वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

LLDC3: उनका भूगोल, उनकी नियति पर भारी नहीं पड़ना चाहिए

नेपाल जैसे भूमिबद्ध विकासशील देशों में प्राकृतिक सुन्दरता भी बहुत है.
UNFPA Photo
नेपाल जैसे भूमिबद्ध विकासशील देशों में प्राकृतिक सुन्दरता भी बहुत है.

LLDC3: उनका भूगोल, उनकी नियति पर भारी नहीं पड़ना चाहिए

नरगिज़ शेकिन्सकाया, अवाज़ा, तुर्कमेनिस्तान
आर्थिक विकास

भूमिबद्ध विकासशील देशों पर तीसरे यूएन सम्मेलन का लक्ष्य, वैश्विक विकास में बाधाओं को दूर करना और न्यायसंगतता बहाल करना होना चाहिए. यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, तुर्कमेनिस्तान के अवाज़ा शहर में, मंगलवार को इस सम्मेलन का उदघाटन करते हुए कहा, "भूगोल को कभी भी नियति निर्धारित नहीं करनी चाहिए."

एंतोनियो गुटेरेश ने उन "कठिन चुनौतियों" को रेखांकित किया जिनका इन देशों को सामना करना पड़ रहा है. ये चुनौतियाँ हैं - व्यापार में भारी बाधाएँ, उच्च परिवहन लागत और वैश्विक बाज़ारों तक सीमित पहुँच.

Tweet URL

उन्होंने आगाह भी किया कि इन देशों का ऋण भार ख़तरनाक और सहनशक्ति से भी अधिक हो गया गया है.

क़र्ज़ का अत्यधिक भार

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के अनुसार, दुनिया भर के 32 भूमिबद्ध विकासशील देशों (LLDC) में से, 16 देश अफ़्रीका में, 10 एशिया में, चार योरोप में और दो देश लातीनी अमेरिका में हैं. कुल मिलाकर, इन देशों की आबादी 50 करोड़ से ज़्यादा है.

भूमिबद्ध देशों की जनसंख्या वैसे तो कुल वैश्विक आबादी का सात प्रतिशत हिस्सा है, फिर भी वैश्विक आर्थिक उत्पादन और व्यापार में उनका प्रतिनिधित्व केवल एक प्रतिशत से कुछ अधिक है.

महासचिव ने कहा, "यह परिदृश्य, गहरी असमानताओं का एक स्पष्ट उदाहरण है जो इन देशों को, हाशिए पर धकेले गए देशों की स्थिति में बनाए रखता है."

उन्होंने इसके लिए "एक अनुचित वैश्विक आर्थिक और वित्तीय ढाँचे को ज़िम्मेदार ठहराया जो आज की परस्पर जुड़ी दुनिया की वास्तविकताओं को प्रतिबिम्बित नहीं करता". उन्होंने इन हालात के लिए, साथ ही उपनिवेशवाद की विरासत को भी, ज़िम्मेदार ठहराया.

अवाज़ा कार्य योजना

एलएलडीसी3 (LLDC-3) के नाम से जाना जाने वाला यह सम्मेलन, अवाज़ा में शक्रवार तक चलेगा, जो इन देशों के सामने दरपेश चुनौतियों के समाधान खोजने के लिए समर्पित है.

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, "एलएलडीसी3 (सम्मेलन) अवाज़ा कार्य योजना और उसके परिणामों के माध्यम से, महत्वाकांक्षा के एक नए दशक की शुरुआत करने और भूमि से घिरे विकासशील देशों की विकास क्षमता को पूरी तरह से खोलने के बारे में है."

भूमिबद्ध विकासशील देशों के लिए एक कार्ययोजना, यूएन महासभा ने दिसम्बर 2024 में पारित की थी जिसमें, इन देशों की विकास आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए, एक नई और मज़बूत वैश्विक प्रतिबद्धता झलकती है.

प्रगति के लिए चार प्राथमिकताएँ

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भूमिबद्ध विकासशील देशों के लिए, चार प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया:

1. आर्थिक विविधीकरण और डिजिटल परिवर्तन में तेज़ी लाना

2. व्यापार, पारगमन और क्षेत्रीय सम्पर्क को मज़बूत करना

3. जलवायु कार्रवाई और सहनक्षमता को आगे बढ़ाना

4. वित्तपोषण और साझेदारियों को गतिशील बनाना

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "2030 के विकास एजेंडे की सफलता के लिए भूमिबद्ध विकासशील देशों की सफलता आवश्यक है."

"हमारे पास ज्ञान है, और हमारे पास उपकरण हैं... साथ मिलकर, हम भूगोल को एक बाधा से हटाकर, एक सेतु में तब्दील कर सकते हैं - न केवल बाज़ारों को, बल्कि उन लोगों और संस्कृतियों को भी जोड़ सकते हैं जो विकास को अर्थ देते हैं."

एंतोनियो गुटेरेश ने, बाद में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह सम्मेलन, मध्य एशिया में आकार ले रहे सहयोग के एक नए युग को दर्शाता है - जो आपसी विश्वास, साझा प्राथमिकताओं और बढ़ती क्षेत्रीय एकजुटता पर आधारित है.

"ऐसे समय में जब बहुपक्षीय सहयोग का इम्तेहान हो रहा है, साझेदारी की यह भावना पहले से कहीं अधिक आवश्यक है,"