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ECOSOC: नए अध्यक्ष थापा, गाँवों की बेहतरी और निर्धनता उन्मूलन पर देंगे ख़ास ध्यान

वर्ष 2025-2026 के लिए ECOSOC के नए अध्यक्ष, नेपाल के राजदूत लोक बहादुर थापा.
UN Photo/Evan Schneider
वर्ष 2025-2026 के लिए ECOSOC के नए अध्यक्ष, नेपाल के राजदूत लोक बहादुर थापा.

ECOSOC: नए अध्यक्ष थापा, गाँवों की बेहतरी और निर्धनता उन्मूलन पर देंगे ख़ास ध्यान

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संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के नए अध्यक्ष, नेपाल के राजदूत लोक बहादुर थापा ने इस पद को, अपने देश और बहुपक्षवाद के प्रति उसकी स्थाई प्रतिबद्धता के लिए एक "ऐतिहासिक क्षण" क़रार दिया है. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान, गाँवों को मज़बूत करने के लिए कृषि की बेहतरी और निर्धनता दूर करने के प्रयासों पर ख़ास ध्यान देने की भी बात कही है.

लोक बहादुर थापा ने कहा है कि उनके अध्यक्ष पद पर रहते हुए उनका आदर्श वाक्य होगा "बेहतर परिणाम" देना, जिसके तहत, नए कार्यक्रमों और पहलों पर असरदार तरीक़े से अमल करने की ख़ातिर, साझेदारियों और बहुपक्षवाद को मज़बूत करने की ज़रूरत होगी. इन कार्यक्रमों में 2030 का सतत विकास एजेंडा भी शामिल है.

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इस पद पर चुने जाने के बाद उन्होंने कहा, "बेहतर परिणाम कोई विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक अनिवार्यता है. यह बहुपक्षवाद में विश्वास बहाल करने, मतभेदों को पाटने, सबसे कमज़ोर लोगों को सशक्त बनाने और प्रतिबद्धताओं को कार्रवाई में बदलने का हमारा रास्ता है."

आगामी वर्ष के लिए ECOSOC के चार उपाध्यक्ष भी चुने गए हैं जिनके नाम हैं - अमार बेंडजामा (अल्जीरिया), हैक्टर गोमेज़ हर्नांडेज़ (स्पेन), वेलिंगटन डारियो बेनकोस्मे कास्टानोस (डोमिनिकन गणराज्य) और पारुइर होवहानिस्यान (आर्मीनिया).

ECOSOC के 80 वर्ष

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC), इस विश्व संगठन के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिस पर अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक सहयोग और विकास को बढ़ावा देने की ज़िम्मेदारी है.

परिषद के 54 सदस्य देश हैं, जिन्हें महासभा तीन-वर्षीय कार्यकाल के लिए बारी-बारी से चुनती है. इसकी सदस्यता क्षेत्रों के आधार पर चुनी जाती है.

परिषद, सतत विकास और मानवाधिकारों जैसे मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसियों, आयोगों और निकायों के कार्यों के बीच तालमेल करती है.

यह वैश्विक आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा देने, आम सहमति बनाने और कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए एक केन्द्रीय मंच के रूप में भी कार्य करती है.

नेपाल के राजदूत लोक बहादुर थापा के लिए, यह संस्था विश्व के विकास एजेंडे को आकार देने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि कोई भी पीछे नहीं छूटे.

उनका कहना है, "ECOSOC हमारा स्थान है. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों और हितधारकों के समर्पण, भागेदारी और सक्रिय सहभागिता की आवश्यकता है."

बेहतर नतीजों के लिए पाँच तरीक़े

लोक बहादुर थापा ने वैसे तो अपने कार्यकाल के लिए अपना आदर्श वाक्य "बेहतर परिणाम देना" रखा है, मगर उन्होंने पाँच ऐसे विशिष्ट क्षेत्रों का ख़ाका भी पेश किया जिन पर वह और परिषद, आगामी वर्ष में ध्यान केन्द्रित करेंगे.

दुनिया भर में साढ़े 73 करोड़ से ज़्यादा लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं, ऐसे में उनकी पहली प्राथमिकता, गाँवों को बेहतर बदलाव के लिए सहनसक्षम बनाने और भुखमरी को समाप्त करने के लिए कृषि में बदलाव लाना है.

डिजिटल उद्यमिता और युवा जुड़ाव, उनकी दूसरी प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं. उन्होंने कई विकासशील देशों में "युवाओं की बढ़ती संख्या" का उल्लेख किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि अगर इसका लाभ उठाया जा सके तो यह एक शक्तिशाली आबादी संसाधन होगा.

उनकी तीसरी प्राथमिकता, अपने पूर्ववर्ती ECOSOC अध्यक्षों की तरह, जलवायु कार्रवाई और सहनक्षमता से सम्बन्धित है. हालाँकि, इस बार, वह चाहते हैं कि ECOSOC, विशेष रूप से हिमनद झीलों और बाढ़ पर ध्यान केन्द्रित करे.

उनके अन्तिम दो प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं: अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में सुधार ताकि यह अधिक समावेशी हो और ECOSOC की 80वीं वर्षगाँठ मनाना.

लोक बहादुर थापा ने ये भी कहा कि वे और ECOSOC के सदस्य, जलवायु परिवर्तन में तेज़ी, बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव और बहुपक्षीय व्यवस्था में घटते विश्वास सहित, अनेक परस्पर जुड़े संकटों के बीच, इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए काम करेंगे.

उन्होंने ने कहा, "ये चुनौतियाँ प्रणालीगत और परस्पर जुड़ी हुई हैं. इनके लिए एकीकृत, समावेशी और दूरदर्शी प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता है."