UNHCR: पाकिस्तान से अफ़ग़ान शरणार्थियों को जबरन वापिस नहीं भेजने की अपील
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR ने, पाकिस्तान से उन अफ़ग़ान शरणार्थियों को जबरन वापस नहीं भेजने का आहवान किया है जिनके पास इस एजेंसी द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र (POR) कार्ड हैं.
यूएन शरणार्थी एजेंसी – UNHCR के प्रवक्ता बाबर बलोच ने, पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान वापस भेजी गई महिलाओं और लड़कियों की दुर्दशा पर विशेष चिन्ता व्यक्त की है.
ध्यान रहे कि देश में चार वर्षों से तालेबान का शासन है और उन्होंने महिलाओं व लड़कियों के लिए अनेक पाबन्दियाँ लागू की हुई हैं.
एजेंसी के प्रवक्ता बाबर बलोच ने मंगलवार को जिनीवा में बताया कि पाकिस्तन ने 31 जुलाई को पुष्टि की कि अफ़ग़ान शरणार्थियों को, इस समय जारी 'अवैध विदेशी प्रत्यावर्तन योजना' के तहत, देश से बाहर निकाला जा रहा है.
प्रवक्ता बाबर बलोच ने बताया कि UNHCR को देश भर में अफ़ग़ान नागरिकों की गिरफ़्तारी और हिरासत में लिए जाने की ख़बरों मिली हैं, और ऐसे लोगों में PoR कार्ड धारक भी शामिल हैं.
वापस नहीं भेजे जाने के सिद्धान्त का उल्लंघन
बाबर बलोच ने कहा, "हम पाकिस्तान द्वारा अपनी चुनौतियों के बावजूद, 40 से अधिक वर्षों से शरणार्थियों को पनाह देने में देश की उदारता को मानते हैं और उसकी सराहना करते हैं."
"अलबत्ता, चूँकि PoR कार्ड धारक लोगों को दशकों से शरणार्थी की पहचान मिली हुई है, इसलिए उन्हें जबरन अफ़ग़ानिस्तान भेजा जाना, शरणार्थियों के इस समूह के लिए, पाकिस्तान के दीर्घकालिक मानवीय दृष्टिकोण से उलट है और यह क़दम, ग़ैर-वापसी के सिद्धान्त का उल्लंघन है."
यह स्थिति पड़ोसी देशों से अफ़गान लोगों की बड़े पैमाने पर वापसी के बीच उभर रही है, जिनमें पाकिस्तान और ईरान से अफ़ग़ान लोगों की वापसी शामिल है.
इस वर्ष, 21 लाख से ज़्यादा लोग पहले ही अफ़ग़ानिस्तान लौट चुके हैं या उन्हें लौटने के लिए मजबूर किया जा चुका है, जिनमें पाकिस्तान से वापिस लौटे लगभग 3 लाख 52 हज़ार लोग शामिल हैं.
महिलाओं और लड़कियों के लिए विशेष चिन्ता
प्रवक्ता बाबर श्री बलोच ने कहा, "यूएनएचसीआर उन महिलाओं और लड़कियों के बारे में विशेष रूप से चिन्तित है जिन्हें एक ऐसे देश (अफ़ग़ानिस्तान) में लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा है जहाँ उनके मानवाधिकार ख़तरे में हैं. उनके अलावा अन्य समूहों के बारे में भी चिन्तित है, जो ख़तरे का सामना कर रहे हैं."
उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि किसी भी अफ़ग़ान नागरिक की स्वदेश वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक हो.
इसके अलावा, यूएनएचसीआर ने PoR कार्डों की वैधता बढ़ाने की मांग भी की है, जो जून के अन्त में समाप्त हो गई थी, और एजेंसी ने, पाकिस्तान द्वारा दी इसमें एक महीने की अतिरिक्त छूट दिए जाने का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा, "एजेंसी (UNHCR), पाकिस्तान सरकार से अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं वाले अफ़ग़ान नागरिकों को अनैच्छिक वापसी से छूट देने के उपाय लागू करने का आग्रह करती है."
"हम पाकिस्तान की पहले से साबित सदभावना दिखाए जाने का भी आहवान करते हैं कि वह, चिकित्सा आवश्यकताओं वाले, वर्तमान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे या मिश्रित विवाह में शामिल अफ़ग़ान नागिरकों को क़ानूनी रूप से रहने की अनुमति दे."
दूरगामी नतीजे
बाबर बलोच ने कहा कि पड़ोसी देशों से अफ़ग़ान नागरिकों की बड़े पैमाने पर वापसी ने, देश की बुनियादी सेवाओं, आवास और आजीविका के साथ-साथ मेज़बान समुदायों पर भी भारी दबाव डाला है.
यह स्थिति, अफ़ग़ानिस्तान में पहले से ही जारी गम्भीर मानवीय संकट को और बदतर बना रही है. संयुक्त राष्ट्र सहायता समन्वय कार्यालय - OCHA के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान की लगभग आधी आबादी यानि लगभग 2 करोड़ 30 लाख लोगों - को इस वर्ष जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.
UNHCR के प्रवक्ता बाबर बलोच ने चेतावनी दी कि "बड़े पैमाने पर और जल्दबाजी में वापसी से, सुरक्षा की ज़रूरतें काफ़ी बढ़ गई हैं, और अफ़ग़ानिस्तान के साथ-साथ, क्षेत्र में अस्थिरता का ख़तरा बढ़ रहा है..."