HLPF: संयुक्त राष्ट्र मंच की सतत विकास के लिए मज़बूत प्रतिबद्धता
सतत विकास पर उच्च स्तरीय राजनैतिक मंच (HLPF) बुधवार को समाप्त हो गया, जिसमें एक सप्ताह से अधिक समय तक, टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति को बेहतर बनाने के मुद्दे पर, सदस्य देशों, नागरिक समाज और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के बीच ठोस चर्चा हुई.
सम्मेलन के अन्त में सदस्य देशों ने एक मंत्री स्तरीय घोषणा-पत्र स्वीकृत किया, जिसे 154-2-2 के वोट से पारित किया गया.
अमेरिका और इसराइल ने इसके ख़िलाफ़ मतदान किया, जबकि परागुए और ईरान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
घोषणा में कहा गया: “हम 2030 एजेंडा को प्रभावी रूप से लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से दोहराते हैं…यह हमारे सामने मौजूद कई संकटों से उबरने और सतत विकास प्राप्त करने के लिए हमारी समग्र दिशारेखा है.”
HLPF के 15 साल
उच्च स्तरीय राजनैतिक मंच (HLPF), वर्ष 2010 से, हर साल आयोजित हो रहा है. इसे संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC), 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति या उसकी कमी पर चर्चा करने के लिए आयोजित करती है.
ये लक्ष्य 2015 में 2030 विकास एजेंडा के तहत अपनाए गए थे, जिनका उद्देश्य एक अधिक समान और समावेशी दुनिया बनाना है.
इस वर्ष के मंच में पाँच लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया गया: बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण, लैंगिक समानता, सम्मानजनक कार्य और आर्थिक वृद्धि, जल के नीचे जीवन और वैश्विक साझेदारियाँ.
चेकिया और सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइंस के प्रतिनिधियों ने मंत्री स्तरीय दस्तावेज़ को लेकर बातचीत की अगुवाई की. उन्होंने इस चर्चा को बेहद महत्वपूर्ण बताया.
चेकिया के स्थाई प्रतिनिधि और घोषणापत्र के एक प्रमुख संयोजक जैकुब कुलहानेक ने कहा, "इस वर्ष की चर्चाएँ ख़ास मायने रखती हैं. 2030 एजेंडा को अपनाए जाने के दस साल बाद भी, आपस में गुँथी हुईं और लगातार बनी रहने वाली अनेक चुनौतियाँ, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की पूर्ण प्राप्ति को अब भी ख़तरे में डाल रही हैं."
कहीं देर न हो जाए…
सदस्य देशों ने मंत्रिस्तरीय घोषणा में कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने का समय तेज़ी से निकलता जा रहा है, और ये लक्ष्य अब भी काफ़ी हद तक पटरी से उतरे हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 18 प्रतिशत लक्ष्य ही 2030 तक हासिल होने की दिशा में हैं, जबकि आधे से ज़्यादा लक्ष्यों में प्रगति बहुत धीमी है.
मंत्रिस्तरीय घोषणा में प्रमुख रूप से चर्चा किए गए पाँच सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का ज़िक्र किया गया, मगर सदस्य देशों ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि ग़रीबी, सतत विकास में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है.
साथ ही, जलवायु संकट लगातार गम्भीर होता जा रहा है, जिससे विकास एजेंडे के हर पहलू को ख़तरा है.
घोषणा में, इन दोनों समस्याओं को “दुनिया की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों” में से एक बताया गया है.
SDG 16, शान्ति को बढ़ावा देने में सरकारों जैसे संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करता है... उसके तहत सदस्य देशों ने यह स्वीकार किया कि विकास से पहले शान्ति सुनिश्चित करने के लिए, मज़बूत शासन व्यवस्था और साझेदारी अनिवार्य है.
घोषणा में कहा गया, “हम मानते हैं कि सतत विकास, शान्ति और सुरक्षा के बिना सम्भव नहीं है, और शान्ति व सुरक्षा सतत विकास के बिना ख़तरे में भी पड़ सकती है.”
कार्य योजना
सदस्य देशों ने बहुपक्षवाद (multilateralism) को लेकर जारी चुनौतियों के बीच कहा कि यह घोषणा, संयुक्त राष्ट्र की बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि है, जो इस वर्ष अपनी 80वीं वर्षगाँठ मना रहा है.
जैकुब कुलहानेक ने कहा, "ऐसे समय में जब बहुपक्षवाद के भविष्य को लेकर गम्भीर सन्देह बने हुए हैं, आपकी अडिग प्रतिबद्धता न केवल आश्वस्त करने वाली रही है, बल्कि प्रेरणादायक भी."
सदस्य देशों ने घोषणा में सतत विकास लक्ष्यों को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए प्रतिबद्धता जताई, ताकि एक बेहतर दुनिया बनाई जा सके.
उन्होंने कहा, “हम लोगों, पृथ्वी, समृद्धि, शान्ति और साझेदारी के लिए, इस योजना की दृष्टि को तुरन्त लागू करने के लिए कार्य करेंगे, जिससे कोई भी पीछे नहीं छूट जाए.”