भूख को 'युद्ध का हथियार' नहीं बनने दिया जा सकता, एंतोनियो गुटेरेश
ग़ाज़ा में युद्ध की वजह से भुखमरी का संकट गहराता जा रहा है. इसी बीच संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सोमवार को एक बार फिर आगाह किया कि इसराइल द्वारा 'एक सप्ताह के लिए सहायता बढ़ाने' का निर्णय, घातक कुपोषण के स्तर से निकलने के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है.
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि युद्धजनित भूख, ग़ाज़ा से सूडान और उससे भी आगे तक फैल रही है.
महासचिव ने कहा, "भूख अस्थिरता को बढ़ावा देती है और शान्ति की नींव कमज़ोर करती है. हम भूख को कभी भी युद्ध के एक हथियार के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते.”
उन्होंने यह बात अद्दीस अबाबा में आयोजित, यूएन खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन को भेजे एक वीडियो सन्देश में कही.
भूख से तड़पते बच्चे
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम कर रही संयुक्त राष्ट्र एजेंसी, UNRWA ने, अब भी भूख से बच्चों की मौतों पर गहरी चिन्ता जताई है.
UNRWA ने उम्मीद जताई कि उन्हें इसराइल की ओर से अनुमति मिलेगी, ताकि वह ग़ाज़ा में हज़ारों ट्रकों के ज़रिए भोजन, दवाइयों और स्वच्छता से जुड़ी ज़रूरी सामग्री पहुँचा सके.
UNRWA ने बताया कि ये ट्रक, फ़िलहाल जॉर्डन और मिस्र में खड़े हैं और इसराइल की हरी झंडी का इन्तज़ार कर रहे हैं.
एजेंसी ने यह भी कहा कि हर दिन कम से कम 500 से 600 सहायता ट्रकों का ग़ाज़ा पहुँचना बेहद ज़रूरी है, ताकि और लोगों को भुखमरी से मौत के मुँह में जाने से बचाया जा सके.
UNRWA के मुताबिक, ग़ाज़ा में अब तक 100 से ज़्यादा लोग भुखमरी से दम तोड़ चुके हैं, जबकि स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ़ इसी महीने कुपोषण से 40 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
यूएन एजेंसी ने ज़ोर देते हुए कहा, "ग़ाज़ा की सभी सीमा चौकियों को खोलना और वहाँ बड़े स्तर पर मानवीय सहायता पहुँचाना ही एकमात्र रास्ता है, जिससे वहाँ गहराते भुखमरी संकट को रोका जा सकता है."
मानवीय राहत के लिए विराम
UNRWA का यह वक्तव्य उस बड़ी नीति बदलाव के बाद आया है, जिसमें इसराइल ने सप्ताहान्त में ऐलान किया कि वह हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक, उन इलाक़ों में मानवीय राहत के लिए अस्थाई विराम दिया जाए, जहाँ उनके सैन्य बल सक्रिय नहीं हैं.
UNRWA ने बताया है कि 2 मार्च को इसराइल द्वारा लगभग पूर्ण नाकाबन्दी लागू किए जाने के बाद से, ग़ाज़ा में बच्चों में कुपोषण तेज़ी से बढ़ा है.
इसराइली अधिकारियों की तरफ़ से मुहैया कराए गए एक मानचित्र के अनुसार, यह मानवीय विराम, ग़ाज़ा के एक संकीर्ण क्षेत्र पर लागू होता है, जिसमें दक्षिण-पश्चिम में अल-मवासी, मध्य में डेयर अल-बलाह और उत्तर में ग़ाज़ा सिटी शामिल हैं.
रविवार को, कैरेम शेलॉम सीमा चौकी से, सहायता सामग्री से भरे 100 से अधिक ट्रकों का एक क़ाफ़िला ग़ाज़ा पट्टी में दाख़िल हुआ.
तुरन्त सहायता की दरकार
संयुक्त राष्ट्र सहायता समन्वय कार्यालय - OCHA ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए, ग़ाज़ा में ज़मीनी ज़रूरतों के भयानक स्तर को उजागर किया.
संयुक्त राष्ट्र के आपात राहत प्रमुख और OCHA के प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने कहा कि हर तीन में से एक व्यक्ति “कई दिनों से भूखे हैं."
उन्होंने बताया, “लोग सिर्फ़ अपने परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करते हुए गोलीबारी का सामना कर रहे हैं. बच्चे कुपोषण से धीरे-धीरे कमज़ोर हो रहे हैं. हमें अभी वहाँ धरातल पर यही हालात देखने को मिल रहे हैं."
प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने अपने बयान में सहायता के मामले में हुई "प्रगति" को स्वीकार किया, लेकिन यह भी ज़ोर दिया कि "भुखमरी और विनाशकारी स्वास्थ्य संकट को टालने के लिए बड़ी मात्रा में सहायता की आवश्यकता है."
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ और मानवीय समुदाय “यथासम्भव ज़िन्दगियाँ बचाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं.”
इसराइल द्वारा ग़ाज़ा में अस्थाई रूप से सहायता बढ़ाने के अलावा, मिस्र से आने वाले भोजन, दवाइयों और ईंधन पर लगी सीमा शुल्क प्रतिबन्ध को भी कथित तौर पर हटा दिया गया है.
साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय क़ाफ़िलों के लिए सुरक्षित मार्ग भी तय किए गए हैं.
प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने कहा, “हमें निरन्तर और तेज़ कार्रवाई की ज़रूरत है, जिसमें सीमा पार करने वाले क़ाफ़िलों के लिए तुरन्त अनुमति और ग़ाज़ा में सहायता सामग्री का तेज़ी से वितरण शामिल है.”
दो-राष्ट्र समाधान पर बैठक
न्यूयॉर्क में फ़्राँस और सऊदी अरब ने सोमवार को, इसराइल और फ़लस्तीनी लोगों के बीच दो-राष्ट्र समाधान को आगे बढ़ाने के लिए एक नई कूटनैतिक पहल शुरू की.
सितम्बर में, फ़्राँस औपचारिक रूप से फ़लस्तीन को एक देश के रूप में आधिकारिक मान्यता देने वाला G7 देशों में पहला देश बनेगा.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 1947 के प्रस्ताव ने ब्रिटिश शासनाधीन फ़लस्तीनी क्षेत्र को दो स्वतंत्र देशों, एक यहूदी और दूसरा अरब, में विभाजित करने की रूपरेखा बनाई थी. इसके बाद 1948 में इसराइल देश की घोषणा हुई थी.