अवाज़ा सम्मेलन: ज़मीन से घिरे विकासशील देशों के विकास पर होगी चर्चा
कैस्पियन सागर और रेगिस्तान के संगम पर बसे अवाज़ा शहर में रविवार को, संयुक्त राष्ट्र और तुर्कमेनिस्तान के झंडे फहराए गए. यह आयोजन, ज़मीन से घिरे विकासशील देशों पर तीसरे यूएन सम्मेलन (LLDC3) के लिए तैयारी का हिस्सा था, जो मंगलवार को शुरू हो रहा है. इस सम्मेलन में दुनिया भर के अनेक नेता और प्रतिनिधि शिरकत करने वाले हैं.
इस सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के अलावा, अन्तरराष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के लगभग 3 हज़ार प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है.
सम्मेलन का उद्देश्य
LLDC3 सम्मेलन का उद्देश्य, ज़मीन से घिरे उन 32 विकासशील देशों के लिए साझेदारी और सहयोग को बढ़ाना है, जिनकी कुल जनसंख्या 50 करोड़ से अधिक है.
ये देश भू-आवागमन की चुनौतियों, सीमित बाज़ार पहुँच, उच्च परिवहन लागत और जलवायु संकटों जैसी गम्भीर ढाँचागत समस्याओं से जूझते हैं.
इस सम्मेलन का लक्ष्य मज़बूत बुनियादी ढाँचे और बेहतर सम्पर्क साधनों के ज़रिए, इन बाधाओं को पार करना है ताकि वैश्विक बाज़ारों में एकीकृत और समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके.
साझा प्राथमिकता
रविवार को आयोजित किए गए समारोह में, तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री राशिद मरेदोव ने सभी प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत करते हुए कहा, “अवाज़ा में आपका स्वागत है. मैं सम्मेलन की सफलता की कामना करता हूँ.”
संयुक्त राष्ट्र की उच्चायुक्त रबाब फ़ातिमा ने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन देशों के बीच साझेदारी को “मज़बूत और व्यापक” बनाएगा.
इस सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन मंगलवार को होगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश भी शामिल होंगे.
इससे पहले उन्होंने, कज़ाख़स्तान के अल्माती में, मध्य एशिया और अफ़ग़ानिस्तान के लिए, नव गठित सतत विकास लक्ष्य (SDGs) केन्द्र पर बात करते हुए, “साझा प्राथमिकताओं और समाधान पर आधारित मध्य एशिया में सहयोग के नए युग का प्रतीक” बताया है.
महासचिव ने आगाह किया कि निर्धनता उन्मूलन की गति में रुकावट, भूख में वृद्धि और हिमनदों का पिघलना और जल स्रोतों का सिकुड़ना जैसे जलवायु परिवर्तन के तीव्र प्रभाव, क्षेत्र के लिए गम्भीर ख़तरे हैं.
सम्मेलन की तैयारियाँ
तुर्कमेनिस्तान के कैस्पियन तट पर स्थित एक राष्ट्रीय पर्यटन क्षेत्र अवाज़ा, इस सप्ताह इस सम्मेलन के लिए एक वैश्विक मंच में तब्दील हो गया है.
संयुक्त राष्ट्र में, तुर्कमेनिस्तान की स्थाई प्रतिनिधि अकसोल्तान अतायेवा ने कहा, “प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएँ, संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर की गई हैं. हम अपनी ज़िम्मेदारी को गम्भीरता से लेते हैं और सर्वोत्तम परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहे हैं.”
तुर्कमेनिस्तान मंडप के प्रतिनिधि अनाबेरदी काशानोव ने यूएन न्यूज़ को बताया कि इस क्षेत्र की प्रमुख विकासशील योजनाओं में, “कज़ाख़स्तान-तुर्कमेनिस्तान-ईरान रेलवे और तुर्कमेनिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन” शामिल हैं.”
LLDC3 सम्मेलन का मूल उद्देश्य वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देना है ताकि ज़मीन से घिरे देशों के लिए समावेशी और टिकाऊ विकास की गति को तेज़ किया जा सके.
यह सम्मेलन इन देशों की भू-आर्थिक बाधाओं को अवसरों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.