भूमिबद्ध मगर पीछे नहीं: अवाज़ा सम्मेलन एक नए साहसिक रोडमैप के साथ संपन्न
भूमिबद्ध विकासशील देशों पर हुए अवाज़ा सम्मेलन में एक ऐतिहासिक राजनैतिक घोषणा-पत्र अपनाया गया है, जिसका उद्देश्य समुद्र तक सीधी पहुँच से वंचित इन 32 देशों में, सतत विकास को गति देना और उनकी सहनक्षमता को बढ़ाना है.
तुर्कमेनिस्तान के अवाज़ा शहर में शुक्रवार को सम्पन्न हुए इस तीसरे यूएन सम्मेलन (LLDC3) का मुख्य विषय था - "साझेदारी के माध्यम से प्रगति को बढ़ावा देना".
चार दिन तक चल इस सम्मेलन में, राष्ट्राध्यक्षों, वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, विकास भागीदारों और निजी क्षेत्र के नेताओं को, भूमिबद्ध देशों के सामने आने वाली लगातार चुनौतियों से निपटने के लिए एक मंच पर एकत्र किया.
इन चुनौतियों में, उच्च व्यापार लागत, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता शामिल है.
यूएन महासभा द्वारा साल 2024 में अपनाई गई - 2024-2034 कार्य योजना पर आधारित 'अवाज़ा घोषणा-पत्र' में पाँच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एक एकीकृत रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है:
- संरचनात्मक आर्थिक परिवर्तन;
- व्यापार और क्षेत्रीय एकीकरण;
- परिवहन और बुनियादी ढाँचा;
- जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण; और
- वित्त एवं साझेदारी जुटाना.
अल्प विकसित देशों, भूमिबद्ध विकासशील देशों और लघु द्वीपीय विकासशील देशों (UN-OHRLLS) के लिए संयुक्त राष्ट्र की उच्च प्रतिनिधि और अवर महासचिव रबाब फ़ातिमा ने कहा, "अवाज़ा घोषणा-पत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ है. यह केवल शब्दों का नहीं, बल्कि कार्रवाई का ख़ाका है."
उन्होंने कहा, "बुनियादी ढाँचे, व्यापार सुगमता और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनक्षमता में लक्षित निवेश के साथ, एलएलडीसी की क्षमता को उजागर किया जा सकता है और यह सुनिश्चित किया जा सकता है कोई भी पीछे नहीं छूटे."
रबाब फ़ातिमा ने कहा कि इस सम्मेलन को एलएलडीसी की यात्रा में एक निर्णायक क्षण के रूप में याद किया जाएगा, जिससे साहसिक साझेदारियों और निर्णायक कार्रवाई के एक नए युग की शुरुआत होगी.
उन्होंने कहा, "यह एकजुटता, साझेदारी और साझा उद्देश्य की भावना ही है, जो हमें आगे ले जाएगी. एक ऐसा भविष्य जहाँ हम भूगोल से विभाजित नहीं होंगे, बल्कि विचारों, व्यापार और नवाचार के माध्यम से जुड़े होंगे."
"आइए हम 'भूमि-जुड़े' होने के वादे को केवल एक मुहावरा नहीं बनाएँ, बल्कि जीवन जीने का एक नया तरीक़ा बनाएँ."
उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र इस दशक के पर अमल करने में सहयोग के लिए तैयार है."
निवेश और समावेशन की पुकार
अवाज़ा घोषणा-पत्र में बहुपक्षीय विकास बैंकों से निवेश बढ़ाने, दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मज़बूत करने और वैश्विक व्यापार एवं जलवायु एजेंडा में एलएलडीसी हितों को व्यापक रूप से शामिल करने का आहवान किया गया है.
यह घोषणा-पत्र कार्यान्वयन की निगरानी और यह सुनिश्चित करने के महत्व पर भी ज़ोर देता है कि भूमिबद्ध विकासशील देश स्वयं इस प्रक्रिया का नेतृत्व करें, जिसका समन्वय संयुक्त राष्ट्र कार्यालय – OHRLLS करे.
तुर्कमेनिस्तान की पहल
तुर्कमेनिस्तान ने मेज़बान देश के रूप में, इस सम्मेलन के लक्ष्यों के अनुरूप कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनमें सतत परिवहन सम्पर्क के लिए वैश्विक ऐटलस, वैश्विक हाइड्रोजन ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रम और कैस्पियन पर्यावरण पहल शामिल हैं.
तुर्कमेनिस्तान के एक वरिष्ठ नेता गुरबांगुली मलिकगुलीविच बर्दीमुहामेदोव ने कहा, "अवाज़ा घोषणा-पत्र, साझेदारी और प्रगति के हमारे साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है."
उन्होंने कहा, "व्यापार के मार्गों में साझीदार देश, विकास साझीदार और निजी क्षेत्र एक साथ मिलकर, भौगोलिक बाधाओं को दूर कर सकते हैं और अपने लोगों के लिए स्थाई समृद्धि का निर्माण कर सकते हैं."
भविष्य का रुख़
अवाज़ा घोषणा-पत्र, भूमिबद्ध विकासशील देशों के लिए एक बड़ा क़दम और वैश्विक एकजुटता का एक नया प्रतीक है, जिसका लक्ष्य भौगोलिक नुक़सान को साझा लाभ में बदलना है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा, वार्षिक LLDC मंत्रिस्तरीय बैठकों के माध्यम से, इस घोषणा-पत्र के अमल पर नज़र रखेगी.
तत्म प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख मंचों में शामिल हैं:
- ब्राज़ील में 2025 का संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP30);
- व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) की अगली बैठक; और
- किर्गिज़स्तान में 2027 का वैश्विक पर्वत शिखर सम्मेलन.
अवाज़ा कार्य योजना की मध्यावधि समीक्षा, 2030 में किए जाने का कार्यक्रम है.