वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां
भारत के ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में बंगाल टाइगर.

सरहदों से परे, फिर सुनाई देने लगी हैं बाघों की दहाड़ें

© Gregoire Dubois
भारत के ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में बंगाल टाइगर.

सरहदों से परे, फिर सुनाई देने लगी हैं बाघों की दहाड़ें

जलवायु और पर्यावरण

एशिया-प्रशान्त के बाघ आवासीय देशों में सीमापार सहयोग, समन्वय और सम्पर्क बढ़ाने के साझा प्रयासों से अभूतपूर्व सफलता मिली है. जिन क्षेत्रों में कभी बाघ विलुप्ति की कगार पर थे, वहाँ अब उनकी दुर्लभ झलक फिर से दिखने लगी है. UNDP के सहयोग से शुरू की गई पहल ने, बाघों के संरक्षण और उनके आवासों के पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण प्रगति सुनिश्चित की है.

अति संकटग्रस्त मलय बाघ की दुर्लभ मौजूदगी, एक दशक से अधिक समय बाद, अप्रैल 2025 में, दक्षिणी थाईलैंड के जंगलों में, देखी गई.

बाघ केवल एक प्रजाति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, सह-अस्तित्व और प्रकृति की शक्ति का प्रतीक है.

इस मायावी और एकाकी जीव की अप्रत्याशित वापसी ने वैज्ञानिकों, संरक्षणकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के बीच आश्चर्य और उत्साह की लहर दौड़ा दी.

बाघ की ताक़त

23 से 30 अप्रैल 2025 के बीच, कैमरा ट्रैप्स में मलय बाघ के साथ टैपिर, जंगली हाथी, गौर व कई अन्य प्रजातियाँ भी दर्ज की गईं.

थाईलैंड के हाला-बाला जंगल से होकर गुज़रते इन वन्यजीवों की मौजूदगी, इस बात का संकेत है कि जब बाघ सुरक्षित होते हैं, तो पूरा जंगल भी समृद्ध होता है.

एक प्रमुख प्रजाति के रूप में, बाघ एक स्वस्थ पर्यावरण की निशानी हैं. उनकी मौजूदगी जैव विविधता की वापसी और पारिस्थितिकी सेवाओं के पुनरुद्धार को दर्शाती है - जिसका लाभ सीधे स्थानीय समुदायों को मिलता है.

मलायन टाइगर विलुप्ति के कगार पर है और केवल थाईलैंड के दक्षिणी जंगलों और मलेशियाई प्रायद्वीप में पाया जाता है.
Screenshot of photo shared by Thailand’s Department of National Parks, Wildlife and Plant Conservation.
मलायन टाइगर विलुप्ति के कगार पर है और केवल थाईलैंड के दक्षिणी जंगलों और मलेशियाई प्रायद्वीप में पाया जाता है.

इन बड़ी बिल्लियों को चाहिए बड़ा इलाक़ा

एक समय था जब दुनियाभर के प्राकृतिक आवासों में लगभग 1 लाख जंगली बाघ पाए जाते थे.

लेकिन 2010 तक इनकी संख्या घटकर सिर्फ़ 3,200 रह गई - और वे भी अपने पुराने क्षेत्रों के महज़ 8% हिस्से तक ही सीमित रह गए.

आज 10 देशों में बाघों की ऐसी आबादी मौजूद है जो प्रजनन में सक्षम है - जहाँ उन्हें खुला इलाक़ा, पर्याप्त शिकार और एक स्वस्थ पर्यावरण मिलता है.

भूटान, भारत और नेपाल जैसे देशों में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है. यह सफलता मजबूत राजनैतिक इच्छाशक्ति, संरक्षित क्षेत्रों के मज़बूत नैटवर्क और शिकार रोकने के लिए उठाए गए सख़्त क़दमों के कारण सम्भव हुई है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF), सरकारों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर, नेपाल, भूटान, भारत, मलेशिया और अन्य देशों में इन प्रयासों को लगातार आगे बढ़ा रहा है.

