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ग़ाज़ा में व्यापक भुखमरी, अकाल के लिए भी भयावह हालात के बढ़ते सबूत

एक गम्भीर रूप से कुपोषित छोटी बच्ची को उसके कपड़े पहनाने में मदद की जा रही है.
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एक गम्भीर रूप से कुपोषित छोटी बच्ची को उसके कपड़े पहनाने में मदद की जा रही है.

ग़ाज़ा में व्यापक भुखमरी, अकाल के लिए भी भयावह हालात के बढ़ते सबूत

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र समर्थित खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ‘ग़ाज़ा में इस समय व्यापक भुखमरी और अकाल के लिए सबसे भयावह हालात नज़र आ रहे हैं.’ यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ग़ाज़ा में निरन्तर जारी युद्ध में, बड़े पैमाने पर विस्थापन हो रहा है और बुनियादी सेवाओं का ढाँचा लगभग पूरी तरह तबाह हो चुका है. ऐसे हालात में कार्रवाई की गम्भीर अपील भी की गई है.

एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) मंच के अनुसार, ग़ाज़ा के अधिकतर हिस्सों में अकाल के तीन में से दो मानक देखे जा चुके हैं, वो हैं - लोगों को भरपेट मिलने वाले भोजन में बहुत तेज़ी से कमी, यानि भोजन का बहुत कम सेवन व अत्यन्त गम्भीर कुपोषण.

मगर अभी तक अकाल की घोषणा इसलिए नहीं की गई है क्योंकि, इसके लिए तीसरी शर्त यानि कुपोषण से मृत्यु होने की पुष्टि नहीं हुई है.

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IPC की रिपोर्ट के मुताबिक़, लगातार मिल रहे सबूत दिखा रहे हैं कि भूख, कुपोषण और बीमारियों के कारण अब भुखमरी से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)) के आपात निदेशक रॉस स्मिथ ने जिनीवा में बताया, "यह एक स्पष्ट त्रासदी है, जो हमारी आँखों के सामने और टीवी स्क्रीन पर साफ़ दिख रही है. यह कोई चेतावनी नहीं है - यह कार्रवाई की एक पुकार है. इस सदी में हमने ऐसा कभी नहीं देखा है."

कई दिनों तक, भोजन के बिना

चेतावनी का सन्दर्भ बेहद गम्भीर है: IPC के अनुसार, हर तीन में से एक व्यक्ति अब कई दिनों तक बिना भोजन खाए रह रहे हैं.

अस्पतालों पर भारी दबाव है, और अप्रैल से अब तक 20 हज़ार से अधिक बच्चों का तीव्र कुपोषण के लिए इलाज किया गया है.

जुलाई के मध्य से अब तक पाँच साल से कम उम्र के कम से कम 16 बच्चों की मौत, भूख से जुड़ी वजहों से हो चुकी है.

यह चेतावनी मई 2025 की IPC रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें अनुमान लगाया गया था कि सितम्बर तक, ग़ाज़ा की पूरी आबादी भयावह खाद्य असुरक्षा के स्तर पर पहुँच सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, कम से कम 5 लाख लोग IPC चरण 5 (आपदा) में पहुँच सकते हैं, जिसका अर्थ होता है – भुखमरी, बेबसी और मृत्यु.

यह संकट लगभग दो वर्षों से जारी उस युद्ध से उत्पन्न हुआ है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इसराइल पर किए गए आतंकी हमलों से हुई थी, जिनमें लगभग 1,250 लोग मारे गए और लगभग 450 लोगों को बन्धक बना लिया गया था.

इसके बाद के भीषण युद्ध में, ग़ाज़ा की स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, अब तक 59 हज़ार 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, और ग़ाज़ा का 70 प्रतिशत बुनियादी ढाँचा नष्ट हो गया है.

IPC मूल्यांकन ने, राहत एजेंसियों की पहले से जताई जा रही चिन्ताओं को दोहराते हुए पुष्टि की है कि बहुत बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हो रहा है, और अब पूरे क्षेत्र का मात्र 12 प्रतिशत हिस्सा ही सुरक्षित बचा है.

युद्धविराम अभी हो

ग़ाज़ा की आबादी क़रीब 21 लाख है, और उनमें से 90% से ज़्यादा लोग, लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से बहुत से लोग अनेक बार-बार बेघर हुए हैं.

इसराइल द्वारा 18 मार्च को युद्धविराम ख़त्म कर दिए जाने के बाद से अब तक 7 लाख 60 हज़ार अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं.

मानवीय सहायता पहुँचाना अब भी बहुत मुश्किल है - राहत सामग्री से भरे ट्रकों को अक्सर रोक दिया जाता है या लूट लिया जाता है. इसराइल ने रविवार को ऐलान किया कि वह ग़ाज़ा में हर दिन कुछ समय के लिए राहत पहुँचाने की अनुमति देगा.

ख़बरों के अनुसार, 100 से ज़्यादा ट्रक रविवार को ग़ाज़ा में दाखिल हुए, लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अब भी ग़ाज़ा को बड़ी मात्रा में भोजन, ईंधन और दवाइयाँ भेजे जाने की ज़रूरत है.

 IPC मंच ने भी, दुनिया भर से युद्ध रोकने की अपीलों के बीच,तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम लागू किए जाने, मदद पहुँचाने की पूरी आज़ादी, और ज़रूरी सेवाओं की बहाली की मांग की है. 

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर जल्दी मदद नहीं पहुँची, तो भारी संख्या में लोगों की मौतें हो सकती हैं.

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने नागरिकों, मानवीय कर्मियों, और स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, सड़कों और संचार जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.

मुख्य बिन्दु

  • अकाल की पुष्टि, तीन तरह के स्तरों के बाद की जाती है जिसमें - आबादी को मिलने वाले भोजन में तेज़ी से गिरावट, अत्यन्त गम्भीर कुपोषण और भुखमरी से होने वाली मौतें. ग़ाज़ा में मौजूदा हालात के कारण सटीक आँकड़े एकत्र करना कठिन है.
  • बच्चों पर संकट: 20 हज़ार से अधिक बच्चों का तीव्र कुपोषण के लिए इलाज किया गया; 16 बच्चों की मौत दर्ज.
  • बुनियादी ढाँचे का पतन: ग़ाज़ा का 70 प्रतिशत बुनियादी ढाँचा नष्ट हो चुका है.
  • विस्थापन संकट: अब सुरक्षित क्षेत्र ग़ाज़ा पट्टी के केवल 12 प्रतिशत हिस्से तक सीमित रह गए हैं.