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ग़ाज़ा: स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, घायलों की भीड़ से चिकित्साकर्मी बेहाल

एक क्लिनिक बेड में एक वयस्क की गोद पर बैंडेड हेड और आर्म lying के साथ घायल बच्चे
© UNICEF/Eyad El Baba एक हवाई हमले ने ग़ाज़ा के अल-हसयनेह स्कूल को निशाना बनाया (फाइल फोटो, मई 2025)

ग़ाज़ा: स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, घायलों की भीड़ से चिकित्साकर्मी बेहाल

स्वास्थ्य

ग़ाज़ा से संयुक्त राष्ट्र सहायता कर्मियों ने गुरूवार को, एक बार फिर चेतावनी दी कि पूरे इलाक़े में भोजन की भारी कमी है, जबकि रोज़ाना भारी संख्या में घायल लोग अस्पतालों में पहुँच रहे हैं. वहाँ, स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग पूरी तरह से चरमरा चुकी है.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने ग़ुलियन-बेरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome - GBS) बीमारी से तीन फ़लस्तीनियों की मौत होने की पुष्टि की है. 

यह एक दुर्लभ बीमारी है, जिससे माँसपेशियों में कमज़ोरी हो सकती है और कभी-कभी लकवा मार सकता है.

युद्ध शुरू होने से पहले, ग़ाज़ा में GBS के केवल कुछ ही मामले सामने आते थे. 

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हर दिन ‘जनसंहार जैसी स्थिति’

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, “ग़ाज़ा के अस्पताल रोज़, औसतन जनसंहार जैसी 8 घटनाओं से निपट रहे हैं.”

अब तक GBS के लगभग 64 मामलों में से तीन की मौत हो चुकी है, जिनमें दो बच्चे थे. 

विशेष पुनर्वास केन्द्र भी GBS और जटिल ट्रॉमा केसों के कारण, पूरी तरह से बोझिल हो चुके हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़, 30 प्रतिशत मरीज़ों को गहन चिकित्सा (ICU) की ज़रूरत होती है, लेकिन इलाज के लिए आवश्यक प्रमुख दवा अब उपलब्ध नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने दोहराया कि ग़ाज़ा में सीमित सहायता की अनुमति मिलना, ज़रूरतों को देखते हुए पर्याप्त नहीं है.  

WFP की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन ने कहा, “हम केवल हवाई राहत वितरण से, अकाल के ख़तरे को नहीं रोक सकते…ग़ाज़ा में तो बिल्कुल भी नहीं.”

“आज 5 लाख लोग भुखमरी के कगार पर हैं. उन्हें बचाने का एकमात्र रास्ता है…बड़ी मात्रा में ज़मीनी रास्ते से भोजन पहुँचाना.”

WHO का मुख्य गोदाम तबाह

पिछले महीने डेयर अल-बलाह में हुए हमले में, WHO का मुख्य चिकित्सा गोदाम नष्ट हो गया, जिससे ज़रूरी जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति पर असर पड़ा है. 

विशेषकर, एंटीबायोटिक्स की भारी कमी के कारण अब मेनिनज़ाइटिस का इलाज बाधित हो रहा है.

OCHA ने बताया कि ग़ाज़ा में Médecins Sans Frontières (MSF) द्वारा समर्थित छह चिकित्सा केन्द्रों में, वर्ष 2024 में, दो लाख से ज़्यादा चिकित्सा परामर्श दिए गए, जिनमें 83 प्रतिशत लोग विस्फोटक हथियारों (बम, ग्रेनेड आदि) से ज़ख़्मी थे.

क्या है GBS?

ग़ुलियन-बेरे सिंड्रोम (GBS) तंत्रिका तंत्र (neurological) से जुड़ी एक बीमारी है, जो माँसपेशियों को धीरे-धीरे लकवाग्रस्त कर सकती है. 

यह संक्रामक नहीं होती, लेकिन किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद, इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है.

हालाँकि ज़्यादातर मामलों में मरीज़, कुछ हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन WHO का कहना है कि अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था में भी 3-5 प्रतिशत मरीज़ों की मौत सेप्सिस, फेफड़ों में रक्त के थक्के जमने या हृदयगति रुकने जैसी जटिलताओं से हो सकती है.