प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए व्यापार का सहारा
प्लास्टिक प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौती के समाधान में, व्यापार की अहम भूमिका हो सकती है. यह समस्या विकासशील देशों को अधिक प्रभावित करती है.
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संस्था (UNCTAD) ने, गुरूवार को आगाह किया कि वैसे तो प्लास्टिक, पृथ्वी के तिहरे संकटों - प्रदूषण, जैव विविधता की हानि और जलवायु परिवर्तन से सीधे रूप में जुड़ा हुआ है, मगर, इसक बावजूद अभी तक प्लास्टिक के उत्पादन, व्यापार और निपटान को नियंत्रित करने वाला कोई व्यापक अन्तरराष्ट्रीय सन्धि मौजूद नहीं है.
वर्ष 2023 में, दुनिया भर में प्लास्टिक उत्पादन 43.6 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुँच गया, जिसका व्यापारिक मूल्य 1.1 ट्रिलियन डॉलर से भी ज़्यादा रहा. यह कुल व्यापार का 5 प्रतिशत हिस्सा था.
हालाँकि, अब तक बनाए गए प्लास्टिक का 75 प्रतिशत भाग, कचरे में तब्दील हो चुका है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा, महासागरों और पारिस्थितिकी तंत्रों में जा पहुँचा है.
यह प्रदूषण खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य के लिए गम्भीर ख़तरा बनता जा रहा है. विशेष रूप से, उन छोटे द्वीपीय और तटीय विकासशील देशों में, जहाँ इससे निपटने की क्षमता सीमित है.
पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा
UNCTAD, पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ प्लास्टिक विकल्पों को, बढ़ावा देने के लिए शुल्क और गै़र-शुल्क उपायों का समर्थन कर रहा है.
ये विकल्प अक्सर खनिजों, पौधों या पशुओं जैसे प्राकृतिक स्रोतों से बनते हैं और इन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है या खाद में तब्दील किया जा सकता है.
साल 2023 में, ऐसे विकल्पों का वैश्विक व्यापार 485 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें विकासशील देशों में 5.6 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई.
शुल्क असमानता
UNCTAD ने स्पष्ट किया है कि पिछले 30 वर्षों में, प्लास्टिक और रबर उत्पादों पर आयात शुल्क 34 प्रतिशत से घटाकर, मात्र 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे ये उत्पाद "कृत्रिम रूप से सस्ते" हो गए हैं.
दूसरी ओर, काग़ज़, बाँस, प्राकृतिक रेशे और समुद्री शैवाल (seaweed) जैसे टिकाऊ विकल्पों पर औसतन 14.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है, जो इनके व्यापार को महंगा और सीमित बनाता है.
UNCTAD के अनुसार, यह असमानता नवाचार और टिकाऊ विकल्पों में निवेश को रोकती या धीमा करती है, ख़ासकर विकासशील देशों में.
इस समय प्लास्टिक का 98 प्रतिशत हिस्सा जीवाश्म ईंधनों से बनाया जाता है. यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो उत्सर्जन और पर्यावरणीय क्षति में वृद्धि होगी.
टिकाऊ व्यापार को बढ़ावा
हालाँकि, हर देश में अलग-अलग नियम लागू हैं, जिससे व्यापार में असमानता और नियमों को पूरा करने की लागत बढ़ जाती है.
इन अलग-अलग और जटिल नियमों के कारण, छोटे व्यवसाय और कम आय वाले निर्यातकों के लिए, टिकाऊ व्यापार में भाग लेना और लाभ उठाना मुश्किल हो जाता है.
प्लास्टिक प्रदूषण पर क़ानूनी समझौते की बातचीत, जो वर्ष 2022 में शुरू हुई थी, अगले सप्ताह जिनीवा में अपने अन्तिम चरण में पहुँचेगी.