परिवर्तन की ज़िम्मेदारी: संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार के प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र को सौंपे गए शासनादेशों या ज़िम्मेदारियों के ज़रिए, लाखों लोगों के जीवन में सुधार आया है. फिर भी, कार्यों में दोहराव, बिखराव और समय की नब्ज़ के साथ पटरी से उतर चुके कार्यों के कारण, इस विश्व संगठन के संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है. जिससे इस संगठन की, उन लोगों की सेवा करने की क्षमता कम हो रही है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, UN80 पहल के तहत, इस विश्व संगठन को और अधिक कुशल, सुसंगत और प्रभावशाली बनाने के लिए प्रस्तावों का एक पुलिन्दा, सदस्य देशों के सामने पेश किया है.
यूएन महासभा, सुरक्षा परिषद और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद द्वारा जारी किए गए, कार्रवाई के अनुरोधों या निर्देशों को शासनादेश कहा जाता है, जोकि एक तरह की ज़िम्मेदारी होती है.
इनकी संख्या 1945 के बाद से आज तक बहुत बढ़ गई है.
आज 40 हज़ार से ज़्यादा शासनादेश सक्रिय हैं जिन्हें लगभग 400 अन्तर सरकारी संस्थाएँ पूरा करने में सक्रिय हैं.
कुल मिलाकर, इन सभी के लिए प्रति वर्ष 27 हज़ार से अधिक बैठकों की आवश्यकता होती है और प्रतिदिन लगभग 2,300 पृष्ठों की सामग्री सृजित होती है. इन सब पर अनुमानित वार्षिक लागत 36 करोड़ डॉलर होती है.
अपना आकार बढ़ाती एक चुनौती
190 से अधिक देशों और क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र के कामकाज को यही शासनादेश दिशा निर्देशित करते हैं, जिनमें शान्ति स्थापना से लेकर मानवीय सहायता कार्रवाई और विकास तक की ज़िम्मेदारियाँ शामिल हैं. लेकिन इनमें कई शासनादेश, पुराने पड़ चुके हैं या एक जैसे काम, कई शासनादेशों में शामिल होते हैं.
इससे इन शासनादेशों की जटिलता बढ़ती जा रही है.
2020 के बाद से, महासभा के प्रस्तावों की औसत शब्द संख्या में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव अब 30 साल पहले की तुलना में तीन गुना लम्बे हैं.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, शुक्रवार को महासभा को सम्बोधन में कहा, "आइए तथ्यों का सामना करें, हम पर्याप्त संसाधनों के बिना, कहीं अधिक प्रभावशाली परिणामों की उम्मीद नहीं कर सकते. हम अपनी क्षमताओं को इतना कम करेंगे तो परिणामों के बजाय, प्रक्रिया उलझ जाने का जोखिम उठाएंगे"
समन्वय की कमी से भी तनाव और बढ़ाता है. संयुक्त राष्ट्र की कई संस्थाएँ, अलग-अलग कार्यक्रमों और बजटों को सही ठहराने के लिए, समान जनादेशों का हवाला देती हैं, जिससे दोहराव होता है और प्रभाव कम होता है. 85 प्रतिशत से ज़्यादा शासनादेशों में समीक्षा या समाप्ति का कोई प्रावधान नहीं है.
एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, "प्रभावी समीक्षा बहुत कम देखने को मिलते हैं, ये नियमित नहीं हैं. एक ही शासनादेश पर साल-दर-साल चर्चा होती रहती है - अक्सर मौजूदा आलेख में मामूली बदलाव के साथ."
UN80 पहल: एक व्यवस्थित दृष्टिकोण
31 जुलाई को जारी की गई शासनादेश कार्यान्वयन समीक्षा रिपोर्ट, महासचिव की व्यापक UN80 पहल का हिस्सा है. यह संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने का एक प्रयास है, जिस पर अनेक वर्षों से काम चल रहा है.
इस रिपोर्ट में, शासनादेशों का व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन करने के बजाय, एक "सम्पूर्ण" दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें शासनादेशों के सृजन, उन पर अमल और उनकी समीक्षा के तरीक़े पर विचार किया गया है, और प्रत्येक चरण में सुधार के तरीक़े सुझाए गए हैं.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने महासभा को बताया, "मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूँ: शासनादेश सदस्य देशों का काम है. ये शासनादेश आपकी इच्छा की अभिव्यक्ति करते हैं. और ये केवल सदस्य देशों की सम्पत्ति और ज़िम्मेदारी हैं.
इन शासनादेशों को शुरू करने, इनके प्रभाव की समीक्षा करने या इन्हें हटाने की ज़िम्मेदारी आपकी और केवल आपकी है. हमारी भूमिका, इन शासनादेशों को पूरी तरह, ईमानदारी से और कुशलता के साथ लागू करना है."
उन्होंने आगे कहा, "यह रिपोर्ट उस विभाजन का सम्मान करती है. इसमें इस बात पर ध्यान दिया गया है कि हम आपके द्वारा सौंपे गए शासनादेशों पर किस तरह अमल करते हैं."
शासनादेश - सृजन से लेकर अमल तक
यह रिपोर्ट, कार्यों के दोहराव और जटिलता को दूर करने के लिए, डिजिटल शासनादेश रजिस्टर रखे जाने का सुझाव देती है जिससे विभिन्न निकायों द्वारा लागू किए जा रहे शासनादेशों के बारे में जानकारी रखना आसान हो जाए.
रिपोर्ट यथार्थवादी संसाधन आवश्यकताओं वाले छोटे और स्पष्ट प्रस्तावों को भी प्रोत्साहित करती है.
रिपोर्ट बैठकों और रिपोर्टों के बढ़ते प्रबन्धन बोझ पर भी प्रकाश डालती है. पिछले साल, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली ने 27,000 बैठकों को समर्थन मुहैया कराया और 1,100 रिपोर्टें तैयार कीं.
एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, "बैठकें और रिपोर्टें तैयार करना आवश्यक हैं. लेकिन हमें यह पूछना होगा: क्या हम अपने सीमित संसाधनों का सबसे प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं?"
धन की उपलब्धता और प्रभाव
रिपोर्ट में पेश किए गए प्रस्तावों में, इस विश्व संगठन में तैयार की जाने वाली रिपोर्टों और बैठकों की संख्या कम करना, प्रारूपों को सुव्यवस्थित करना और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए, रिपोर्टों का उपयोग किए जाने पर नज़र रखा जाना शामिल है.
महासचिव ने यूएन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय का भी आहवान किया है ताकि कामकाज के दोहराव से बचा जासके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक शासनादेश, स्पष्ट परिणामों से जुड़ा हो.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लचर वित्त उपलब्धता के कारण, सुसंगत अमल कमज़ोर हो रहा है. 2023 में, संयुक्त राष्ट्र का 80 प्रतिशत वित्त पोषण स्वैच्छिक योगदान से आया, जिसमें से 85 प्रतिशत निर्धारित था.
महासचिव ने कहा, "अनिश्चित या बिखरा हुए वित्त पोषण और बिखरे हुए संयोजन के मेल से, प्रभाव भी बिखरा हुआ ही होता है."
"इससे निपटने के लिए हम सभी की कुछ भूमिका है. और हम सभी को अपने नियंत्रण में आने वाले स्तरों पर कार्य करना चाहिए."
लोगों को प्राथमिकता पर रखना
महासचिव की नज़र में, सुधार केवल प्रक्रिया के बारे में नहीं, बल्कि प्रभाव के बारे में भी हैं.
उन्होंने कहा, "शासनादेश अपने आप में मंज़िल नहीं हैं. वे साधन हैं - वास्तविक जीवन में, वास्तविक दुनिया में, वास्तविक परिणाम देने के लिए."
उन्होंने इस प्रयास के केन्द्र में भूमिका निभा रहे यूएन कर्मचारियों की सराहना की.
यूएन प्रमुख ने कहा, "शासनादेशों को लागू करने का कोई भी काम, हमारे कर्मचारियों - संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं और पुरुषों - के बिना सम्भव नहीं है."
"उनकी विशेषज्ञता, समर्पण और साहस, इस प्रयास के लिए अपरिहार्य हैं. अगर हमें शासनादेशों को लागू करने के तरीक़े में सुधार करना है, तो हमें उन्हें लागू करने वाले लोगों का समर्थन और सशक्तिकरण भी करना होगा."
सदस्य देशों से पुकार
यूएन महासचिव ने अन्त में ज़ोर दिया कि अगले क़दम, सदस्य देशों की ओर से ही उठाए जाने चाहिए. "आगे का रास्ता आपको तय करना है. मेरी ज़िम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि सचिवालय, आपके द्वारा चुने गए कार्य-मार्ग के लिए आवश्यक क्षमताएँ और जानकारी मुहैया कराए."
यह रिपोर्ट सदस्य देशों को, एक समयबद्ध अन्तर-सरकारी प्रक्रिया पर विचार करने के लिए आमंत्रित करती है ताकि प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रयास, उन जगहों पर सफल हो जहाँ पहले के प्रयास कम पड़ गए हैं.
रिपोर्ट कहती है कि इसका परिणाम एक अधिक चुस्त, सुसंगत और प्रभावशाली संयुक्त राष्ट्र होगा, जो बेहतर ढंग से कार्यक्रम संचालन कर सकेगा और बेहतर ढंग से सेवाएँ उपलब्ध करा सकेगा.
यूएन80 पहल के बारे में विस्तृत जानकारी यहाँ देखी जा सकती है.