अवाज़ा सम्मेलन: भूमिबद्ध देशों के लिए विकास की नई सम्भावनाओं की तलाश
कैस्पियन सागर तट पर बसे तुर्कमेनिस्तान के अवाज़ा शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (LLDC3) में भाग लेने के लिए, कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, निवेशक और ज़मीनी स्तर के नेता एकत्र हो रहे हैं. समुद्र तक सीधी पहुँच नहीं होने के कारण भूमिबद्ध देशों (Landlocked Developing Countries – LLDCs) को व्यापार और आर्थिक विकास से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. दशक में एक बार होने वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य, 32 भूमिबद्ध विकासशील देशों के लिए वैश्विक सहयोग को मज़बूत करना है, ताकि वे विकास की दौड़ में पीछे नहीं छूटें.
नई अवाज़ा कार्य योजना के तहत, भूमिबद्ध विकासशील देशों पर होने वाले तीसरे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (LLDC3) में, विकास की सम्भावनाओं को बढ़ाने के लिए प्रमुख क़दम उठाए जाएँगे.
मंगलवार को शुरू हो रहे इस सम्मेलन में, इन देशों में रहने वाले 57 करोड़ लोगों के लिए मुक्त भू-आवागमन, कुशल व्यापार गलियारों, मज़बूत आर्थिक सहनसक्षमता और नई वित्तीय सहायता को बढ़ावा देने पर बातचीत होगी.
लम्बे समय से भूमिबद्ध देशों की भौगोलिक स्थिति ही उनके भविष्य की दिशा तय करती रही है.
इन देशों में व्यापार करना बहुत महंगा और धीमा होता है - लागत वैश्विक औसत से 74% तक ज़्यादा होती है, और सामान सीमा पार पहुँचाने में दोगुना समय लगता है.
इसी वजह से, दुनिया के कुल व्यापार में इन देशों की हिस्सेदारी केवल 1.2% ही है.
वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच, इन देशों के पीछे छूट जाने का बड़ा ख़तरा है.
संयुक्त राष्ट्र में भूमिबद्ध विकासशील देशों की उच्च प्रतिनिधि रबाब फ़ातिमा कहती हैं, "LLDC3 इस हालात को बदलने का एक अहम और निर्णायक अवसर है."
"इस सम्मेलन का ध्यान मुख्यत: लोगों के कल्याण पर केन्द्रित रहेगा - वे करोड़ों बच्चे जिनके पास न इंटरनैट है, न डिजिटल उपकरण; वे किसान जो ख़राब सड़कों के कारण अपना माल बाज़ार तक नहीं पहुँचा पाते; और वे उद्यमी, जिनके सपने सीमाओं पर होने वाली देरी और सीमित वित्तीय पहुँच की वजह से अधूरे रह जाते हैं."
व्यापक भागेदारी
5 से 8 अगस्त तक चलने वाले इस चार दिवसीय सम्मेलन में अनेक बैठकें और चर्चाएँ होंगी जिनके लिए, सांसदों, महिला नेताओं, नागरिक समाज और युवजन के लिए भी अलग-अलग मंच बनाए गए हैं.
एजेंडे की तात्कालिकता और महत्त्व को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के भी इस सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है.
अवाज़ा कार्रवाई योजना
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भूमि से घिरे विकासशील देशों की चुनौतियों से निपटने हेतु, दिसम्बर (2024) में एक अहम कार्य योजना पारित की थी जिसे 2024-2034 दशक के दौरान लागू किया जाएगा. यही इस सम्मेलन की मूल आधारशिला है.
इस कार्य योजना के तहत पाँच अहम प्राथमिकतों को चिन्हित किया गया है - ढाँचागत बदलाव, बेहतर परिवहन और सम्पर्क व्यवस्था, व्यापार को सुगम बनाना, क्षेत्रीय एकीकरण, तथा जलवायु सहनसक्षमता का निर्माण.
तुर्कमेनिस्तान
तुर्कमेनिस्तान के लिए LLDC3 की मेज़बानी न केवल एक बड़ी कूटनैतिक उपलब्धि है, बल्कि वैश्विक प्रतिबद्धता का संकेत भी है.
संयुक्त राष्ट्र में, तुर्कमेनिस्तान की स्थाई प्रतिनिधि अकसोल्तान अतायेवा ने सम्मेलन की मेज़बानी पर गर्व जताते हुए कहा, "हम अवाज़ा में सभी का स्वागत करने को उत्सुक हैं - यह एक परिवर्तनकारी और क्रियाशील सम्मेलन होगा, जो भूमिबद्ध विकासशील देशों को वैश्विक साझेदारियों के केन्द्र में लाएगा."
आयोजकों ने अत्याधुनिक सुविधाएँ, साँस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सहयोग को बढ़ावा देने वाले नैटवर्किंग स्थल तैयार किए हैं. प्रतिनिधि, तुर्कमेनिस्तान की कला, संस्कृति और कैस्पियन सागर के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनन्द भी ले सकेंगे.
वृहद दृष्टिकोण
भूमिबद्ध विकासशील देशों के लिए यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल है.
ये देश जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, वैश्विक सम्पर्क से सबसे कम जुड़े हुए हैं, और वैश्विक व्यापार श्रृँखलाओं से सबसे दूर हैं.
अगर तुरन्त ठोस एवं साहसिक क़दम नहीं उठाए गए, तो 2030 का सतत विकास एजेंडा बस एक सपना बनकर रह जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र में LLDC समूह के अध्यक्ष और बोलीविया के राजदूत डिएगो पाचेको कहते हैं, "मानवता का भविष्य इन देशों के भविष्य से गहराई से जुड़ा है. हम मिलकर इन देशों की क्षमताओं को सामने ला सकते हैं - न केवल अपने-अपने देशों के लिए, बल्कि पूरी मानवता तथा हमारी धरती के साझा भविष्य के लिए."
अवाज़ा सम्मेलन से अनेक तरह की उम्मीदों लगी हुई हैं.
अब सवाल यह नहीं रह गया कि भौगोलिक स्थिति मायने रखती है या नहीं - क्योंकि वह तो निश्चित रूप से रखती है.
असल सवाल यह है: क्या दुनिया एकजुट होकर इन चुनौतियों का समाधान ढूँढ सकती है?
LLDC3 सम्मेलन का उद्देश्य है यह साबित करना कि ऐसा मुमकिन है.