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'इसराइल-फ़लस्तीन टकराव घातक मोड़ पर, दो-राष्ट्र समाधान पर और देरी नहीं हो'

ग़ाज़ा पट्टी में एक घर के मलबे पर बैठा युवक. ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी में भीषण तबाही हुई है.
© UNICEF/Mohammed Nateel
ग़ाज़ा पट्टी में एक घर के मलबे पर बैठा युवक. ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी में भीषण तबाही हुई है.

'इसराइल-फ़लस्तीन टकराव घातक मोड़ पर, दो-राष्ट्र समाधान पर और देरी नहीं हो'

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि इसराइल-फ़लस्तीन टकराव एक चरम बिन्दु पर पहुँच गया है, और उन्होंने, दो-राष्ट्र समाधान को बचाने व शान्ति प्रयासों को व्यवस्थित रूप से ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोकने के लिए, साहसिक राजनैतिक कार्रवाई की पुकार लगाई है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने, फ़लस्तीन के प्रश्न के शान्तिपूर्ण समाधान और दो-राष्ट्र की स्थापना के हल पर अमल किए जाने के मुद्दे पर सोमवार को शुरू हुए तीन दिवसीय उच्च-स्तरीय सम्मेलन में यह चेतावनी दी है.

उन्होंने, एक ऐसे टकराव की स्पष्ट तस्वीर पेश की जो "(लोगों की) ज़िन्दगियाँ छीन रहा है, भविष्य को नष्ट कर रहा है, और इस क्षेत्र व हमारी दुनिया को अस्थिर कर रहा है."

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, "हम जानते हैं कि इसराइल-फ़लस्तीन टकराव पीढ़ियों से चला आ रहा है - आशाओं को धूमिल करते हुए, कूटनीति की अनदेखी करते हुए, अनगिनत प्रस्तावों को नज़रअन्दाज़ करते हुए, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून को धता बताते हुए."

"लेकिन हम यह भी जानते हैं कि ऐसा भी नहीं है कि इस स्थिति या टकराव के जारी रहने को टाला नहीं जा सके. इसे (टकराव को) सुलझाया जा सकता है. इसके लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति और साहसी नेतृत्व की आवश्यकता है. और यह सत्य की मांग करता है."

"सत्य यह है: हम एक गहन गतिरोध के पड़ाव पर हैं. दो-राष्ट्र समाधान पहले से कहीं अधिक दूर है."

यूएन महासचिव ने 7 अक्टूबर को इसराइल पर हमास के हमलों और सैकड़ों लोगों को बन्धक बनाए जाने को, आतंकवादी कृत्य बताते हुए एक बार फिर उनकी निन्दा की. यूएन प्रमुख उन हमलों की "बार-बार निन्दा" कर चुके हैं.

साथ ही, उन्होंने कहा, "दुनिया की आँखों के सामने, ग़ाज़ा के विनाश को, किसी भी आधार उचित नहीं ठहराया जा सकता."

एंतोनियो गुटेरेश ने, आम फ़लस्तीनियों को भुखमरी की तरफ़ धकेल जाने, हज़ारों लोगों की हत्या, बड़े पैमाने पर विस्थापन,  यहूदी बाशिन्दों की हिंसा और इसराइल के क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट को, "धीरे-धीरे {इसराइल में} विलय" के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई - जिसे उन्होंने "अवैध" बताया.

ग़ाज़ा में हाल के कुछ महीनों के दौरान, खाद्य सहायता वितरण के लिए इन्तेज़ार करने के दौरान, गोलीबारी व हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.
© UNICEF/Eyad El Baba

दो-देश समाधान को कमज़ोर करना बन्द करें

यूएन प्रमुख ने अपनी बात पुरज़ोर तरीक़े से रकते हुए कहा, "दो-देश समाधान को हमेशा के लिए कमज़ोर करने वाली इकतरफ़ा कार्रवाइयाँ, अस्वीकार्य हैं और इन्हें रोका जाना होगा."

"ये कोई अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं. ये एक व्यवस्थित वास्तविकता का हिस्सा हैं जो मध्य पूर्व में शान्ति की नींव को तितर-बितर कर रही है."

इस तीन दिवसीय सम्मेलन को यूएन महासभा के प्रस्ताव ES-10/24 और 79/81 के माध्यम से अधिकृत किया गया है और इसके सह-आयोजक फ्रांस व सऊदी अरब हैं.

इस सम्मेलन में फ़लस्तीनी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था, मानवीय आवश्यकताओं, पुनर्निर्माण और भावी फ़लस्तीनी देश की आर्थिक व्यवहार्यता जैसे मुद्दों पर, पूर्ण सत्र और गोलमेज़ बैठकें शामिल हैं.

'लुभावनी बयानबाज़ी' से आगे बढ़ें

एंतोनियो गुटेरेश ने, सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे इस आयोजन को केवल "लुभावनी बयानबाज़ी का एक और प्रयास" नहीं बनने दें.

उन्होंने कहा, "यह (सम्मेलन) एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है और होना भी चाहिए - एक ऐसा मोड़ जो {इसराइली} क़ब्ज़े को समाप्त करने और एक व्यवहार्य दो-देश समाधान की हमारी साझा आकांक्षा को साकार करने की दिशा में ऐसी प्रगति स्थापित करे, जिसे पलटा नहीं जा सके."

महासचिव ने, संयुक्त राष्ट्र के दीर्घकालिक रुख़ को दोहराते हुए कहा कि दो-देश समाधान ही शान्ति का एकमात्र व्यवहार्य मार्ग है - जिसमें इसराइल और फ़लस्तीन, 1967 से पहले की सीमाओं पर आधारित सुरक्षित, मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर साथ-साथ रहेंगे, और येरूशेलम, दोनों देशों की राजधानी होगी.

उन्होंने अन्त में कहा, "यह (दो-देश समाधान) व्यापक मध्य पूर्व क्षेत्र में शान्ति के लिए एक अनिवार्य शर्त है.

ग़ाज़ा पट्टी में एक घर के मलबे पर बैठा युवक. ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी में भीषण तबाही हुई है.
© UNICEF/Mohammed Nateel