतावनी दी है कि ग़ाज़ा में ईंधन और कल पुर्ज़ों की कमी के कारण, उनकी आधी से ज़्यादा एम्बुलेंसों ने काम करना बन्द कर दिया है.

OCHA ने कहा, "इसराइली अधिकारियों को सभी सीमा चौकियों और सभी उपलब्ध गलियारों से सहायता सामग्री पहुँचाने की अनुमति देनी चाहिए, ताकि सहायताकर्मी, बड़े पैमाने पर, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीक़े से, महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ-साथ सबसे कमज़ोर हालात वाले लोगों तक सहायता पहुँचा सकें."