उम्मीदों के झाँसों और झूठ के चंगुल से निकलकर, मानव तस्करी से आज़ादी
एक नई ज़िन्दगी का सपना, एक अच्छे कामकाज या रोज़गार का वादा और एक सुरक्षित भविष्य की उम्मीद…ये सब कुछ बहुत सामान्य और ऐसा लगा जिस पर भरोसा किया जा सके. मगर दुर्भाग्य से, हुआ कुछ और! जब मारिया* ने त्रिनिदाद के एक समुद्र तट पर पैर रखे, तो उनका सामना उस कड़वी वास्तविकता से हुआ, जिसकी उन्होंंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. उन्हें उम्मीद की जगह मिला भय, आज़ादी की जगह क़ैद, और एक नई शुरुआत की जगह, एक ऐसा अँधेरा, जिसने सालों तक उनका पीछा नहीं छोड़ा.
*पहचान की सुरक्षा के लिए नाम बदल दिया गया है.
30 जुलाई को मनाए जाने वाले, 'मानव तस्करी के विरुद्ध विश्व दिवस' पर महसूस कीजिए एक ऐसी साहसी महिला की आपबीती, जिसने इस भयावह जाल से ख़ुद को किस तरह आज़ाद कराया...
मारिया ने, 8 साल पहले वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस को अलविदा कहा था, उस देश से जहाँ अवसर धीरे-धीरे ख़त्म हो रहे थे, मगर मारिया की आँखों और दिल में, एक पशु चिकित्सक बनने का सपना अब भी जीवित था.
मारिया ने, केवल 21 साल की उम्र में, एक जान-पहचान वाले व्यक्ति का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसने त्रिनिदाद और टोबैगो में ऐसा रोज़गार दिलाने का वादा किया जिसमें घरेलू कामकाज और रेस्तराँ व होटलों में अतिथि सत्कार करना था.
उन्हें, यह वादा एक सहारा लगा और एक ऐसी उम्मीद भी, जिससे वह न केवल ख़ुद को सम्भाल सकती थीं, बल्कि अपने परिवार की मदद भी कर सकती थीं.
मारिया को तब यह नहीं मालूम था कि वह एक सुनियोजित जाल में फँसने जा रही है. वो कहती हैं, “मैंने एक बेहतर भविष्य के वादे पर यक़ीन किया…लेकिन ख़ुद को एक ऐसे डरावने सपने में फँसी पाया जिससे निकलना नामुमकिन था.”
उन्हें जबरन मज़दूरी और यौन शोषण के लिए मजबूर किया गया. वह डर और घुटन में जीती रहीं, शायद ही कभी सूरज की रौशनी देख पातीं, क्योंकि उनकी आज़ादी उनसे छीन ली गई थी.
एक नई शुरुआत...
मारिया 8 महीने तक बन्धक रहने के बाद, किसी तरह वहाँ से भाग निकलने में सफल हुई. मगर यह उनकी परेशानियों का अन्त नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ने और ख़ुद को सम्भालने की शुरुआत थी.
अब 29 साल की मारिया त्रिनिदाद और टोबैगो में, अपने साथी और दो छोटे बच्चों के साथ रहती हैं. ज़िन्दगी अब स्कूल, बच्चों और परिवार के साथ बिताए लम्हों से भरी है, लेकिन बीते हुए ज़ख़्म आज भी उसके भीतर कहीं गहराई में मौजूद हैं.
वह मुस्कराकर बात करती हैं, लेकिन उनकी आवाज़ में अब भी, झेली हुई तकलीफ़ों का दर्द झलकता है.
वह काँपती आवाज़ में कहती हैं, "यह सफ़र आसान नहीं रहा, लेकिन मैं धीरे-धीरे नई ज़िन्दगी बना रही हूँ."
वेनेज़ुएला में उनका परिवार आज भी नहीं जानता कि उन्होंने क्या झेला. उन्हें शर्म और डर ने चुप रखा है.
मारिया ने, अपने माता-पिता और भाई-बहनों को 7 वर्षों से नहीं देखा है. वो उन्हें बहुत याद करती हैं, लेकिन सहन किए हुए दर्द को शब्दों में बयान करना अब भी मुश्किल है.
मानव तस्करी के ख़िलाफ़ जंग
मानव तस्करी के चंगुल से निकले कई लोगों की तरह, मारिया को भी सिर्फ़ अपनी शारीरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरी ज़िन्दगी दोबारा खड़ी करनी पड़ी.
उनके अन्दर के ज़ख़्म आज भी गहरे हैं, और तस्करी से जुड़ा सामाजिक कलंक इस सफ़र को और कठिन बना देता है.
इस दौरान अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने उनका साथ नहीं छोड़ा. उन्हें मानसिक सहारा दिया, सुरक्षित आवास दिलवाया और फिर से ज़िन्दगी शुरू करने के लिए ज़रूरी मदद पहुँचाई.
त्रिनिदाद और टोबैगो में रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट सहायक डेसरी जॉर्डन-विस्की का कहना है, "हम मानव तस्करी के ख़िलाफ़ लगातार काम कर रहे हैं. हमारा संकल्प है कि पीड़ितों को ज़रूरी सहायता दी जाए, और शोषण रोकने व न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख़्त नीतियाँ बनाई जाएँ."
मारिया उन कई महिलाओं में से एक हैं, जिन्हें झूठे वादों के झाँसे में फँसाकर, शोषण की स्थिति में धकेल दिया गया. वह जानती हैं कि आगे लम्बा सफर बाक़ी है, लेकिन वे अपने अतीत से परिभाषित नहीं होना चाहतीं.
उनकी आपबीती मानव तस्करी की बड़ी समस्या पर रौशनी डालती है, जहाँ महिलाएँ और लड़कियाँ सबसे अधिक प्रभावित होती हैं.
मारिया कहती हैं, “मैं जीती जागती सबूत हूँ कि अपनी ज़िन्दगी दोबारा बनाई जा सकती है. समय लगता है, लेकिन यह सम्भव है.”
SDG 8: गरिमापूर्ण कार्य सुनिश्चित करना
जबरन श्रम, आधुनिक दासता और मानव तस्करी को समाप्त करने के लिए तत्काल क़दम उठाएँ.
श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करें और सभी कामगारों के लिए सुरक्षित व संरक्षित वातावरण को बढ़ावा दें.
सबसे कम विकसित देशों में प्रति व्यक्ति आर्थिक विकास और कम से कम 7 प्रतिशत वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि को बनाए रखें.
विविधीकरण, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से आर्थिक उत्पादकता के उच्च स्तर प्राप्त करें.
उपभोग और उत्पादन में वैश्विक संसाधन दक्षता में सुधार करें.
आर्थिक विकास को पर्यावरणीय विनाश से अलग करें.