शान्ति को चुनने का मुद्दा, युद्धों के माहौल में, कूटनीति का सहारा लेने की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि ग़ाज़ा से लेकर यूक्रेन तक फैले युद्ध यह दिखा रहे हैं कि दुनिया अन्तरराष्ट्रीय क़ानून को निभाने में विफल हो रही है. उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे टकराव छोड़कर कूटनीति का रास्ता अपनाएँ और शान्ति से विवाद सुलझाने के लिए फिर से प्रतिबद्धता व्यक्त करें.
यूएन महासचिव ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि वैश्विक सुरक्षा के लिए यह एकमात्र टिकाऊ रास्ता है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में वार्ता, मध्यस्थता, सुलह जैसे दिए गए उपाय आज के समय में बेहद ज़रूरी हैं, जब संघर्ष बढ़ रहे हैं और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की खुलेआम अनदेखी हो रही है.
महासचिव ने कहा, "इस संकट की क़ीमत बेहद भारी है. इसे इनसानी ज़िन्दगियों, उजड़ी हुई बस्तियों और बर्बाद भविष्य के रूप में आँका जा सकता है. हमें कहीं और देखने की ज़रूरत नहीं, ग़ाज़ा में जो कुछ हो रहा है, वह एक भयावह मंज़र है… हाल के समय में मौत और तबाही का ऐसा स्तर कहीं और नहीं देखा गया."
भूखमरी का गम्भीर ख़तरा मंडरा रहा है, और राहत अभियानों को न तो सुरक्षित जगह मिल रही है, न ही काम करने की अनुमति.
UNOPS (योजना सेवा कार्यालय) और WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) जैसी यूएन एजेंसियों के दफ़्तरों के मुख्य गोदाम को निशाना बनाया गया है, जबकि इनके ठिकाने के बारे में पहले से ही सम्बन्धित पक्षों को जानकारी दे दी गई थी.
महासचिव ने दोहराया कि, "इन परिसरों (इमारतों) की पवित्रता अटूट है और इन्हें अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत हर हाल में सुरक्षा मिलनी चाहिए… किसी भी अपवाद के बिना."
'शान्ति को चुनिए'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि ग़ाज़ा से यूक्रेन, साहेल से सूडान, हेती और म्याँमार तक युद्ध भड़क रहे हैं. अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की अनदेखी हो रही है और भुखमरी व विस्थापन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं. आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा-पार अपराध भी सुरक्षा को और दूर धकेल रहे हैं.
उन्होंने ज़ोर दिया, "शान्ति एक विकल्प है, और दुनिया सुरक्षा परिषद से उम्मीद करती है कि वह देशों को यह विकल्प चुनने में मदद करे."
महासचिव गुटेरेश ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2.3 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि सभी सदस्य देशों को अपने अन्तरराष्ट्रीय विवाद शान्तिपूर्ण तरीक़ों से सुलझाने चाहिए.
साथ ही अध्याय 6 के अन्तर्गत परिषद को बातचीत, जाँच, मध्यस्थता, समझौता, न्यायिक समाधान, क्षेत्रीय संस्थाओं के सहारे या अन्य शान्तिपूर्ण तरीक़ों के इस्तेमाल का अधिकार है.
उन्होंने कहा कि ‘पैक्ट फॉर द फ्यूचर’ के एक्शन 16 में भी देशों से रोकथाम कूटनीति (preventive diplomacy) के लिए फिर से प्रतिबद्धता जताने के बारे में कहा गया है.
साथ ही, उन्होंने जुलाई में सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश पाकिस्तान की सराहना की, जिसने इन उपायों के व्यापक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने वाला प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया.
मतभेद दूर करें…
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्यों, ख़ासकर इसके पाँच स्थाई सदस्यों (P5), को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए.
उन्होंने याद दिलाया कि शीत युद्ध के दौर में भी सुरक्षा परिषद में संवाद के ज़रिए, शान्ति अभियानों, मानवीय सहायता और विश्व युद्ध रोकने जैसे अहम कार्य सम्भव हुए थे.
उन्होंने अपील की कि सदस्य देश संवाद के रास्ते खुले रखें, सहमति बनाएँ और सुरक्षा परिषद को आज की भू-राजनैतिक वास्तविकताओं के अनुरूप ज़्यादा प्रतिनिधि, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएँ.
उन्होंने क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि युद्ध के बीच भी मध्यस्थता सफल हो सकती है, और उन्होंने इसके उदाहरण के रूप में, यूक्रेन युद्ध के दौरान अनाज निर्यात सम्भव बनाने वाले ‘काला सागर पहल’ और रूस के साथ हुए समझौते की तीसरी वर्षगाँठ का ज़िक्र किया.
बहुपक्षवाद के लिए फिर से प्रतिबद्धता
महासचिव ने कहा कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार, शरणार्थी और मानवीय क़ानूनों के साथ-साथ सम्प्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनैतिक स्वतंत्रता के सिद्धान्तों का सम्मान करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र और इसके चार्टर की 80वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं, हमें कूटनीति के ज़रिए शान्ति स्थापित करने वाले बहुपक्षीय दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मज़बूत करना होगा.”
“मैं आप सभी के साथ मिलकर उस अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तत्पर हूँ, जिसकी दुनिया को ज़रूरत है और जो उसका अधिकार भी है.”