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सूडान: युद्ध व हैज़ा महामारी की गहरी जकड़, जीवन के लिए जूझ रहे हैं लोग

दक्षिण सूडान में महिलाएं शुष्क, ग्रामीण इलाके में हवाई मार्ग से खाद्य सहायता सामग्री गिराए जाने के बाद उसे अपने सिर पर ले जा रही हैं।
© WFP/Samantha Reinders दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में ज़रूरतमन्द परिवार विमान से गिराए गए अनाज के पैकेट जुटा रहे हैं.

सूडान: युद्ध व हैज़ा महामारी की गहरी जकड़, जीवन के लिए जूझ रहे हैं लोग

स्वास्थ्य

सूडान में लाखों लोग हिंसा, हैज़ा महामारी और विस्फोटक ख़तरों के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने आगाह किया कि इस महामारी को रोकने के लिए तुरन्त मदद की आवश्यकता है, जबकि हथियारबन्द समूह, हिंसा से बचकर भाग रहे लोगों को लगातार आतंकित कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की सुरक्षा अधिकारी जोसलीन एलिज़ाबेथ नाइट ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि हथियारबन्द समूहों द्वारा दी जा रही धमकियाँ, ज़मज़म विस्थापन शिविर छोड़कर जा रहे शरणार्थियों में गहरा भय और असुरक्षा का माहौल उत्पन्न कर रही हैं. हथियारबन्द समूहों द्वारा लोगों को कहीं से भी ढ़ँढ़ निकालने की धमकी दी जा रही है.

एक बच्चे ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहा, “दिन में यहाँ सब ठीक रहता है, लेकिन रात को मुझे डर लगता है कि कहीं हमारे आश्रय स्थल पर फिर हमला न हो जाए.”  

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यह कहानी सूडान के अनेकहिस्सों में बच्चों और परिवारों की भयावह स्थिति को दर्शाती है.

बुनियादी ज़रूरतों की कमी

दारफ़ूर क्षेत्र में जारी हिंसा के कारण हज़ारों विस्थापित लोग पुरानी और अस्वच्छ सार्वजनिक इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जहाँ पानी और साफ़-सफ़ाई जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी नहीं हैं.

लगातार हो रहे हमलों और विस्थापन संकट के अलावा, बरसात के मौसम में कई सड़कें बन्द हो जाती हैं, जिससे राहत सामग्री पहुँचाना और भी मुश्किल हो जाता है.

संयुक्त राष्ट्र के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, दारफ़ूर से अब तक लगभग 8.73 लाख शरणार्थी पड़ोसी देश चाड में पहुँच चुके हैं, जहाँ पूर्वी चाड में हर तीन में से एक व्यक्ति शरणार्थी है.

हिंसा के अलावा, सूडान में फैल रही हैज़ा बीमारी ने भी गम्भीर ख़तरे की स्थिति उत्पन्न की है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर इलहाम नूर के अनुसार, गत जुलाई से हैज़ा के लगभग एक लाख मामले दर्ज किए गए हैं. 

अस्वच्छता और गन्दे पानी के कारण इस बीमारी का फैलाव तेज़ी से हो रहा है. 

UNHCR के पूर्वी चाड के समन्वयक डोस्सू पेट्रिस अहुआन्सू ने कहा कि 2 लाख 30 हज़ार से अधिक शरणार्थी, सीमा पर बेहद कठिन हालात में हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल चिकित्सा, स्वच्छ जल, साफ़-सफ़ाई और सुरक्षित स्थानान्तरण जैसे क़दम नहीं उठाए गए, तो और भी बहुत से लोगों की जान जोखिम में पड़ जाएगी. 

ख़तरनाक विस्फोटकों का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र की खदान मुक्ति सेवा (UNMAS) ने भी चेतावनी दी है कि जारी लड़ाई के दौरान शेष बची विस्फोटक सामग्री (unexploded ordnance) भी लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. ख़ासकर ख़ारतूम में 6 विस्फोटक चीज़ें पाई गई हैं.

ये ख़तरनाक और बिना फटे विस्फोटक, घरों, सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और मानवीय राहत केन्द्रों के आसपास फैले हुए हैं. कई लोग इस ख़तरे से अनजान हैं, जिससे घायल होने और मृत्यु के मामले बढ़ रहे हैं.