ग़ाज़ा: अस्पतालों में भारी भीड़, कुपोषण के मामलों में तेज़ वृद्धि
ग़ाज़ा में मानवीय हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है, बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हो रहे हैं, और लोग, अपने परिवार के लिए भोजन जुटाने के प्रयासों के दौरान हताहत होने के जोखिम का सामना कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) की एक पदाधिकगारी ओल्गा चेरेवको ने बताया है कि ख़ान यूनिस स्थित नासेर अस्पताल का दौरा करने पर हालात “चौंकाने वाले” थे.
अस्पताल के भीतर बरामदों व रास्तों में मरीज़ों की भीड़ जमा थी, जिनमें से कई लोगों को GHF के सैन्यीकृत सहायता वितरण केन्द्रों या क़ाफ़िलों के रास्तों से लाया गया था.
ओल्गा चेरेवको ने बताया कि उन्होंने पाँच घायल लोगों और तीन शवों को भोजन वितरण स्थलों से लाए जाते हुए देखा.
उन्होंने एक दम्पति की घटना बताई, जिनका अपने परिवार के लिए आटा हासिल का प्रयास त्रासदी में बदल गया, जब पति गम्भीर रूप से घायल हो गया.
उन्होंने कहा, “लोगों के पास भूख से बचने का कोई और रास्ता नहीं बचा है.” बच्चों के वार्ड में कुपोषित मरीज़ भरे हुए थे और घायल वयस्क भी “बेहद कमज़ोर और भूखे” थे.
उन्होंने कहा कि अब स्थिति “अकल्पनीय और विनाशकारी” स्तर पर पहुँच गई है और इस समय सबसे ज़रूरी बन चुका है, स्थाई युद्धविराम.
चीनी की गम्भीर कमी
संयुक्त राष्ट्र की फ़लस्तीनी शरणार्थी एजेंसी (UNRWA) के स्वास्थ्य निदेशक अकीहीरो सीता ने कहा कि ग़ाज़ा में चीनी, फल और मीठे खाद्य पदार्थ लगभग समाप्त हो चुके हैं.
इसके अलावा इस तरह की चीज़ों की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई हैं.
टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों के लिए यह स्थिति जानलेवा है, क्योंकि हाइपोग्लाइसीमिया के इलाज में चीनी की तत्काल ज़रूरत होती है.
उन्होंने कहा कि जो सामान्य परिस्थितियों में समस्या नहीं होती, वह ग़ाज़ा में अब जानलेवा हकीक़त बन गई है, और यह “असहनीय रूप से क्रूर” है.
कुपोषित बच्चों के लिए विशेष पोषण आपूर्ति भी समाप्त हो चुकी है, जबकि हाल की पहुँचाए गए सामान या तो ख़त्म हो गए हैं या उन्हें ज़रूरतमन्द लोगों ने लूट लिया है.
पत्रकारों पर हमले की निन्दा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने ग़ाज़ा में, एक शिविर पर किए गए इसराइली हमले में मारे गए छह फ़लस्तीनी पत्रकारों की मौत को अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का गम्भीर उल्लंघन बताया.
इनमें पाँच पत्रकार, क़तर स्थित अल-जज़ीरा नैटवर्क से जुड़े थे, जिनमें 28 वर्षीय पत्रकार अनस अल-शरीफ़ भी हैं.
इसराइल का आरोप है कि अनस अल-शरीफ़ हमास के सदस्य थे, जिसे अल जज़ीरा ने सख़्ती से नकारते हुए इसे “पत्रकारिता पर सोचा-समझा हमला” कहा है.
OHCHR ने सभी पत्रकारों की सुरक्षा और ग़ाज़ा में मीडिया के लिए सुरक्षित व बेरोकटोक पहुँच की मांग की है.
मानवाधिकार कार्यालय ने बताया है कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक इस युद्ध में, लगभग 242 फ़लस्तीनी पत्रकार मारे जा चुके हैं.