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UNIFIL: भारतीय शान्तिरक्षकों के पशु टीकाकरण से आर्थिक मज़बूती का रास्ता

इस अभियान की शुरुआत 24 जुलाई को गाँव शबाअ में की गई, जहाँ भारतीय पशु चिकित्सा टीम ने 3.3 हज़ार से अधिक जानवरों को टीका लगाया.
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इस अभियान की शुरुआत 24 जुलाई को गाँव शबाअ में की गई, जहाँ भारतीय पशु चिकित्सा टीम ने 3.3 हज़ार से अधिक जानवरों को टीका लगाया.

UNIFIL: भारतीय शान्तिरक्षकों के पशु टीकाकरण से आर्थिक मज़बूती का रास्ता

यूएन मामले

लेबनान में यूएन शान्तिरक्षा मिशन - UNIFIL में तैनात भारतीय शान्तिरक्षकों ने, देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में, मवेशियों को खुरपका और मुँहपका रोग (Foot-and-Mouth Disease) से बचाने के लिए एक महीने लम्बा टीकाकरण अभियान चलाया है. एक महीने तक चलने वाले इस अभियान में 25 हज़ार मवेशियों को टीके लगाए जाएंगे.

खुरपका - मुँहपका रोग (FMD), एक अत्यन्त संक्रामक विषाणु (Virus) जनित रोग है, जो दो खुरों के पैर वाले जानवरों को प्रभावित करता है, जैसे कि गाय, सूअर, भेड़, बकरियाँ और अन्य कई जंगली प्रजातियाँ.

इस अभियान की शुरुआत 24 जुलाई को गाँव शबाअ में की गई, जहाँ भारतीय पशु चिकित्सा टीम ने, 3 हज़ार 300 से अधिक जानवरों को टीका लगाया.

साथ ही, चरवाहों को ज़रूरी दवाएँ और जानकारी से भरी किताबें भी दी गईं, ताकि वे आम पशु-रोगों का सामना और मवेशियों के स्वास्थ्य में सुधार कर सकें.

यह अभियान अक्टूबर से अप्रैल के दौरान, सम्भावित FMD प्रकोप से पहले शुरू किया गया है, ताकि मवेशियों, बकरियों और भेड़ों जैसे खुर वाले जानवरों को पहले से सुरक्षा मिल सके.

चरवाहों को मिला रोज़गार

यह पहल, फरवरी-मार्च 2025 में चलाए गए एक समान अभियान की अगली कड़ी है, जिसका उद्देश्य स्थानीय पशुपालकों की आजीविका और आर्थिक स्थिति को मज़बूत करना है.

भारतीय पशु चिकित्सक लैफ़्टिनेंट कर्नल सुधीर शर्मा कहते हैं, “यह सिर्फ़ टीकाकरण अभियान नहीं है, बल्कि आजीविका को बनाए रखने का एक प्रयास है. FMD ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सबसे विनाशकारी पशु-रोगों में से एक है. हमारा उद्देश्य चरवाहों को मानसिक शान्ति और आर्थिक स्थिरता देना है.”

यह अभियान भारतीय दल की ज़िम्मेदारी वाले लगभग 100 वर्ग किलोमीटर में फैले 15 गाँवों को शामिल करेगा, और आगे चलकर आस-पास के क्षेत्रों में भी चलाया जाएगा.

गाय को गाँवों में एक महत्वपूर्ण कृषि सम्पत्ति माना जाता है, जो धन-धान्य का सूचक तो हैं ही, साथ ही ज़रूरी पोषण के लिए भी अहम है.
© FAO/Lydia Limbe

शिक्षा और जागरूकता की पहल

भारतीय शान्तिरक्षकों ने, इसके अलावा 17 जुलाई को अपने मुख्यालय इब्ल अल-साक़ी में 105 स्कूली बच्चों को आमंत्रित किया, जहाँ “UNP में एक दिन” नाम के एक कार्यक्रम के ज़रिए बच्चों को प्रेरित करना था. 

इस दौरान, एक ग़ैर-सरकारी संगठन के सहयोग से बच्चों को बना फटी विस्फोटक सामग्री (UXO) और बारूदी सुरंगों - IEDs के ख़तरे के बारे में भी जागरूक किया गया, क्योंकि दक्षिणी लेबनान के कई हिस्से युद्ध के बाद अब भी, इन घातक सामग्री से प्रभावित हैं.

UXO और IEDs दोनों ऐसे विस्फोटक होते हैं जो युद्ध या संघर्ष के दौरान इस्तेमाल किए जाते हैं. ये बहुत ख़तरनाक होते हैं क्योंकि ये अनियंत्रित और कभी-कभी छिपे हुए होते हैं.

UNIFIL में तैनात शान्तिरक्षक अपनी मुख्य निगरानी और रिपोर्टिंग ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ, सामुदायिक सहयोग की ऐसी पहलें भी नियमित रूप से करते रहते हैं.