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ग़ाज़ा: अकाल के लिए भीषण हालात की चेतावनी, आम लोगों पर हमलों में भी वृद्धि

ग़ाज़ा में, इसराइल के हमलों और सहायता आपूर्ति पर पाबन्दी के कारण, अकाल के हालात उत्पन्न हो गए हैं.
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ग़ाज़ा में, इसराइल के हमलों और सहायता आपूर्ति पर पाबन्दी के कारण, अकाल के हालात उत्पन्न हो गए हैं.

ग़ाज़ा: अकाल के लिए भीषण हालात की चेतावनी, आम लोगों पर हमलों में भी वृद्धि

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा पट्टी में अकाल के हालात अपना शिकंजा मज़बूत और व्यापक कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की नवीन जानकारी में, कुपोषण से होने वाली मौतों में वृद्धि, आम लोगों पर लगातार हमलों और गहराते संकट के बीच, सहायता पहुँच में बढ़ती बाधाओं की चेतावनी दी गई है.

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने, अक्टूबर 2023 से अब तक, कुपोषण से सम्बन्धित 154 मौतें होने की सूचना दी है जिनमें 89 बच्चे हैं. 

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इनमें से 63 मौतें केवल जुलाई महीने में हुईं.

ये मौतें खाद्य उपभोग यानि लोगों को भरपेट भोजन मिलने में भारी गिरावट के बाद हुई हैं: संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बुधवार को जारी जानकारी में बताया था कि जुलाई में 81 प्रतिशत परिवारों ने, भोजन उपभोग के ख़राब स्तर की सूचना दी. 

यह संख्या अप्रैल में 33 प्रतिशत थी. और 24 प्रतिशत परिवारों ने अत्यन्त गम्भीर भूख यानि भोजन अभाव का अनुभव किया, जो अकाल की सीमा को पार कर गया. अप्रैल में यह संख्या 4 प्रतिशत थी.

ख़ान यूनिस, डेयर अल-बलाह और ग़ाज़ा सिटी में, अत्यन्त गम्भीर कुपोषण की दर, अकाल के स्तर को भी पार कर गई है.

आईपीसी के खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने, इन हालिया आँकड़ों को देखते हुए चेतावनी दी है कि अकाल के लिए सबसे ख़राब हालात सामने आ रहे है. 

हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अकाल के लिए तीसरी शर्त - भोजन नहीं मिलने यानि भुखमरी से सम्बन्धित मौतों की तीसरी शर्त भी गम्भीर हो रही है, मगर आँकड़े एकत्र करना एक चुनौती बना हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पूर्ण मानवीय सहायता कार्रवाई के लिए समय कम होता जा रहा है. जितनी आबादी के हालात का विश्लेषण किया गया, उसका 22 प्रतिशत हिस्सा "विनाशकारी" स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहा है, और 54 प्रतिशत आबादी के खाद्य असुरक्षा हालात "आपातकालीन" स्तर पर हैं.

साथ ही, 15 प्रतिशत से भी कम आवश्यक पोषण सेवाएँ काम कर पा रही हैं.

आम लोगों पर हमले

अक्टूबर 2023 से इसराइली सैन्य हमलों में अब तक 60 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं. इनमें लगभग 9 हज़ार फ़लस्तीनी, मार्च में इसराइल द्वारा फिर शुरू किए गए हमलों में मारे गए हैं. और केवल 23 से 30 जुलाई के बीच 640 लोगों की मौत हुई.

भोजन की तलाश में इन्तज़ार करने के दौरान हताहत होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है, 27 मई से अब तक 1,239 लोग मारे गए हैं और 8,152 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

OCHA ने आगे बताया कि 18 मार्च से, 7 लाख 67 हज़ार 800 विस्थापित हुए हैं. वैसे तो, 20 जुलाई के बाद से इसराइली अधिकारियों ने कोई नया निकासी आदेश जारी नहीं किया है. 

20 जुलाई को डेयर अल-बलाह में एक मानवीय सहायता केन्द्र को निशाना बनाकर एक बेदख़ली आदेश जारी किया गया था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है.

इसराइली पाबन्दी के कारण, पर्याप्त सहायता सामग्री, ग़ाज़ा में दाख़िल नहीं हो पा रही है.
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जारी विस्थापन, आश्रय स्थलों में अत्यदिक भीड़भाड़, निजता की कमी और बढ़ती खाद्य क़िल्लत के बीच, महिलाओं और लड़कियों के लिए लिंग आधारित हिंसा (GBV) का ख़तरा बढ़ गया है.

ग़ाज़ा के दक्षिणी हिस्से में स्थितियाँ विशेष रूप से विकट हैं, जहाँ GBV से बचे लोगों के लिए अब कोई सुरक्षित आश्रय नहीं बचा है.

सीमित धन के सहारे

इसके अलावा, पर्याप्त धन की कमी भी मानवीय सहायता प्रयासों में बाधा डाल रही है.

30 जुलाई तक, इस क्षेत्र के लिए 2025 की तत्काल मानवीय सहायता अपील के तहत 4 अरब डॉलर एकत्र करने की पुकार लगाई गई थी, जिसमें से केवल लगभग 21 प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त हुई है. इससे सहायता प्रयासों के लिए उपलब्ध धन के बीच व्यापक खाई पैदा हो गई है.