बद से बदतर होते ग़ाज़ा संकट पर चर्चा के लिए, सुरक्षा परिषद की विशेष बैठक
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने, ग़ाज़ा में बद से बदतर होते हालात के बीच, मध्य पूर्व की अत्यन्त गम्भीर स्थिति पर चर्चा करने के लिए आज तिमाही विशेष बैठक की है जिसमें स्थिति पर खुली चर्चा हुई, जिसमें ग़ाज़ा में बढ़ते मानवीय संकट पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है.
युद्ध से तबाह ग़ाज़ा पट्टी में खाद्य आपूर्ति और वितरण पर इसराइल के गम्भीर प्रतिबन्ध, कुपोषण में बढ़ोत्तरी, और ईंधन व आश्रय की भारी कमी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है.
मध्य पूर्व, एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव ख़ालेद ख़ियारी ने कहा है कि एक सम्भावित युद्धविराम और बन्धकों की रिहाई को लेकर, जहाँ ग़ाज़ा पर गहन बातचीत जारी है, वहीं ज़मीनी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सैन्य अभियान और हिंसा पूरे क्षेत्र में फैलती जा रही है. हर घंटे मानवीय क्षति बढ़ रही है. उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा, "यह ऐतिहासिक स्तर का भयावह संकट अब तुरन्त समाप्त होना चाहिए."
डेयर अल-बलाह में इसराइली सैन्य अभियानों की तीव्रता ने हालात को और बदतर बना दिया है.
इसराइली कार्रवाइयों की वजह से बड़ी सँख्या में फ़लस्तीनी लोगों को फिर से विस्थापन झेलना पड़ा है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र के दो गेस्टहाउस पर इसराइल के सीधे हमलों ने, मानवीय राहत कार्यों को भी गम्भीर रूप से प्रभावित किया है.
महासचिव, ख़ालेद ख़ियारी ने बताया कि ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 30 जून को उनकी पिछली जानकारी के बाद से अब तक कम से कम 1 हज़ार 891 फ़लस्तीनी लोा मारे जा चुके हैं.
इनमें लगभग 294 लोग उस समय मारे गए जब वो अपने लिए खाद्य सामग्री हासिल करने की कोशिश कर रहे थे. इनमें से कई लोग अनेक सैन्यीकृत सहायता वितरण स्थलों के आसपास मारे गए.
इसराइली बलों ने लगातार नए बेदख़ली आदेश जारी किए हैं, जिससे स्थानीय आबादी को बार-बार बेघर होना पड़ रहा है.
'इसराइल ने सब कुछ तबाह कर दिया'
संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन के स्थाई पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने कहा कि चार वर्षीय बच्ची रज़ान ने, अपनी पूरी हिम्मत के साथ, जीवन के लिए संघर्ष किया, लेकिन कुपोषण के कारण उसका साहस जवाब दे गया और रविवार को उस बेचारी की मौत हो गई.
वहीं छह सप्ताह की उम्र के यूसुफ़ की गत सोमवार को भुखमरी के कारण मौत हो गई. वह उन 15 लोगों में शामिल था, जो पिछले 24 घंटों में, ग़ाज़ा में भोजन नहीं मिलने के कारण मौत की ख़ुराक बन गए.
रियाद मंसूर ने कहा, “इसराइल ने सब कुछ तबाह कर दिया है, लोगों की ज़िन्दगियाँ, उनके घर, मस्जिदें और चर्च, स्कूल और अस्पताल, जीवन का पूरी बुनियादी ढाँचा, यहाँ तक कि क़ब्रिस्तान भी…”
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “मगर समझने में कोई ग़लती नहीं करें, असली निशाना वे 20 लाख फ़लस्तीनी हैं, जो अब भी ग़ाज़ा में मौजूद हैं. इसराइल के लिए, इस ज़मीन पर क़ब्ज़ा जमाने की योजना में, उन लोगों की तबाही ज़रूरी है.”
उन्होंने कहा कि इस महीने के अन्त में सऊदी अरब और फ़्राँस द्वारा आयोजित किया जाने वाला अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और वैश्विक सहमति को एक लागू की जा सकने वाली में बदलने के लिए एक अवसर प्रदान करेगा.
साथ ही यह सम्मेलन, इसराइल के क़ब्ज़े एवं युद्ध को हमेशा के लिए ख़त्म करने का इरादा भी दिखाएगा.
संयुक्त राष्ट्र की आलोचना
संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के स्थाई प्रतिनिधि डैनी डैनॉन ने कहा, "इसराइल उन सभी के लिए मध्य पूर्व को सुरक्षित बना रहा है जो शान्ति और स्थिरता को महत्व देते हैं. दूसरे शब्दों में, हम संयुक्त राष्ट्र का काम कर रहे हैं, जबकि इसराइल आतंकवादियों के नैटवर्क को समाप्त करके मासूमों की जान बचा रहा है."
उन्होंने सवाल किया, "संयुक्त राष्ट्र क्या करता है?"
इसराइली प्रतिनिधि डैनॉन ने कहा कि यूएन अपने राजनैतिक एजेंडी पर अड़ा रहता है, अपने पक्षपात की हिंमायत करता है और उन एजेंसियों का बचाव करता है, जिन्होंने लम्बे समय से निष्पक्षता को छोड़ दिया है.
उन्होंने, साथ ही संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्य समन्वय कार्यालय - OCHA की भी आलोचना की.
डैनी डैनन ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा तैयार किए गए आँकड़ों का ज़िक्र किया, जिनमें हताहत हुए आम लोगों और ग़ाज़ा में भोजन तथा दवाइयाँ पहुँचाने वाले ट्रकों की संख्या शामिल है.
उन्होंने इन आँकड़ों को "वास्तविकता को ग़लत तरीके़ से पेश करने वाले" बताया और कहा कि इसलिए इसराइल के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.
उन्होंने कहा कि OCHA के सैकड़ों कर्मचारियों की सुरक्षा जाँच की जा रही है, और प्रमुख कर्मचारियों के परमिट नवीनीकरण को “हमास के साथ मज़बूत सम्बन्धों के स्पष्ट सबूतों” के कारण अस्वीकार किया जाएगा.
प्रतिनिधि डैनन ने कहा कि क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्रों में OCHA के प्रमुख का वीज़ा नवीनीकरण नहीं किया जाएगा और उन्हें 29 जुलाई तक देश छोड़ना होगा.
उन्होंने कहा, "दोहरे मानदंड, पक्षपात और इसराइल देश को बदनाम करने के लगातार अभियान के लेकर अब संयम समाप्त हो रहा है."