मलेशिया के बुकीत बारीसन सेलातान राष्ट्रीय उद्यान में सुमात्रा टाइगर के संरक्षण प्रयास.
© Edy Susanto, National Geographic Indonesia

बाघों की वापसी

बाघों की घटती संख्या, पहली बार 2022 में स्थिर हुई और उनकी वैश्विक आबादी बढ़कर 4 हज़ार 485 हो गई.

हालाँकि यह बढ़त सभी देशों में समान नहीं रही. जंगलों का बिखराव, मानव-वन्यजीव संघर्ष, सीमित संसाधन और क़ानूनों को ठीक से लागू करने में कठिनाई, अब भी बड़ी चुनौतियाँ हैं.

कई देशों को वित्त की भारी कमी है, और उनके पास बाघों के गलियारों के नुक़सान व बुनियादी ढाँचे के विस्तार जैसे नए ख़तरों से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.

UNDP इन समस्याओं के समाधान के लिए ज़मीनी स्तर पर काम कर रहा है और सरकारों व साझीदारों के साथ मिलकर बाघ संरक्षण के लिए नए वित्तीय स्रोत तैयार कर रहा है.

कैमरा ट्रैप में टैपीर दिखाई दिया.
Screenshot of photo shared by Thailand’s Department of National Parks, Wildlife and Plant Conservation.
कैमरा ट्रैप में टैपीर दिखाई दिया.

शिकार के विरुद्ध मुहिम

मलेशिया में UNDP ने बाघों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव अपराध खुफ़िया प्रणाली को मज़बूत किया और प्रवर्तन अभियानों को एकीकृत किया. केवल 18 महीनों में बाघों को पकड़ने वाले, 1,000 से अधिक फन्दे और जाल नष्ट किए गए.

UNDP ने, इंडोनेशिया में सुमात्रा टाइगर को बचाने के लिए, बाघ-रोधी बाड़ें लगाईं और सामुदायिक गश्तों को मज़बूत किया गया. 

साथ ही, “विलुप्तप्राय प्रजातियों की अवैध और अस्थिर तस्करी के विरुद्ध” परियोजना के तहत नीति निर्माण, प्रवर्तन क्षमता और समुदाय की भागेदारी को भी सशक्त बनाया गया.

थाईलैंड में, “अवैध वन्यजीव व्यापार के विरुद्ध संघर्ष” परियोजना ने हाथी दाँत, गैंडे के सींग, बाघ के अंगों और पैंगोलिन की बिक्री पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभाई. 

इससे तस्करी कम हुई, प्रवर्तन बेहतर हुआ, फोरेंसिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा और जागरूकता अभियानों के ज़रिए लोगों के व्यवहार में बदलाव लाया गया.

सुमात्रा टाइगर की सुरक्षा बढ़ाने के लिए समुदाय को प्रशिक्षण.
© UNDP Indonesia

सह-अस्तित्व की कोशिश

हम बाघों की सुन्दरता, ताक़त और रहस्य की सराहना करते हैं, लेकिन जिन किसानों और ग्रामीणों को उनके साथ ज़मीन साझा करनी पड़ती है, उनके लिए बाघ एक वास्तविक और गम्भीर ख़तरा बन सकते हैं.

इंडोनेशिया के सुमात्रा क्षेत्र में यह मानव-वन्यजीव संघर्ष रोज़मर्रा की सच्चाई है – ख़ासतौर पर वहाँ, जहाँ वनों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव ने बाघों का प्राकृतिक आवास नष्ट कर दिया है.

UNDP, इसी चुनौती से निपटने के लिए, ज़मीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है. GEF (वैश्विक पर्यावरण सुविधा) द्वारा वित्तपोषित और UNDP द्वारा समर्थित सुमात्रा टाइगर परियोजना के तहत, स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इनसानों और बाघों, दोनों की सुरक्षा बनी रहे.

