देशों से विवादों के शान्तिपूर्ण समाधान पर ज़ोर
सुरक्षा परिषद ने तमाम देशों से आपसी विवादों का समाधान शान्तिपूर्ण तरीक़ों से करने की पुकार लगाई है. परिषद का यह आहवान, एक प्रस्ताव में नज़र आया है जिसे मंगलवार को सर्वसम्मति से पारित किया गया है.
इसके लिए सुरक्षा परिषद ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र चार्टर में सुझाए गए ‘वार्ता, जाँच, मध्यस्थता, समझौता, सुलह और न्यायिक समाधान’ जैसे उपायों का ‘प्रभावी ढंग’ से उपयोग करने पर बल दिया.
जुलाई महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष पाकिस्तान द्वारा मंगलवार को प्रस्तुत और सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव में कहा गया कि सभी देश आपसी विवादों को बातचीत, कूटनीति व सहयोग के ज़रिए इस तरह सुलझाएँ कि अन्तरराष्ट्रीय शान्ति, सुरक्षा व न्याय को कोई हानि नहीं पहुँचे.
इसमें यह भी कहा गया कि देशों को किसी भी दूसरे देश की सीमाओं या आज़ादी के ख़िलाफ़ ताक़त का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के विरुद्ध हो.
साथ ही, इस बात पर ज़ोर दिया गया कि विवाद बढ़ने से पहले ही उसे रोका जाए, और इसके लिए सभी देश सुरक्षा परिषद के शान्ति प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु आवश्यक क़दम उठाएँ.
संवाद और रोकथाम कूटनीति
प्रस्ताव में यूएन महासचिव से आग्रह किया गया कि वे यह सुनिश्चित करें कि संयुक्त राष्ट्र “मध्यस्थता और तनाव रोकने के प्रयासों का नेतृत्व करे और उन्हें मज़बूती से आगे बढ़ाए”, साथ ही अपने शान्तिपूर्ण प्रयास भी जारी रखें.
इसमें संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता सहायता इकाई (MSU) के काम की सराहना की गई और सचिवालय से कहा गया कि हर स्तर पर ‘प्रशिक्षित,अनुभवी, स्वतंत्र, निष्पक्ष व अलग-अलग क्षेत्र व भाषाओं के मध्यस्थता विशेषज्ञों’ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.
MSU, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की मध्यस्थता विशेषज्ञता एवं समर्थन का प्रमुख केन्द्र है, जो ख़ासतौर पर दुनिया भर में शान्ति और बातचीत के प्रयासों में मदद करता है.
महिलाओं व युवजन की भागेदारी
प्रस्ताव में कहा गया कि विवादों को शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए समावेशी दृष्टिकोण अपनाना बहुत आवश्यक है.
इसमें ख़ासतौर पर महिलाओं की पूर्ण, समान व असरदार भागेदारी एवं युवाओं की सक्रिय भूमिका पर बल दिया गया.
साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को मज़बूत करने के लिए, क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए, जानकारी साझा करने व सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया.
परिषद ने महासचिव से आग्रह किया कि वे एक वर्ष के भीतर, “शान्ति से विवाद सुलझाने के तरीक़ों को बेहतर बनाने के लिए ठोस सुझाव दें”, और इस पर प्रगति की समीक्षा के लिए एक खुली बहस के आयोजन की योजना बनाएँ.