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ग़ाज़ा: इसराइल की कड़ी शर्तों के कारण बन्द हो सकते हैं राहत संगठन

फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की एक महिला स्वास्थ्यकर्मी खान यूनिस के हमाद शहर में एक विस्थापित परिवार शिविर में एक छोटी लड़की को पोलियो का टीका और विटामिन ए दे रही है।
© UNICEF/Eyad El Baba HCT में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुख और 200 से ज़्यादा स्थानीय व अन्तरराष्ट्रीय NGO शामिल हैं.

ग़ाज़ा: इसराइल की कड़ी शर्तों के कारण बन्द हो सकते हैं राहत संगठन

शान्ति और सुरक्षा

अन्तरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी कि अगर इसराइल ने, फ़लस्तीनी कर्मचारियों के बारे में संवेदनशील जानकारी मांगने की अपनी शर्त नहीं हटाई, तो ग़ाज़ा में ज़रूरी राहत उपलब्ध करा रहीं ज़्यादातर साझीदार संस्थाएँ, आने वाले कुछ सप्ताहों में अपना काम बन्द करने को मजबूर हो जाएँगी.

यह संकट, इसराइल द्वारा 9 मार्च को लागू की गई उस नीति से उपजा है, जिसमें अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से उनके फ़लस्तीनी कर्मचारियों की निजी और संवेदनशील जानकारी माँगी गई है. 

यह इसराइली नियम, इसराइल के क़ब्जे़ वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र - पश्चिमी तट पर भी लागू होता है.

संयुक्त राष्ट्र और उसकी साझीदार राहत एजेंसियों को ‘मानवतावादी देशीय समूह’ (HCT) कहा जाता है. 

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HCT ने कहा, “अगर तुरन्त क़दम नहीं उठाया गया, तो 9 सितम्बर या उससे पहले ही, ज़्यादातर अन्तरराष्ट्रीय सहायता संगठनों (NGO) का पंजीकरण रद्द हो सकता है, जिससे उन्हें अपने विदेशी कर्मचारियों को हटाना पड़ेगा और वे फ़लस्तीनियों को ज़रूरी जीवनरक्षक सहायता नहीं दे पाएँगे.”

ग़ाज़ा में अब भी कई यूएन एजेंसियाँ काम कर रही हैं, जो NGO साझीदारों के साथ मिलकर युद्ध प्रभावित इलाक़ों में, सबसे ज़्यादा ज़रूरतमन्द लोगों तक राहत पहुँचा रही हैं. 

अन्तरराष्ट्रीय NGO, फ़लस्तीनी संगठनों को ज़रूरी सामग्री, धन और तकनीकी मदद देकर उनका अहम सहयोग करते हैं.

संयुक्त अपील

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता टीम (HCT) ने चेतावनी दी है कि अगर सहयोग नहीं जारी नहीं रहा, तो इन संगठनों का काम बाधित होगा और ग़ाज़ा में और अधिक लोग भोजन, इलाज, आश्रय और ज़रूरी सुरक्षा सेवाओं से वंचित हो जाएँगे. 

HCT में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और 200 से ज़्यादा स्थानीय व अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के मुखिया शामिल हैं.

फिलहाल, जो ग़ैर-सरकारी संगठन (NGO), इसराइल की नई प्रणाली के तहत पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें ग़ाज़ा में कोई भी राहत सामग्री भेजने की अनुमति नहीं है.

जुलाई महीने में ही, इसराइली अधिकारियों ने, ग़ाज़ा में 29 राहत संगठनों द्वारा मानवीय सहायता भेजने के कई अनुरोध, यह कहकर ठुकरा दिए कि ये संगठन "अधिकृत नहीं" हैं.

HCT ने अनुसार, “इस नीति के कारण दवाइयों, भोजन और स्वच्छता सामग्री जैसी जीवनरक्षक सहायता की आपूर्ति पहले ही रुक चुकी है. इसका सबसे गहरा असर महिलाओं, बच्चों, बुज़ुर्गों और विकलांगों पर पड़ रहा है, जिससे उनके शोषण और उत्पीड़न का ख़तरा और भी बढ़ गया है.”

अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन

HCT ने, गै़र- सरकारी संगठनों (NGOs) के कर्मचारियों की संवेदनशील जानकारी मांगने की, इसराइली शर्त पर, फिर से विचार करने की अपील की है.

उन्होंने कहा, इस तरह राहत कार्यों में बाधा डालना अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है, “ख़ासतौर पर, जब हमें हर दिन भूख से लोगों की मौतें होने की ख़बरें मिल रही हैं और ग़ाज़ा अकाल जैसी स्थिति का सामना कर रहा हैं.”

ग़ाज़ा के दक्षिणी हिस्से, डेयर अल-बलाह में मंगलवार को एक राहत क़ाफ़िले के पलट जाने से, क़रीब 20 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए.

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा तब हुआ, जब मदद की तलाश में भीड़ ट्रकों पर चढ़ गई और ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया.