ग़ाज़ा: अकाल के बहुत निकट पहुँचे लोग, मिट्टी में भोजन खोजने को विवश
ग़ाज़ा में संयुक्त राष्ट्र के राहत समूह, दक्षिण कैरेम शेलॉम सीमा चौकी से ईंधन और ज़रूरी सहायता सामग्री पहुँचा रहे हैं, ताकि युद्ध से तबाह क्षेत्र में जल शुद्धिकरण और चिकित्सा सेवाएँ जैसी बुनियादी सुविधाएँ जारी रखी जा सकें.
यूएन राहतकर्मी ओल्गा चेरेवको ने गुरूवार को यूएन न्यूज़ को बताया कि अकाल के कगार पर पहुँचे ग़ाज़ावासी, अब राहत क़ाफ़िलों के गुज़रने वाली सड़कों पर खाने-पीने की चीज़ों को बीनने को मजबूर हो रहे हैं.
उन्होंने कहा, "जब हम अपने वाहन से जा रहे थे, तो मैंने देखा कि एक बुज़ुर्ग व्यक्ति, सड़क के किनारे अकेले घुटनों के बल झुके हुए थे और ज़मीन पर गिरे चने बीन रहे थे, जो शायद किसी पहले राहत क़ाफ़िले से गिर गए थे."
"वो उन्हें अपने हाथों से उठाकर अपनी टी-शर्ट में भर रहे थे, क्योंकि फ़िलहाल उनके पास भोजन खोजने का यही एकमात्र तरीक़ा बचा है. वहाँ स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है."
हताशा भरे हालात
ग़ाज़ा से आ रही नवीनतम ख़बरों के अनुसार, पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण, कई माताएँ अब बच्चों को स्तनपान नहीं करवा पा रही हैं और मजबूरी में उन्हें पिसा हुआ चना, रोटी और चावल खिला रही हैं. यह आहार शिशुओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, “यह स्थिति रोकी जा सकती है,” और मानवीय सहायता की पहुँच बढ़ाने का आग्रह किया.
उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ज़ोर दिया है, “ग़ाज़ा में स्वास्थ्य सम्बन्धी ज़रूरतें बेहद गम्भीर हैं, और चिकित्सा सामग्री की लगातार आपूर्ति बेहद आवश्यक है.”
इस बीच, स्वास्थ्य कर्मियों ने बुधवार को बताया कि ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से के ज़िकिम सीमा चौकी के पास भोजन का इन्तज़ार करते हुए, लगभग 50 ग़ाज़ावासी मारे गए और 400 घायल हुए हैं.
यूएन की राहत समन्वयक ओल्गा चेरेवको ने बताया कि गुरूवार सुबह जब वे कैरेम शेलॉम को जा रही थीं, तो उनका मिशन दो घंटे तक सुरक्षा चौकी पर रोका गया.
ज़रूरतों के मुक़ाबले कम मदद
समन्वयक चेरेवको ने कहा कि ईंधन की आपूर्ति सराहनीय है, लेकिन ग़ाज़ा की विशाल ज़रूरतों के सामने यह बहुत कम है.
उन्होंने कहा, "हमें हर दिन लाखों लीटर ईंधन की ज़रूरत है ताकि बिजली, पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा, आपातकालीन संचार और अन्य बुनियादी सेवाओं को सुचारू रूप से चलाया जा सके."
उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति आसान बनाने के लिए इसराइल ने अपनी सैन्य गतिविधियों को दिन में कुछ घंटों के लिए रोकने की जो घोषणा की थी, उसके बाद से राहत क़ाफ़िलों को अनुमति मिलने में लगने वाला समय थोड़ा कम हुआ है.
OCHA ने कहा कि इसराइल के चार दिन पुराने 'सैन्य गतिविधि विराम' के बावजूद, राहत सामग्री लेने आए लोगों की मौतें और भुखमरी व कुपोषण से होने वाली त्रासदी जारी है, क्योंकि ऐसी इकतरफ़ा घोषणाएँ, ग़ाज़ा की भीषण ज़रूरतों के अनुरूप लगातार सहायता आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं.