जीवाश्म ईंधन दौर अपने अन्त के निकट, नई जलवायु योजनाओं के लिए ज़ोर
दुनिया सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय (Renewable) स्रोतों की ओर बढ़त में, उस पड़ाव से आगे बढ़ चुकी है जहाँ से जीवाश्म ईंधन के प्रयोग में फिर से बढ़ोत्तरी होने की आशंका थी. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि पूरी दुनिया ने पर्यावरण और जलवायु सुरक्षा के लिए नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की दिशा में इतना बड़ा क़दम उठाया है कि अब यह मार्ग स्पष्ट रूप से निर्धारित हो चुका है और इसके बाद वापस जीवाश्म ईंधनों की तरफ लौटना मुश्किल है.
यूएन प्रमुख ने मंगलवार को देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि वे नवम्बर में ब्राज़ील में होने वाले COP30 जलवायु सम्मेलन से पहले, अपनी नई व्यापक जलवायु योजनाएँ प्रस्तुत करें. जीवाश्म ईंधन युग अपने अन्त के क़रीब है.
एंतोनियो गुटेरेश ने, न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में कहा कि स्वच्छ ऊर्जा में धन निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है, और सौर व पवन ऊर्जा की लागत इतनी कम हो गई है कि अब ये जीवाश्म ईंधनों से बेहतर साबित हो रही हैं.
उन्होंने कहा, "ऊर्जा परिवर्तन को अब रोका नहीं जा सकता. लेकिन यह परिवर्तन अभी उतना तेज़ या न्यायपूर्ण नहीं है जितना होना चाहिए."
यह भाषण ‘अवसर का एक क्षण: स्वच्छ ऊर्जा युग को गति देना’ विषय पर था, जो पिछले साल के ‘सत्य का क्षण’ का अगला भाग था.
इस भाषण के साथ ही एक नई संयुक्त राष्ट्र तकनीकी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई है जिसमें वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय संस्थानों के आँकड़ों का उपयोग किया गया है.
सम्भावनाओं में बदलाव...
महासचिव ने कहा कि असली बदलाव यह दिखाता है कि धन किस दिशा में जा रहा है. साल 2024 में स्वच्छ ऊर्जा में 2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जो जीवाश्म ईंधन में निवेश से 800 अरब डॉलर अधिक है. यह निवेश पिछले दस वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है.
मतलब साफ़ है कि दुनिया अब पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों (कोयला, तेल, गैस) से हटकर, स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर तेज़ी से धन लगा रही है, जो ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा और स्थाई बदलाव दर्शाता है.
अन्तरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के नए आँकड़ों के अनुसार, सौर ऊर्जा अब जीवाश्म ईंधनों की तुलना में, 41 प्रतिशत सस्ती हो गई है, जबकि कभी यह चार गुना महंगी थी. समुद्री पवन ऊर्जा भी 53 प्रतिशत सस्ती हो गई है.
दुनिया भर में 90 प्रतिशत से अधिक नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ, सबसे सस्ते नए जीवाश्म ईंधन विकल्प से बेहतर साबित हो रही हैं.
उन्होंने कहा, "यह केवल ऊर्जा में बदलाव नहीं है, बल्कि सम्भावनाओं में बदलाव है."
उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा अब विश्व भर में स्थापित शक्ति क्षमता में जीवाश्म ईंधनों के लगभग बराबर है, और "लगभग सभी नई ऊर्जा क्षमता जो पिछले साल बनी, वह नवीकरणीय ऊर्जा से ही आई है."
परिवर्तन की प्रक्रिया तेज़
महासचिव गुटेरश ने बताया कि हर महाद्वीप ने, जीवाश्म ईंधनों के बजाय, अधिक स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया है.
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य अब केवल एक वादा नहीं, बल्कि एक तथ्य बन चुका है. न कोई सरकार, न कोई उद्योग, और न ही कोई ख़ास हित समूह, इसकी बढ़त को रोक सकता है.
उन्होंने कहा, “स्वभाविक रूप से, जीवाश्म ईंधन समूह विरोध करेगा…और हम जानते हैं कि वे किस हद तक जाएंगे. लेकिन मुझे पहले कभी इतना भरोसा नहीं था कि वे असफल होंगे क्योंकि हम वापस लौटने के बिन्दु को पार कर चुके हैं.”
उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे अगली राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं (NDCs) में अपनी महत्वाकांक्षा को मज़बूत करें, जो कुछ महीनों में प्रस्तुत करनी हैं.
महासचिव ने 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार G20 देशों से, 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा के अनुरूप नई योजनाएँ तैयार करने और उन्हें सितम्बर में एक उच्च स्तरीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाने के लिए कहा है.
वास्तविक ऊर्जा का बोलबाला
महासचिव ने जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से पैदा होने वाले भू-राजनैतिक ख़तरों को भी उजागर किया.
उन्होंने कहा, "आज ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा जीवाश्म ईंधन हैं," और इसके उदाहरण के तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा की क़ीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी को बताया.
"सूर्य की रौशनी की क़ीमत कभी नहीं बढ़ती. पवन ऊर्जा पर कोई प्रतिबन्ध नहीं लगता. नवीकरणीय ऊर्जा का मतलब है वास्तविक ऊर्जा सुरक्षा… वास्तविक ऊर्जा सम्प्रभुता… और जीवाश्म ईंधनों की अस्थिरता से असली आज़ादी."