ग़ाज़ा: बच्चों में तीव्र कुपोषण रिकॉर्ड स्तर पर, भुखमरी का संकट गहराया
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत समन्वय कार्यालय (OCHA) ने चेतावनी दी कि ग़ाज़ा में भूख का संकट गहराता जा रहा है, और बच्चों में तीव्र कुपोषण की स्थिति अब तक के सबसे भयावह स्तर पर पहुँच गई है.
सहायता समूहों के अनुसार, जुलाई महीने में पाँच साल से कम उम्र के 1 लाख 36 हज़ार बच्चों की जाँच की गई, जिनमें से लगभग 12 हज़ार बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित पाए गए.
सबसे चिन्ताजनक बात यह है कि इनमें से 2,500 से ज़्यादा बच्चे अत्यन्त गम्भीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं - जो कुपोषण की सबसे ख़तरनाक स्थिति होती है. इनमें से 40 बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी OCHA ने बताया कि ग़ाज़ा में गम्भीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है.
मार्च से मई के बीच जहाँ गम्भीर कुपोषण के मामले 12% थे, वहीं जून-जुलाई में ये बढ़कर 18% हो गए.
इसके साथ ही, मानवीय मदद पहुँचाने में आ रही मुश्किलों के कारण, हालात और बिगड़ते जा रहे हैं.
जुलाई में पाँच साल से कम उम्र के 2 लाख 90 हज़ार ज़रूरतमन्द बच्चों में से केवल 8 हज़ार 700 बच्चों तक ही पोषण की मदद पहुँच पाई, क्योंकि ग़ाज़ा में ज़रूरी पोषक सामग्री की आपूर्ति लगभग बन्द है.
OCHA ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति "कुपोषण-रोकथाम कार्यक्रम के पूरी तरह ध्वस्त हो जाने" की सूचक है. अप्रैल से जून के बीच हर महीने औसतन 76 हज़ार बच्चों तक मदद पहुँचती थी, लेकिन अब यह संख्या बहुत कम हो गई है.
साथ ही, अन्य ज़रूरी पोषण सामग्रियों की आपूर्ति में भी भारी गिरावट आई है. इससे छोटे बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं की स्थिति भी अधिक चिन्ताजनक हो गई है.
आश्रय संकट गहराया
2 मार्च के बाद से ग़ाज़ा में कोई भी शरण सामग्री नहीं पहुँच पाई है.
इस बीच, इसराइल द्वारा अनुमति नहीं मिलने के कारण, 10 लाख से अधिक आश्रय सामग्री, तम्बू, तिरपाल व ढाँचे सील करने वाली लगभग 23 लाख अन्य वस्तुएँ जॉर्डन और मिस्र में फँसी हैं.
नतीजा यह है कि आश्रय का संकट लगातार गहराता जा रहा है. ज़्यादातर परिवार अत्यधिक भीड़भाड़ और असुरक्षित परिस्थितियों में रह रहे हैं - और कुछ के सिर पर तो छत जैसी कोई जगह ही नहीं है.
मानवीय संगठनों ने जुलाई में जब 44 विस्थापन स्थलों का आकलन किया, तो पाया कि उनमें से 43 जगहों पर कई परिवार पूरी तरह बिना आश्रय के रह रहे थे.
बमबारी और विस्थापन जारी
ग़ाज़ा में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. रोज़ाना की इसराइली बमबारी, नए विस्थापन आदेश, और सुरक्षा की गम्भीर कमी ने लाखों परिवारों को बार-बार घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है. इस अस्थिरता की वजह से मानवीय राहत अभियानों में भी भारी रुकावटें आ रही हैं.
OCHA ने बताया कि इसराइल द्वारा घोषित "रणनैतिक विराम" के बावजूद ज़मीनी हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है.
OCHA ने यह भी दोहराया कि अब तक ग़ाज़ा में जो मानवीय राहत पहुँची है, वह वहाँ की ज़रूरतों के मुक़ाबले बेहद कम है. यूएन एजेंसियों को अब भी सहायता पहुँचाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
ग़ाज़ा में राहत पहुँचाने के प्रयासों में देरी अब एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. भले ही अब मानवीय सहायता मिशनों को पहले की तरह सीधे तौर पर नामंज़ूर नहीं किया जा रहा है, लेकिन जिन्हें अनुमति मिलती है, वे भी कई घंटों की जटिल प्रक्रिया और सुरक्षा बाधाओं में उलझ जाते हैं. कई मिशनों को पूरा होने में 18 घंटे से भी ज़्यादा लग रहे हैं.
चिकित्सा निकासी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मदद से हाल ही में 15 बच्चों और उनके 42 परिजनों को चिकित्सा उपचार के लिए, सुरक्षित रूप से निकालकर जॉर्डन भेजा गया.
लेकिन ग़ाज़ा में अब भी 14 हज़ार 800 से ज़्यादा मरीज़ ऐसे हैं जिन्हें आपातकालीन और विशेष चिकित्सकीय देखभाल की सख़्त ज़रूरत है.
OCHA ने बताया कि हाल के दिनों में कुछ वाणिज्यिक सामान ग़ाज़ा पट्टी में पहुँच सके हैं, और खाद्य सामग्री से भरे कुछ ट्रकों को प्रवेश की अनुमति मिली है.
संयुक्त राष्ट्र हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए है.
वहीं मानवाधिकार एजेंसियों ने फिर दोहराया है कि जब तक ग़ाज़ा में और उसके भीतर मानवीय सहायता की निर्बाध और निश्चित पहुँच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक समय एवं संसाधन व्यर्थ होते रहेंगे, जानें जाती रहेंगी, तथा ज़रूरत के मुताबिक़ राहत पहुँचाना सम्भव नहीं होगा.