भारत समेत दुनियाभर के युवजन ने बुलन्द की स्वच्छ ऊर्जा की माँग
जलवायु कार्रवाई के एक निर्णायक मोड़ पर, दुनिया के 45 से अधिक देशों के युवाओं ने एकजुट होकर यह सन्देश दिया कि अब जीवाश्म ईंधनों से आगे बढ़कर स्वच्छ, समावेशी और न्यायसंगत ऊर्जा बदलाव का समय आ गया है. यह वैश्विक आहवान, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की उस चेतावनी के जवाब में था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जीवाश्म ईंधन का युग समाप्ति की ओर है -और अब स्वच्छ ऊर्जा को निर्णायक गति देने की ज़रूरत है.
यह वैश्विक आयोजन, विभिन्न देशों में कार्यरत यूएन की देशीय टीमों और स्थानीय प्रतिनिधियों के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने महासचिव के जलवायु भाषण को ऊर्जा न्याय, आर्थिक गरिमा और एक रहने योग्य ग्रह जैसे अपने स्थानीय संघर्षों से जोड़ते हुए साझा आवाज़ उठाई.
अफ़्रीका के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर द्वीपीय राष्ट्रों और दिल्ली तथा जोहनसबर्ग जैसे महानगरों तक, युवजन ने एक टिकाऊ एवं न्यायसंगत ऊर्जा भविष्य के लिए अपने साहसिक विचारों और अपेक्षाओं को को मुखरता से सामने रखा.
भारत में सशक्त युवा संवाद
भारत में, संयुक्त राष्ट्र रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प के नेतृत्व में, यूएन टीम और जलवायु परिवर्तन पर कार्यरत विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऊर्जावान और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया.
इस अवसर पर युवा कार्यकर्ताओं, जलवायु संगठनों के प्रतिनिधियों, नीति विशेषज्ञों और निजी क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया.
कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासचिव के भाषण के सीधे प्रसारण से हुई, जिसके बाद एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई. इस चर्चा में यह विमर्श किया गया कि भारत के युवजन, किस तरह नवाचार एवं नेतृत्व के ज़रिए स्थानीय स्तर पर ठोस बदलाव ला सकते हैं.
भारत में, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) से जुड़े युवा कार्यकर्ता मनन सिंह ने कहा, हम केवल जलवायु लक्ष्य तय नहीं कर रहे - हम एक नया सामान्य मानदंड स्थापित कर रहे हैं.”
वहीं, यूनीसेफ़ की जलवायु फ़ैलो हिना सैफ़ी ने कहा, “यह कोई परियोजना नहीं — यह रोज़मर्रा की ज़रूरत है.”
वक्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता, शिक्षा और युवजन को सक्षम बनाने में निवेश सबसे ज़रूरी क़दम है.
दक्षिण अफ़्रीका से लेकर बेलीज़ तक: वैश्विक स्तर पर उठती आवाज़ें
यह वैश्विक आयोजन दक्षिण अफ़्रीका से शुरू हुआ, जहाँ युवा प्रतिनिधि ज़हीर सुलेमान ने संयुक्त राष्ट्र महसाचिव के समक्ष यह महत्वपूर्ण सवाल रखा: "क्या आपको विश्वास है कि हमारी पीढ़ी अब भी भविष्य बदलने में सक्षम है?"
महासचिव ने जवाब में, अतीत की विफलताओं को स्वीकार किया, लेकिन वर्तमान पीढ़ी के जोश और क्षमता में विश्वास जताते हुए कहा, “मेरी पीढ़ी बहुत देर से सक्रिय हुई. लेकिन नई पीढ़ियों के पास अब वह साधन, ज्ञान और संकल्प हैं - और मुझे पूरा विश्वास है कि वे ही हमें प्रकृति के साथ सन्तुलित एवं टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाएँगी.”
मध्य अमेरिका के ग्वाटेमाला, ऐल सल्वाडोर, होंडुरास, कोस्टारीका और पनामा जैसे विभिन्न देशों में युवाओं ने एकजुट होकर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए न्यायपूर्ण ऊर्जा परिवर्तन की हिमायत की.
स्पष्ट सन्देश
महासचिव ने स्पष्ट चेतावनी दी, "हम एक नई ऊर्जा क्रान्ति की दहलीज़ पर हैं. लेकिन यह बदलाव अपने-आप नहीं होगा - न उतनी तेज़ी से, न उतनी न्यायपूर्ण तरीक़े से, जितना ज़रूरी है. यह ज़िम्मेदारी अब हमारी है."
भारत के युवजन न केवल इस सन्देश को सुन रहे हैं - वे इसे दिशा और गति दे रहे हैं.