यूएन-भारत साझेदारी से, वैश्विक दक्षिण में एसडीजी प्राप्ति में सहयोग
संयुक्त राष्ट्र और भारत ने वैश्विक दक्षिण के देशों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक नई साझेदारी शुरू की है. संयुक्त राष्ट्र इस पहल के अन्तर्गत, भारत की सर्वोत्तम विकास प्रथाओं और नवाचारों को अपने वैश्विक नैटवर्क के ज़रिए उन देशों से जोड़ेगा, जो टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के प्रयास कर रहे हैं.
‘भारत-संयुक्त राष्ट्र वैश्विक क्षमतावर्धन पहल’ नामक इस कार्यक्रम का मक़सद, वैश्विक दक्षिण के देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप, भारत के विकास अनुभवों और नवाचारों को साझा करना है.
संयुक्त राष्ट्र, इस पहल के तहत, अपने अन्तरराष्ट्रीय नैटवर्क का उपयोग करके, भारत के सफल विकास कार्यक्रमों और संस्थानों को अन्य देशों से जोड़ेगा, ताकि वे टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) को तेज़ी से हासिल कर सकें.
इसमें कौशल प्रशिक्षण, ज्ञान साझा करने और साझीदार देशों में पायलट परियोजनाएँ शुरू करने जैसे महत्वपूर्ण क़दम शामिल हैं.
यह काम भारत में संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी देशीय कोष और भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (ITEC) के ज़रिए किया जाएगा.
एसडीजी कोष
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा 1 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इन साझेदारियों की औपचारिक शुरुआत की गई.
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने इस अवसर पर कहा, “यह पहल SDG-17 की भावना और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम क़दम है.
इसका उद्देश्य, भारत का अनुभव साझा करके, वैश्विक दक्षिण के देशों को एसडीजी से जुड़े अहम क्षेत्रों में सशक्त बनाना है.”
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प ने कहा, “भारत, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग में अपनी भूमिका को और मज़बूत कर रहा है, ताकि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति तेज़ हो सके.
इसमें भारत के संस्थानों और संयुक्त राष्ट्र की साझेदारी तथा नवाचार का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है.”
भारत में यूएन रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय की चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ राधिका कौल बत्रा ने बताया, “यह पहल ITEC जैसे अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कार्यक्रम के साथ मिलकर और भी प्रभावशाली बनी है. यह भारत के श्रेष्ठ विकास उदाहरणों और संस्थागत अनुभवों को साझीदार देशों तक पहुँचाने में मदद करेगी.”
यूएन इंडिया ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग के ज़रिए क्षेत्रीय साझेदारी को मज़बूत करने के उद्देश्य से एसडीजी कोष की शुरुआत की थी.
इस कोष के लिए, भारत सरकार–संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सहयोग ढाँचे (2023–2027) के तहत बिल एंड मैलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने 30 लाख डॉलर शुरुआती योगदान दिया था.
यह पहल परिवर्तनकारी एसडीजी कार्यवाही के लिए संसाधन जुटाने की एक रणनैतिक योजना का हिस्सा है. इसका उद्देश्य, भारत के दक्षिण-दक्षिण सहयोग की पेशकश का विस्तार करने के लिए, भारत में यूएन एजेंसियों की भागेदारी मज़बूत करना है.
चयनित कार्यक्रम
प्रस्तावों की प्रतियोगिता के बाद चुनी गई प्रमुख साझेदारियाँ इस प्रकार हैं:
UNDP और उन्नत संगणन विकास केन्द्र (C-DAC), राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान (NIHFW) की मदद से: ज़ाम्बिया और लाओ पीडीआर में डिजिटल स्वास्थ्य मंचों के ज़रिए सभी लोगों को समान स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की पहल.
WFP और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबन्धन संस्थान (NIFTEM), कुंडली, हरियाणा: नेपाल में पोषक (फ़ोर्टीफ़ाइड) चावल की आपूर्ति प्रणाली को मज़बूत करने हेतु त्रिपक्षीय सहयोग.
UNFPA और राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (NSSTA) - भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) की तकनीकी सहायता के साथ: बारबाडोस, बेलीज़, सेंट किट्स एंड नेविस, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे कैरेबियाई देशों को जनगणना की तैयारी और सांख्यिकीय संस्थानों को मज़बूत करने में सहायता.
UNESCO और राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD) एवं राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की विशेषज्ञता के साथ: दक्षिण सूडान में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली को सार्वजनिक-निजी भागेदारी मॉडल के ज़रिए मज़बूत करना.