केवल बम ही नहीं, भुखमरी भी लील रही है फ़लस्तीनियों की ज़िन्दगियाँ
फ़लस्तीनियों के लिए यूएन राहत एजेंसी (UNRWA) के महाआयुक्त फ़िलिपे लज़ारिनी ने ग़ाज़ा में फ़लस्तीनियों के भीषण हालात के बारे में जानकारी देते हुए यह बात कही है, जिसने उनके अनुसार, उनके एक कर्मचारी ने इन्हीं शब्दों में बयान किया.
फ़िलिपे लज़ारिनी ने, ग़ाज़ा पट्टी में बच्चों और वयस्कों में बढ़ते गम्भीर कुपोषण के बीच, एक ट्वीट सन्देश में कहा, “जब बच्चों में कुपोषण बढ़ता है, तो सहनशक्ति कमज़ोर हो जाती है, भोजन और देखभाल तक पहुँच समाप्त हो जाती है, और भुखमरी धीरे-धीरे अपनी जकड़ बढ़ाने लगती है.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेब्रेयेसस ने, ग़ाज़ा में लगातार बमबारी के हालात में कहा कि केवल बम ही नहीं, भुखमरी भी फ़लस्तीनियों की जान ले रही है.
नवीन जानकारी के अनुसार, कम से कम 100 लोगों की मौत भूख से हुई है.
WHO ने पाँच साल से कम उम्र के क़रीब 21 बच्चों की, कुपोषण से मौत दर्ज की है.
हर 5 में से एक बच्चा कुपोषित
UNRWA प्रमुख के मुताबिक़, ग़ाज़ा सिटी के हर पाँच में से एक बच्चा कुपोषित है. मानवतावादी सहायता बाधित होने की वजह से यह सँख्या हर दिन बढ़ रही है. इन बच्चों को तुरन्त तत्काल इलाज के ज़रूरत है, लेकिन संसाधन कम हैं.
ग़ाज़ा पट्टी में, मार्च के शुरू से मई के मध्य तक, लगातार 80 दिनों तक कोई भी मदद नहीं पहुँचाई गई, जिससे वहाँ की आबादी भुखमरी के कगार पर पहुँच गई.
हालाँकि बाद में थोड़ी बहुत मदद आई है, लेकिन महानिदेशक टेड्रॉस ने कहा कि यह पर्याप्त नहीं है.
सुरक्षित ठिकाने अब सुरक्षित नहीं रहे
महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ने बताया कि ग़ाज़ा में, 27 मई से 21 जुलाई के बीच, भोजन पाने की कोशिश करते हुए, 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं.
इनमें से अनेक लोग ग़ाज़ा मानवतावादी संस्था (GHF) द्वारा संचालित स्थानों के आसपास मारे गए.
GHF, एक अमेरिकी संचालित और इसराइली समर्थित सहायता वितरण संगठन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र, कई बार अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों के उल्लंघन के लिए चेतावनी दे चुका है.
WHO प्रमुख ने कहा कि बच्चे भूख से रोते हैं. खाद्य वितरण स्थल अब हिंसा के केन्द्र बन गए हैं. अस्पताल, जो सुरक्षित ठिकाने होने चाहिए थे, लगातार हमलों का निशाना बन रहे हैं और कई अस्पताल तो पूरी तरह बन्द हो गए हैं.
यूएन कर्मचारियों भी निशाना
उन्होंने बताया कि हाल ही में एक WHO कर्मचारी आवास और मानवीय स्थल पर हमला हुआ, जिसमें पुरुष कर्मचारियों को परेशान किया गया, महिलाओं और बच्चों को हिंसा के बीच पैदल भागना पड़ा, और एक WHO कर्मचारी को हिरासत तक में लिया गया.
“इसके बावजूद WHO और अन्य यूएन एजेंसियाँ ग़ाज़ा में बनी हुई हैं. हमारी प्रतिबद्धता मज़बूत है. यूएन एजेंसियों को युद्ध क्षेत्रों में काम करते हुए सुरक्षा मिलनी चाहिए.”
UNRWA के कमिश्नर-जनरल फ़िलिपे लज़ारिनी ने बताया कि ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी लोगों के साथ-साथ, मानवीय सहायता कर्मचारी भी खाद्य सामग्री की लगातार कमी के कारण कमज़ोर हो रहे हैं.
UNRWA के अधिकांश कर्मचारी हर दिन केवल दाल का एक कटोरा भोजन कर पाते हैं, जिससे कई लोग तो, काम के दौरान भूख से बेहोश हो जाते हैं.
उन्होंने कहा कि जब देखभाल करने वाले कर्मी, ख़ुद भूखे रहते हैं, तो पूरी मानवीय सहायता व्यवस्था टूट रही है.
UNRWA के पास जॉर्डन और मिस्र में 6 हज़ार ट्रक ज़रूरी मदद सामग्री मौजूद है, जिसे तुरन्त ग़ाज़ा भेजा जाना चाहिए. मानवीय सहायता बिना रोक-टोक पहुँचनी चाहिए