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यूक्रेन: रूसी हमले में लगभग 11 लोगों की मौत, सैकड़ों इमारतें ध्वस्त

यूक्रेन में 24 अप्रैल (2025) को रूस के हमलों में अनेक शहरों को निशाना बनाया गया जिनमें राजधानी कीएव भी शामिल थी.
© Human Rights Monitoring Mission in Ukraine/Anastasiia Honcharuk
यूक्रेन में 24 अप्रैल (2025) को रूस के हमलों में अनेक शहरों को निशाना बनाया गया जिनमें राजधानी कीएव भी शामिल थी.

यूक्रेन: रूसी हमले में लगभग 11 लोगों की मौत, सैकड़ों इमारतें ध्वस्त

शान्ति और सुरक्षा

यूक्रेन की राजधानी कीएव में रातभर हुए रूसी हमलों में क़रीब 11 लोगों की मौत हो गई और 130 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निगरानी मिशन (HRMMU) ने पुष्टि की है कि मृतकों में छह साल का एक बच्चा भी शामिल है, जबकि लगभग 10 बच्चे घायल हुए हैं. हताहतों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तर होने की भी ख़बर है.

रूसी हमलों के दौरान रातभर 309 ड्रोन और 8 क्रूज़ मिसाइलें दागी गईं, जिससे कीएव शहर में भारी नुक़सान हुआ है.

हालाँकि, कीएव में तैनात हवाई सुरक्षा ने कई हमलों को रोक भी लिया, लेकिन राजधानी के लगभग 27 इलाक़ों को नुक़सान पहुँचा, जिनमें सोलोमियनस्की और स्वियातोशिंस्की प्रान्त सबसे ज़्यादा प्रभावित रहे. 

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बताया जा रहा है कि हमला इतना अचानक हुआ कि लोगों को शरण लेने का मौक़ा भी नहीं मिला.

HRMMU प्रमुख डैनिएल बैल ने कहा, “घरों, व्यवसायों और सार्वजनिक इमारतों को नष्ट किया जा रहा है और इन्हें दोबारा बनाने में वर्षों का समय लग सकता है. हर नया हमला लोगों पर मानसिक बोझ और अधिक बढ़ा देता है, जो हर रात बंकरों में गुज़ारने को मजबूर हैं.”

सैकड़ों इमारतें क्षतिग्रस्त

ख़बरों के मुताबिक़, कीएव में 100 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें घर, स्कूल, अस्पताल, विश्वविद्यालय और बाल देखभाल केन्द्र शामिल हैं.

बीते सप्ताहान्त हुए हमलों में, लगभग 20 आम लोग मारे गए और 120 से अधिक लोग घायल हुए. 

एक जेल पर सोमवार को हुए हमले में 16 क़ैदी मारे गए, अस्पताल पर हमले में तीन लोगों की मौत हुई, और पूर्वी यूक्रेन में मंगलवार को पाँच नागरिकों की जान चली गई.

HRMMU के अनुसार, रूस ने जून 2024 की तुलना में जून 2025 में, यूक्रेन पर दस गुना ज़्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 232 लोग मारे गए और 1 हज़ार 343 घायल हुए.

यूक्रेन के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवीय समन्वयक माथियास श्मेल ने ज़ोर देकर कहा है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का पालन किया जाना अनिवार्य है और आम लोगों की रक्षा की जानी होगी. उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.