परियोजना के तहत बाघ-प्रतिरोधी बाड़ों का निर्माण, संघर्ष प्रबंधन के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण, और समुदाय की भागेदारी के कई अन्य उपाय अपनाए जा रहे हैं - ताकि सह-अस्तित्व सम्भव हो सके.

कैमरा ट्रैप से ली गई हाथी की तस्वीरें.
Thailand’s Department of National Parks, Wildlife and Plant Conservation.

बाघों की वापसी के लिए ज़रूरी है जंगल

बढ़ती बाघ आबादी को सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी है कि वे फिर से उन इलाक़ों में लौट सकें जहाँ से वे ग़ायब हो चुके हैं - और इसके लिए जंगलों का आपस में जुड़ा होना बेहद ज़रूरी है.

दक्षिण-पूर्व एशिया में वनों की तेज़ कटाई ने बाघों के आवास को, टुकड़ों में बाँट दिया है. बचे-खुचे जंगलों को जोड़ना और आसपास के बिगड़े हुए क्षेत्रों को बहाल करना, बाघों के भविष्य के लिए अहम है.

जुड़े हुए जंगल बाघों को नए इलाक़ों में जाने, शिकार ढूँढने और प्रजनन के बेहतर अवसर देते हैं, जिससे उनके जीवित रहने की सम्भावना बढ़ती है.

वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र 143 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जो सुमात्रा टाइगर का प्राकृतिक आवास है.
© UNDP Indonesia

बचे हुए बाघ आवासों की सुरक्षा

बाघों के बचे आवास क्षेत्रों की रक्षा और ज़रूरी संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए बाघ परिदृश्य निवेश कोष (TLIF) की स्थापना की गई है. इसका उद्देश्य निजी निवेश को ऐसे व्यवसायों की ओर मोड़ना है जो बाघ आवासों के संरक्षण, पुनर्स्थापना और सतत प्रबंधन में सहयोग करें.

मलेशिया के प्रायद्वीपीय क्षेत्र में IC-CFS परियोजना के ज़रिए पेराक, पहांग और जोहोर जैसे अहम क्षेत्रों में जैव विविधता और पारिस्थितिकी सेवाओं को बचाने का कार्य किया जा रहा है. यह GEF द्वारा वित्तपोषित और UNDP मलेशिया द्वारा समर्थित है. इसका लक्ष्य बिखरे जंगलों को पारिस्थितिक गलियारों से जोड़कर एक सतत वन क्षेत्र तैयार करना है.

IC-CFS टीम, SMART टूल्स का उपयोग करके, पायलट क्षेत्रों में निगरानी, प्रजातियों की पहचान, रास्तों का मानचित्रण और तस्करी की फौरेंसिक पहचान जैसे उपायों को मज़बूत बना रही है.

डुरियन रंबुन गाँव के लोग सुमात्रा टाइगर सहित वन की जैव विविधता की निगरानी के लिए सामुदायिक गश्त करते हैं.
© Edy Susanto

अब भी समय है

हम पहले ही बहुत कुछ खो चुके हैं - और अगर अब भी कार्रवाई नहीं की गई, तो नुक़सान और भी गहरा हो सकता है.

फिर भी उम्मीद क़ायम है, और रास्ता स्पष्ट है: अधिक सीमापार सहयोग, बेहतर पारिस्थितिक गलियारे, और सुरक्षित, जुड़े हुए जंगल एवं पारिस्थितिक तंत्र.

बाघों की वापसी सम्भव है

बाघों से समृद्ध दुनिया न सिर्फ़ सम्भव है, बल्कि हमारे भविष्य की ज़रूरत भी है.

बाघों का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि धरती की जैव विविधता को सुरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, सन्तुलित पर्यावरण बनाने की दिशा में एक अहम क़दम है.

भारत के ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में दिखे दो बंगाल टाइगर.
© Gregoire Dubois