बांग्लादेश: अतीत के अनुभवों से बेहतर भविष्य के लिए सबक़ सीखें, टर्क
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, बांग्लादेश में एक साल पहले यानि जुलाई 2024 में हुए प्रदर्शनों में शिरकत करने वाले लोगों के साहस और दृढ़ता को याद किया है. उन्होंने अतीत के अनुभवों से, एक बेहतर भविष्य की ख़ातिर सबक़ सीखने का भी आग्रह किया है.
वोल्कर टर्क ने मंगलवार को जारी एक वक्तव्य में कहा है, ‘हम बांग्लादेश के लोगों के साहस और दृढ़ता को याद करते हैं, जिन्होंने एक साल पहले भेदभाव, अन्याय और दमन के ख़िलाफ़ और अपने मौलिक मानवाधिकारों की मांग के लिए, साहसपूर्वक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था.”
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों में अनेक छात्र और युवा भी थे, और पिछले साल बांग्लादेश की यात्रा के दौरान उन्हें उन लोगों से मुलाक़ात करने का मौक़ा मिला था. “मैं उन लोगों की स्मृति का सम्मान करता हूँ जिनकी ज़िन्दगियाँ ख़त्म हो गईं, और उन हज़ारों लोगों का भी सम्मान करता हूँ, जिन्हें ऐसी चोटें लगीं और घाव पहुँचे, जो जीवन भर उनके साथ रहेंगे.”
“वो विरोध प्रदर्शन, अतीत की बढ़ती असमानताओं और मानवाधिकारों के उल्लंघन से दूर हटकर, एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की ओर बढ़ने के दृढ़ संकल्प की एक सशक्त अभिव्यक्ति थे.”
वोल्कर टर्क ने कहा कि बांग्लादेश की अन्तरिम सरकार के मुख्य सलाहकार, प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस ने ‘मेरे कार्यालय से उन घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच का मिशन चलाने का अनुरोध किया था जोकि, एक बेहतर भविष्य के निर्माण के उसी दृढ़ संकल्प को दर्शाता है.”
तथ्य-खोजी मिशन ने अपनी रिपोर्ट में, व्यवस्थित और गम्भीर मानवाधिकार हनन की बात कही है.
रिपोर्ट में पाया गया कि बांग्लादेश की पूर्व सरकार और उसकी सुरक्षा एवं ख़ुफ़िया सेवाएँ, हर क़ीमत पर सत्ता पर क़ाबिज़ रहने के लिए, एक समन्वित रणनीति में सक्रिय थे.
रिपोर्ट में, जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने के लिए, विस्तृत सिफ़ारिशें पेश की गई हैं, जोकि अपने आप में तो आवश्यक हैं ही, और राष्ट्रीय सुधार के लिए भी अत्यन्त आवश्यक हैं.
वोल्कर टर्क ने कहा, “मैं अन्तरिम सरकार से, इन सिफ़ारिशों पर अमल करने के प्रयासों का स्वागत करता हूँ. आज ये समीक्षा करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है कि इन सिफ़ारिशों के अनुरूप नतीजे किस तरह हासिल किए जा सकते हैं.”
जवाबदेही निर्धारित हो
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि सबसे पहले तो मानवाधिकार उल्लंघनों और अपराधों के लिए जवाबदेही निर्धारित होनी चाहिए. “यह जवाबदेही अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून में निहित निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी के अनुरूप होनी चाहिए. इसमें ‘बदले की कार्रवाई से प्रेरित न्याय’ के पिछले चक्रों को नहीं दोहराया जाना चाहिए और किसी को मृत्यु दंड नहीं दिया जाना चाहिए.
दूसरा, राजनैतिक परिवर्तन के दौरान न्याय के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाए जाने की आवश्यकता है, जिसमें सच का पता लगाने और लोगों के साथ अतीत में हुए दुर्व्यवहारों के लिए मुआवज़ा दिया जाना शामिल है. इसकी शुरुआत एक राष्ट्रीय संवाद से होनी चाहिए, जिसमें पीड़ितों, परिवारों और आम नागरिकों को शामिल किया जाए.
तीसरा, बांग्लादेश को क़ानूनी और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है, जिसमें सुरक्षा क्षेत्र भी शामिल है, ताकि ऐसा फिर कभी न हो. उन मानवाधिकार उल्लंघनों को सम्भव बनाने वाले, दमनकारी क़ानूनों और संस्थानों को या तो समाप्त किया जाना चाहिए, या पूरी तरह से नया रूप दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “आज, जब हम उन प्रदर्शनकारियों को याद कर रहे हैं, जिन्होंने देश के एक अलग भविष्य के सपने के लिए अपना जीवन दाव पर लगा दिया, तोयह, मौलिक बदलाव के लिए पुनः प्रतिबद्ध होने का समय है.”
“मेरा कार्यालय उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बांग्लादेश सरकार और जनता का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार है.”